सफर अभी बाकी है

अ ने पापा को लैटर लिखना शुरू किया । 
डियर पापा ,
आज मै स्कूल नही जा कर बाजार चला गया था पिक्चर देखने की इच्छा थी पर पिक्चर देखने से पहले ही मैथ के टीचर दास सर ने मुझे पकड़ लिया और फिर मुझे स्कूल लाया गया । इसके बाद मुझे आपको लैटर लिखने की कहा गया । जो मै लिख रहा हूं । मै मानता हूं कि मैने गलती की है पर यह गलती मैने क्यो कि ? इसलिए की मै स्कूल जा कर बोर हो जाता हूं । मुझे स्कूल जाने की इच्छा नही होती है पर मुझे स्कूल जाना पडता है । पापा स्कूल इतना बोरिंग क्यो होते है इतना पेन फुल और डरावना क्यो है ? क्या दुनियां के सारे स्कूल इतने ही डरावने है । मुझे लगता है कि स्कूल एक जेल के समान है । टीचर जेलर है और हम सभी स्टूडेंट कैदी है । मेरा दम घुटता है पर फिर भी मै स्कूल आता हूं । पापा क्या दुनियां में ऐसा भी कोई स्कूल है जहां जाते वक्त स्टूडेंट हंसता हुआ जाये और लौटते वक्त भी हंसता हुआ आये। आप किसी भी स्कूल की छुट्टी होने पर उसके गेट के पास खडे हो जाये । स्टूडेंट ऐसे खुशीयां मानते हुए बाहर निकलते है जैसे उन्हे अभी जेल से रिहाई मिली है । पापा कुछ तो गडबडी हो रही है और लंबे समय से हो रही है पर हम उसकी तरफ ध्यान नही देना चाहते। बस परसेंटेज क्या है हमारा ध्यान इस बात पर है । मेरा परसेंटेज क्या है आप जानते है पर मै उसे सीखना नही रटा मारना कहता हूं । सीखा तो मै आज बाजार में उस सेल्स मैन से जो  पुरी आत्मा से जोर लगा कर अपने कस्टमर को अपनी तरफ बुला रहा था । उस रस्सी पर चलने वाली छोटी सी लडकी से जो अपनी जान जोखिम में डाल कर फोकस करना हमे सीखा रही थी । जीवन में बैंलेस करना सीखा रही थी ।पापा मुझ से यह गलती हुई है कि मै स्कूल के समय बाजार में घुम रहा था ,,पर यह गलती आगे भी हो सकती है । मेरा मन करता है जो ज्ञान बाहर है उसे भी सीख लूं । 
थैंक्स पापा ,,मिस यु 
आनंद 
लैटर लिख कर अ ने गहरी सांस ली और छोडी । एक बार पेन को देखा फिर मुस्कुराते हुए ,उसे अपने बैग मे रख लिया । एक बार लैटर को फिर से पढा और कापी से पन्ना अलग कर उसे टेबल पर रख दिया । तभी जीत कमरे में तेजी से आया क्यो बे लव लैटर तेरी पुरी होगई , टेबल पर पत्र देख उसे उठा कर पढने लगा , पुरा लैटर एक सांस में पढ लिया । लैटर पढ कर बोला तुझ से और क्या उम्मिद कि जा सकती है । यह बात तेरी बहुत अच्छी बे गलती करते हो पर दोबारा गलती करने का वादा भी कर लेते हो । यानी चित भी तेरी पट भी तेरी,, साले मुझे छोड कर फिल्म देखने गया देखा ना ,पकडा गया।  अबे नाईट शो चलते रात को कमरे से चुप चाप निकल कर चोरी चोरी फिल्म देखना और चोरी चोरी वापस आ कर अपने विस्तर पर सो जाना ,,माई गॉड कितना रोमांच से भर देता है । रीना राय वाली आशा तो हमने साथ साथ वैसे ही देखी थी । फिर आज क्या होगया कि तु दिन के उजाले में कांड कर आये । बस यार मुड हो गया और चला गया । अ लापरवाही से बोला । यह सुन जीत लेक्चर देने के भाव में आ गया कमर पर हाथ रखते हुए बोला ,,बेटा तेरे लक्षण और