श्री सत्य सांई की मायावी दूनियां और मैं


दूसरे दिन जब मै थियेटर वर्कशाप के लिए पहूंच सारे लोग पहुंच चुके थे । सभी एक हॉल  के भीतर शोर मचा रहे थे हॉल के बाहर दरवाजे पर जूतों का ढेर लगा हुआ था। जूते के उपर जूते रखे हुए थे । ऐसा लगता है था कि किसी ने  बोरे से जूतों को एक जगह फेक दिया हो । मैं जूतों की स्तिथि देख कर समझ गया कि मेरा काम कितना सरल होने वाला है । मैं क्लास के भीतर पहूंचा गया पर उनको कोई फर्क नही पडा वो लगातार बाते कर रहे थे । हॉल में ऐसा लगा कि मछली बाजार अपने पुरे जोर  पर है । देखना है कि कौन सबसे अधिक जोर से आवाज लगा सकता है । मै कुछ नही बोला चुप चाप खडा हो गया और एकटक उन सभी को देखना शुरू कर दिया । कुछ पलों बाद कुछ लोग की नजंर जैसे ही मुझ पर पडी वो चुप हो गये । बाकि लोग लगे रहे । अब जो लोग चुप थे वह बोलने वालो को देख कर शर्माने लगे कुछ ने इसारे कर चुप कराने की कोशिश की तो उन सब की नजंर मुझ पर पडी फिर एक एक कर सभी चुप हो गये । मै अब भी चुप चाप पहले की तरह खडा था । जो क्लास रूम थोडी देर पहले शोर कर रहा था । अब आज्ञाकारी विद्यार्थी की तरह मेरे सामने चुपचाप खडा था । मै भी चुपचाप खडा रहा ।कुछ पल बीते तभी किसी को हंसी आई वह हंसी और फिर उसने अपनी हंसी रोक ली फिर सब कुछ शांत हो गया । कुछ पल बीते फिर एक को हंसी आई और इस बार सभी उसकी हंसी के साथ हंसने लगे । मै भी उनके साथ हंसने लगा । यह थी थियेटर वर्कशाप की शुरूवात । थोडी देर में सभी हंसते हंसते बेहाल हो गये।  फिर सभी शांत हो गये तब मैने कहा कि आपके जूते बाहर बहुत तकलिफ में है ।जब मै आ रहा तो आपके जूतों ने मुझ से कहा कि उनको सांस लेने में दिक्कत आ हो रही है । सब एक दूसरे के सीने पर खडे हो गये है । मेरा इतना बोलना ही था कि सभी क्लास से  बाहर जाने लगे। मैने उनको रोक दिया और उनसे कहा कि मै तीस काऊट करूगा आप अपने जूते लाइन से रख कर वापस अपनी जगह आ जायेगे । मैने काउंट शुरू किया और सभी लोग भागे बाहर और अपने अपने जूते को लाईन में रख कर वापस क्लास रूम में आ गये । वर्कशाप की शुरू वात होगई सभी लोग वर्कशाप को इंजाॅव करने लगे थे । तभी गीता सरदाना और सरस्वती राव जी आ गई । मुझे वर्कशाप ब्रेक करना पडा । गीता जी बोली की हिंदी से इंगलिश अनुवाद का काम चल रहा है अब डायलाग रिकॉर्डिंग के लिए कुछ लोगो का वाइस टेस्ट आपको लेना है । वह लोग शाम को आ रहे है ।  मेरे सिर पर फिर एक बम फटा ,मै बोल पडा कि जो बच्चे एक्ट करेगे क्या वो बच्चे अपनी वाइस में डायलाॅग रिकार्डिंग नही करेगे । सरस्वती जी ने कहा नही यह बच्चे डायलाग पर सिर्फ लिपसिंग करेगे । पर क्यो आप लोग ऐसा क्यो कर रहे है इससे काम डबल हो जायेगा । फिर दूसरे की आवाज पर वो भी आप कहे रहे की एडल्ट की आवाज पर बच्चे लिपसिंग करेगे । यह ठीक नही है । एक डिरेक्टर के तौर पर यह ठीक नही होगा यह मेरा कहना है । प्रोजेक्ट की कवायलिटी पर नेगेटिव असर पडेगा । इस पर गीता जी बोली कि इनकी इंगलिश का उच्चारण ठीक नही है । हमें कान्वेंट उच्चारण चाहिये । तो फिर वैसे ही लोगो को एक्ट के लिए चुनते फिर इनको चुनने की क्या जरूरूत थी ? इस पर गीता जी बोली की काम