श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

बहुत बात विवाद के बाद यह तय हुआ कि नाटक हम लोग करेगे । हंवन कूड़ चुकी मंच के बीच में था तो नाटक को मंच के अग्रभाग और अंत भाग के बीच खेलना होगा । यह मेरे जीवन का पहला अनुभव था जब मंच के सेन्टर में हंवन कुंड जिसमे से धुऑ अब भी निकल रहा है । भले ही धुऑ हल्का हल्का सा निकल रहा है । पर भीतर आग तो प्रज्वोलित है और मुझे अपने नये एक्टरों के साथ रिकार्ड डेट नाटक को मंच पर खेलना है । मैने सोच लिया कि मुझे क्या करना है । मैने सबसे पहले पैतीस मिनट वाले प्ले के कैसेट को टेप से निकाल कर पैंतालीस मिनट वाला कैसट लगा दिया।  सभी लडकियो में और उनके माता पिता में उत्साह का संचार हो गया । सभी रिहर्सल  पर आ गये । मैने रिहर्सल वाले स्थान पर चौक से लकीर खीच कर एक हवन कुंड बनाया । नाटक शुरू करने से पहले एक गेम शुरू किया की मंच की सीमा के भीतर आप तेजी से भागेगे पर जैसे ही मैं स्टाप बोलूंगा आप अपने जगह रूक जायेगे । शर्त सिर्फ इतना है कि आप हंवन कुंड के बाहर ही सब कुछ करेगे अगर आप हंवन कूड़ के लकीर को भी छु लिए तो आप इस गेम से आउट हो जाओगे । गेम शुरू हुआ । सभी  लडकियो ने गेम को इंजॉय करना शुरू किया। उनके माता पिता जो बैठ कर देख रहे थे । वह लोग भी इंजॉय करने लगे । मन पर नेगेटिव बादल छंटने लगे और पाजेटिव इनर्जी चारो तरफ स्प्रेड करने लगा । मेरे मन मैं आत्मविश्वस का संचार तेजी से होने लगा । भीतर से आवाज आई नाटक तो मेरा सफल हो कर रहेगा। यह विचार के साथ फिर मन में एक विचार तेजी हे आया कि कहीं ऐन वक्त पर कोई नया रोडा  ना आ जाये । इसलिए गौतम वुद्ध के बताये मध्यम मार्ग पर ही चलो । नाटक का शो कल शाम को होना था । मैं संजय और गुरू जी तीनो खुश थे । उस रात मैने तनाव से मुक्त हो कर डिनर किया और लंबे वाक पर निकल गया । संजय साथ में था । आसमान पर पुरा चांद था और हवाओं में बेली फूलो की महक । हम धीरे धीरे सडक के किनारे चल रहे थे । संजय ने कहा भैया आपने हंवन कुंड की समस्या का समाधान निकल लिया । हो जाता है संजय काम करते करते समस्या मे ही समाधान दिखने लगता है । बस बात इतनी सी है कि  समय पर सही उपाय का मन में आ जाना । इस पर संजय ने कहा मैने इस घटना से ही यही सीखा कि इंसान को हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना चाहिये । मैं संजय के तरफ देख कर मुस्कुरा दिया और बोला सही जा रहे हो । इस नाटक को यहां तक लाने में दिमाग की अच्छी खासी एक्सरसाइज़ हो गई है । चलो वापस चलते है नही तो गेट बंद हो जायेगा।  इतना बोल हम दोनो खिलखिला कर हंस दिये । दूसरे दिन शाम छः बजे नाटक उसी मंच पर शुरू हुआ करीब दो सौ बीस देशो के लोगो ने नाटक को देखा । मुझे जीवन में पहली बार इतना दर्शक मिला था वह भी एकदम अनुशासित दर्शक।  नाटक को स्वामी भावभिभोर हो कर देखते रहे । जब अर्थी वाला दृश्य आया तो मन एक बार कांप गया मैने स्वामी के तरफ देखा जो मुझ से चार हाथ कि दूरी पर थे । मै इस नाटक में लाईट कर रहा था मंच के आगे बाये तरफ बैठा था । स्वामी मेरे पीछे एक कुर्सी पर बैठे थे। वह इस दृश्य को सहज भाव से देखते रहे । मै उस ज्ञानी मानव को याद किया जिसने कहा था कि स्वामी के पास से अर्थी नही जा सकती । मुझे खुशी हुई कि मेरे नाटक को स्वामी इतना ध्यान से देख  हे थे और बीच बीच में बोल रहे थे देखो मैने उपवास करने के लिए मना करता हूं । देखो वुद्ध उपवास कर कितना अपने शरीर को दुख पहुंचया है । नाटक सफल रहा स्वामी को इतना पसंद आया कि स्वामी ने  बिहार वालो को हर साल एक नाटक करने का आदेश दे दिया । नाटक समाप्त होने के बाद वह स्वयं मंच पर आये और सभी को साडी गिफ्ट  किया गया । बिहार झारखंड स्टेट का नाम सभी के जुबान पर था सभी खुश थे । नाटक की खुशी एक दूसरे से बांट रहे थे । मैने देखा कि सभी अपनी खुशी बाँटने में व्यस्त है मैं चुपचाप वहां से निकल कर गणेश गेट से बाहर निकल गया । बाहर एक सिगरेट जलाई और धीरे धीरे कश लेते हुए वाक करने लगा । मेरा नाम कही नही था पर मेरा काम सब देख कर खुश हो रहे थे ।
मै थोडा खुश था और थोडा गमगीन भी ,,,,चल रहा था अपने साथ ,,एक जिम्मेदारी  से मुक्त हो कर ,,अब कल से रिहलसर्ल नही ।।कल से एक नई शुरू वात।  यह पहले नाटक का अनुभव था ,,इस तरह के पांच और नाटको का अनुभव मुझे हुआ । 
आपका बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏🙏
रवि कांत मिश्र

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