तेवर ऐसे ही रहे तो किसी दिन तु हवालात के चक्कर भी लगा लेगा । अबे तुम्हारी प्रोब्लम क्या है ? कभी तो तुम इतना सहज सरल हो जाता है फिर कभी इतना जटिल कि कुछ समझ ही नही आता है ,साले माखनचोर तुझे कोई झेल नही सकता ,सिर्फ मुझे छोड कर ,,देखना आज तो मैम भी तुझसे अपना पल्ला झाड़ लेगी । बेचारी कितना अपसेट हो गई है क्लास में इतना अपसेट मैने कभी नही देखा था ,पढाना तो चैपटर टेन और पढ़ने लगी चैपटर इलेवन।  कितना एमबेरसमेट होना पडा । यह सब वो तेरे कारण झेल रह है ।बेटा मैम पर रहम कर । यह सुन अ एकदम से सजिदा हो गया।  जीत का हाथ पकड़ते हुए बोला बस और मत बोल मुझे बहुत गिल्ट होने लगा है । अबे तो इस गिल्ट से बच और मैम से माफी मांग ले और साथ में दास सर से भी माफी मांग लियो । और हा यह लव  लैटर जो तुमने लिखी ना इस पर तो माफी नही मिलेगी इस लिए बेटा चुटिया प्रसाद माखनचोर यह लैटर तु अपने पास रख और यह लैटर जो मैने तेरी हेडराईटिग में तेरा पापा मेरे अंकल को लिखी है उसे मैं मैम को जा कर दे देता हूं । बस अब थैंक्स बोलने की जरूरूत नही है । जीत अपने जेब से एक लैटर निकल कर अ को दिखाये और उसके लैटर को उसके बैग में डाल कर बोला,, बेटा समझ ले असली जिन्दगी जीने के लिए कभी कभी नकली बात बडे काम आती है । लोगों को असली सच्ची बात हजम नही होती । जो चला आ रहा है बाबा आदम के जमाने से वही माखनचोरी की परंमपरा, वही लोग सुनना पसंद करेगे । कमीने तेरी दोस्ती के लिए कितने पाप तु मुझ से करवायेंगा । बडा माखनचोर है तु , चल उठ ,,चल मेरे साथ ,,ठहर ,,इतना बोल कर जीत रूक गया बोतल से पानी निकाल कर चुल्लु में लिया और अ की ऑखों के नीचे हल्का सा भिगो दिया उसके घुंघराले बाल बिखर दिये फिर बोला अब देवदास वाली एक्सप्रेशन चेहरे पर रखना ,,सिर झुका कर यस सर यस मैम बोलना मामला यही रफा दफा हो जायेगा।  अ का मन चीखा यह गलत है वह यह सब नही करना चाहता । पर जीत के सामने कुछ नही बोला। चुपचाप उसके पीछे चल दिया । जीत उसे ले कर प्रिंसिपल के केबिन के पास पहूंच ही था कि मैम प्रिंसिपल के केबिन से बाहर निकली सामने अ और जीत को देख कर एक पल के लिए ठिठक गई । अ सिर झुकाये खडा हो गया जीत दुनियां भर के दुख को खीच कर अपने चेहरे पर ले आया और भीगे गले से बोला मैम यह माफी मांगने आया है ,,आप प्लीज इसे माफ कर दे नही तो यह रो रो कर अपनी ऑखे सुखा लेगा,  बहुत रोया है ,मै जब इसके पास गया तो लैटर लिख कर रो रहा था । देखिये इसके गाल अब भी पानी मतलब ऑसू से भीगे हुए है । मैम एकटक अ को देखती रही कुछ नही बोली । जीत फिर शुरू हो गया मैम यह लैटर आप देख लिजिये । लैटर खोल कर मैम के तरफ आगे बडा दिया ,,अ पहली बार नज़र उठा कर लैटर को देखा तो उसकी ऑखे आश्चर्य से फैल गई कमीने ने हू बहू हेडराईटिग मिला दी साथ में कागज पर पानी की बूंदे जगह जगह गिरा कर शब्द धुंधले कर दिये थे । जैसे लैटर लिखता वक्त मेरी ऑखों से आंसू कागज पर गिर कर शब्दो को धुंधला कर गये।  