हम लोगो बच्चो से ही करवाना है । हम बडे लोगो को शामिल नही कर सकते । इस पर मैने कहा कि आप लोग काम को उलझा रहे है । मै पुरी तरह आपके साथ सहमत नही हो सकता आज तक मैने ऐसे काम नही किया है । आप ही बताये कि जब इन लडकियो को मालुम होगा कि इनके आवाज में रिकार्डिंग नही होगी तो इन पर क्या बीतेगी । इस प्रश्न का जवाब मुझे नही मिला । मैने कहा कि आपको मेरी शर्त माननी होगी गौतम बुद्ध  का और सारथी की वाइस रिकार्डिंग वही लोग करगे जो एक्ट कर रहे है । गौतम बुद्ध के पिता राजा शुद्धधन और वो साधु जो सिद्धार्थ के जन्म पर हिमालय से आता है उसकी आवाज आप मेल से करवा ले । बात समझ में आ गई।  अब दूसरी समस्या यह हुई कि समिति के बहुत सारे लोग अपनी आवाज देने के लिए आ गये । मुझे उसका चुनाव करना था । सभी लोग मुझ से उम्र में बडे थे । मैने सभी को सुना करीब चार लोगो को सेलेक्ट किया । अब उनकी रिहर्सल अलग शुरू होगई । इधर जो लडकी को मैने गौतम वुद्ध के रोल के लिए चुना था । वह बिना कुछ बोले वर्कशाप से गायब होगई। करीब चारदिनो बाद जब उसे बुलाया गया तो आई । उसका चेहरा उदास था । मैने उससे ना आने का कारण पुछा तो वह कुछ नही बोली । मैने उसकी सहेली से पुछा तो उसने सिर्फ इतना ही बताया  कि इनके माता पिता के बीच समस्या चल रही है । मुझे बात समझ में आई मेरे मन में उस लडकी के प्रति सहानभूति होने लगी । सातवीं या आठवी में पढने वाली लडकी के उपर यह दवाब । मैने उसका ध्यान इस बात के तरफ खीचने की कोशिश करने लगा कि यह अवसर तुम्हे मिला है तुम इसके परिणाम के बारे में सोचो कल्पना करो कि पूट्टापर्ति के स्टेज पर अंतर राष्ट्रिये दर्शको के सामने अपना परफोरमेंस दे रही हो । लोग तुम्हे याद रखेगे । श्री  सत्य साईं के इतिहास में तुम्हारा भी नाम जुड़ जायेगा । तुम क्या इतनी बडी उपलब्धी को मिस करना चाहोगी । मेरी बातो को सुन कर उसके चेहरे का रंग बदलने लगा । वह बोली सर मै करूंगी आप मुझे एक मौका दाजिये । मै अब वर्कशाप में एबसेट नही करूंगी । इसके बाद उस लडकी ने पुरे मनोयोग से काम करना शुरू किया । बाकि लोग भी उसे देख कर मोटीवेट  हो गये । यह देख कर मै थोडा इत्मीनन हुआ पर मेरा यह इत्मीनन दो पल का था। अब जो लोग रोज रिहर्सल देखने आते थे उन लोगो ने काम में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया ।आप ऐसा क्यो कर रहा है । हमारा पूट्टापर्ति में ऐसा नही होता । एक दो बार मै सुन लिया और उनको इगनोर किया पर मिजाज भीतर से उबरने लगा था । काम करते हुए फिर एक साऊथ इंडियन महिला ने कुछ कामेट किया और मै भयंकर रूप से रिएक्ट किया ,,मैने कहा कि जब आपको थियेटर की इतनी जानकारी है तो आप खुद ही डायरेक्ट कर ले । अब मै जा रहा हूं आप काम करे ।इतना बोल कर मै हॉल से बाहर निकल गया गुस्से में तेजी से स्कूल के कैम्पस से बाहर निकल कर सडक पर आ गया ।मन ही मन बोलता जा रहा था कि कहां नन प्रोफेशनल लोगो के बीच आ गया ।सुर का सा नही पता है और गा ने चले है शिवरंजनी । मुझ से गलती हुई है मुझे वापस मुम्बई चले जाना चाहिये । इनका एडवांस वापस कर निकल जाना ही मेरे लिए बेहतर होगा।  मै काम नही करूगा ।यह सोचते हुए सडक पर चला जा रहा था तभी सामने से चौधरी जी की कार आ कर मेरे पास रूकी उसमे से गीता जी चौधरी जी उतरे और कोई एक सज्जन थे मुझे उनका नाम नही मालुम था । सभी को मैने सफ साफ कह दिया मै यह काम नही कर सकता आपका एडवांस मै वापस कर दूंगा।  यह सुन तीनो लोग परेशान हो गये।  पुछे तो मैने सारी कथा बता दी कि मेरे फील्ड में यह नही होता । निर्देशक जो तय करता है वही होता है । मुझे गीता जी ने कहा कि आप सही है। गलती हुई है । हम उसे आगे से नही दोहरायेगे ।आप काम को बीच में छोड कर ना जाये । देखिये बच्चे निराश हो जायेगे । बच्चो का चेहरा याद आते ही ,मैं थोडा सहज हो गया । उस लडकी की बात याद आ गई जिसने पुरे मनोयोग से काम शुरू कर दिया था । मै अगर छोड़ता हूं,तो उस पर बहुत ही निगेटिव असर पडेगा । मैने कहा कि मुझे रिहर्सल के समय सिर्फ एक महिला की उपस्थिति चाहिये । मै आपको दस दिन बाद नाटक का एक रिहर्सल दिखाऊँगा । बात तय होगई । काम फिर शुरू हो गया। दस दिनो बाद मैने संगीत समाज के मंच पर एक रिहर्सल शुरू की उसमे वह महिला भी आई जिस पर मे रिएक्ट किया था । रिहर्सल शुरू हुआ एक गलती नंद से हो गई या उससे किसी ने वैसा करने को कहा उसने अपना धनुष वाण उल्टे हाथ से पकड लिया । बस चौधरी जी को मौका मिल गया वह रिएक्ट करने लगे दस दिन हो गये बच्चे ठीक से धनुष वाण पकड़ना नही सीखे है आप क्या कर रहे है । मैने देखा की नंद गलत तरीके सा धनुष को पकडा हुआ था । वह महिला जिस पर मै रिएक्ट किया था वह मेरी सामने खडी मेरे चेहरे को देख रही थी । मै चुप रहा, क्यो कि चौधरी जी सीनियर थे। पर मन चीखा की इसमें इतना चीखने चिल्लाने की क्या बात थी । मेरे साथ काम कर रहे बच्चो को भी बुरा लगा ।तभी एक आदमी मेरे पास आया और बोला अच्छा किया आपने चौधरी जी की बातो पर रिएक्ट नही किया । मै उस आदमी के तरफ देख कर इतना ही बोला मै समझ गया । उसने कहा क्या ? मैने कहा कि आपके यहां डिवोटी के ईगो को सटिसफाईड किया जाता है । पर मै जिस आध्यात्मिक स्कूल से पढा हूं वहां ईगो को तोड  कर चकनाचूर कर दिया जाता है । उस दिन मेरे मन में यह विचार उठा कि क्या सत्य साईं कि यही शिक्षा है जो मुझे दिखाई दे रहा है या फिर यह लोग सत्यसाईं के पीछे अपनी शिक्षा चला रहे है । एक महिला की गलती को गलती नही मान कर उसकी गलती का बदला मुझ से ले लिया । इस घटना ने मेरा नजरिया इन लोगो के प्रति  बदल दिया । मैने अपने अपमान को शांत रखा । बच्चे मुझे घेर कर बैठ गये सभी उदास थे। मैने नंद से पुछा तुमने ऐसा क्यो किया । इतना बोलना था कि उस लडकी की ऑखों में आंसू आ गये। मैने कहा की अगली बार ध्यान रखना । तभी चौधरी जी आये और बोले आप कृपा कर मेरी बतो पर रिय्एक ना करेगे । संस्था चलाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है । मै चुप रहा पर मन ही मन यह संकल्प लिया की अब आप मुझ पर रिएक्ट नही कर पायेगे । वह महिला सामने खडी हो कर मुस्कुरा रही थी । मन घृणा से भर गया । मै गुरू जी के कमरे के तरफ चला गया । 

आज इतना ही । अभी आगे भी कुछ रहस्य से पर्दा उठेगा ।तब तक के लिए विदा लेता हूं ।

सादर धन्यवाद 

रवि कांत मिश्र 

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