मैम ने लैटर देखा पर लिये नही ,,चुपचाप आगे निकल गई । जीत और अ दोनो खडे देखते रह गये । तभी दास सर आ गये और बोले चलो प्रिंसिपल सर के पास ,,दोनो दास सर के साथ प्रिंसिपल सहाब के पास पहूंचा जो पहलवान जैसे इंसान थे पर उनकी हाईट शार्ट थी दोनो को अपने चश्मे के भीतर से देखे और बोले तो यही वो है क्या नाम है  सर के आनंद ,जीत बोल पडा । तुम इसके वकिल हो प्रिंसिपल सहाब थोडा गुस्से में पुछे । नही सर यह क्लास में रो रो कर अपना बुरा हाल कर लिया है रोने से इसका गला जाम हो गया है देखिये यह लैटर इस पर भी आंसू के निशान है । प्रिंसिपल सहाब ने अपने चश्मे से लैटर को देखा ,देख कर उनको थोडा रहम आ गई  वह तुरंत मध्यम स्वर में बोले अरे आनंद क्यो ऐसा काम करते हो ? जिसके लिए रोना पडे ,,सर अब नही करेगा ,,अरे बोल ना सर के सामने ,,पर अ चुप रहा यह देख जीत ने तुरंत पैंतरे बदला और बोला सर वो इसका गला जाम हो गया है बोलने की कोशिश करेगा तो फिर रो पडेगा । ठीक है ठीक इसे ले जाओ क्लास टीचर सुचित्रा मैम के पास और लैटर उनको ही दे देना,  जाओ ,,ठीक है दास सर , जी सर बिलकुल ठीक है सर आप कितने उदार है सर । दास दास की तरह झुक कर बोला। जीत मौका देख कर अ के साथ प्रिंसिपल के केबिन से बाहर निकाल गया ।बाहर निकलते ही बोला चल जान बची ,,पर साले तु तो गांधी जी तरह मौन धारण कर लिये थे कुछ तो हा हूं बोलना चाहिये।अ चुप रहा सिर्फ एक बार जीत के तरफ देखा । जीत बोला चल बे तेरी मैम के पास गुस्से से एटम बम बन गई है बेटा बस तु देवदास का एक्सप्रेशन याद रखना ।दोनो का चमन रूम में पहूंच  मैम चुपचाप बैठी कापी जांच रही थी । दरवाजे पर से  जीत की आवाज आई मे आई कम इन मैम ,मैम सिर हिला कर भीतर आने का सकेंत कि पर वह कापी जांच करती रही । मैम लैटर प्रिंसिपल सर ने आपको देने को कहा है । मैम नज़र उठा कर अ और जीत के तरफ देखी और बोली रख दो । जीत ने लैटर टेबल पर रख पेपर वेट से दबा दिया । दोनो खडे हो गये कुछ पल तक मूर्खों की तरह खडे रहे । उनकी समझ में नही आ रहा था कि क्या बोले जो बोलना था वह बोल चुके थे । दोनो खडे रहे ,इधर उधर जीत देख रहा था बडी मुश्किल से पुछा मैम मे आई लिव ,,मैम सिर हिला कर जाने का सकेंत की , जीत अ का हाथ पकड कर बोला थैंक्स मैम । दोनो जाने लगे तभी मैम बोली वेट ,,दोनो के पांव फर्श से चिपक गये ,दोनो मैम के तरफ पलटें, मैम बोली जीत तुम जाओ आनंद तुम यही रूक जाओ ।जीत चला गया आनंद रूक गया । मैम बोली शाम को नीम का पेड मत लाना  और घर पर आने की जरूरूत भी नही है । यह सुन अ को एक जबरदस्त झटका लगा । भीतर से हिल गया वो कि मैम इतनी भयानक सज़ा देगी । वह कुछ नही बोला चुप चाप सिर झुकाये खडा रहा है । मैम बोली यू मे गो नाऊ ,,अ चुपचाप  कॉमन रूम से बाहर निकल गया । मैम अ को जाते हुए देखती रही उनकी ऑखों मे हल्की सी नमी उतर आई ,,जिसे उसने झट अपने रूमाल से पोछ लिया ,,यह सब कुछ जीत दरवाजे के पीछे खडे हो कर उस होल से देख रहा था जो दरवाजे कै कोने में होगया था ।

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