सफर अभी बाकी है
मैम के घर से वापस लौटने के बाद अ दादी के पास गया और दादी के पास उनके सामने जमीन पर बैठ गया ।दादी रामायण पढ रही थी । अ चुपचाप बैठ कर रामायण सुनता रहा। पर उसका मन रामायण से जुड नही पा रहा था । उसके मन के स्क्रीन पर एक दृश्य,बार बार रह रह कर उभर रहा था कि मैम और मैम की खामोशी। उसका मैम के पास खडा होना । यह खामोशी कही उसके मन में चुभ रहा था । इस चुभन से अ को दर्द हो रहा था पर वो इस दर्द को अपने लिए सही भी मान रहा था । दूसरी तरफ इस दर्द से कही अधिक एक अपराध बोध उसके भीतर आकार ले रहा था कि मैम को उसके कारण जो दुख हुआ था । उससे अ कही ज्यादा आहत हुआ था । दादी रामायण पढते हुए एक बार अ के तरफ देखी फिर रामायण पढने लगी । कुछ देर बाद दादी का रामायण पढना समाप्त हुआ दादी रामायण को सिर पर लगा कर उसे लाल कपडे से ढक दिया और बोली ,,मन से लड़ना बंद कर दे ,,मन के साथ जीना शुरू कर । दादी आपको कैसे पता चला कि मै मन से लड रहा हूं ? ,,चेहरा और खास कर तेरी ऑखे बता रही है कि तु लम्बे समय से मन से लड रहा है । देख बेटा मन तभी शक्तिशाली होगा जब बीच से दो भागो में टूटा नही होगा। मन जैसा है उसे स्वीकार कर ले ,मन रोता है, तो रो ले मन हंसता है तो हंस ले । अपने मन के विपरीत ना जा । क्यो कि आखिर में तुझे अपने मन के साथ ही जीना है।चल उठ और जा फ्रेश हो कर आ, मैने तेरे लिए गाजर का हलुआ बनाया है । अ अपनी जगह से उठा और उसके दिमाग में मैम की खामोशी गूंज रही थी । दादी ने जो कहा उसका असर उसके उपर नही हुआ । अ अपने आप से बोल पडा मैने जो मैम से कह दिया ,,कही मैम सचमुच मुझे माफ नही करेगी तो फिर मै मैम से कभी बात नही कर पाऊगा । कभी उसके घर नही जा पाऊगा । अबे क्या जरूरूत रही मैम से यह कहने की मुझे माफ मत कीजियेगा जीत अ के मन से चीखा,,अबे साले माखान चोर क्या समझ कर तुने यह कह दिया ,,अरे यार पता नही उस समय मेरे मुहं से अपने आप ही निकल गया। अब सोचता हूं तो अफसोस हो रहा है कि मैं ऐसा क्यो बोल दिया ? तो अब क्या चाहता है तु ,जीत ने प्रश्न किया । यार मै मैम की खामोशी सहन नही कर पा रहा हूं ,,इससे अच्छा वह मुझे डांट देती, पनिश कर देती ,,मार भी देती ,,तो तुझे कोई दुख नही होता यही कहना चाहता है ना बे ,जीत बात बीच में काट कर बोल पडा । देख जीत तु जानता है कि मुझे मैम का साथ चाहिये ।पर अब मैं किस मुहं से बोलूं कि वह मुझे माफ कर दे । इस बात पर जीत चुप हो गया । फिर बोले देख एक आईडिया है तु मैम को लैटर लिख और इतना ही लिख की मैम आई एम सारी आप मुझे डांट ले ,,मार ले पर खामोश रह कर खुद को दुख ना दे ।यह मुझ से नही होगा । तो फिर इंतजार कर जीत गुस्से से बोला और एकदम से चुप हो गया । इधर अ भी चुप होगया था पर उसके मन के भीतर भूचाल चल रहा था ।इसी भूचाल को मन में लिए अ वाशरूम के तरफ चला गया ।
आधी रात हो चुकी थी अ मैम के घर के पास खडा था । मैम का घर अन्धेरे में डूबा हुआ था। अ एकटक अन्धेरे घर के तरफ देख रहा था । कुछ पल वह घर को चुपचाप देखता रहा । लभी जीत बोला अबे आगे भी जायेगा या यही रात भर खडा रहेगा । अ धीरे धीरे घर के तरफ चलना शुरू कर दिया ।गेट के पास पहूंचा तो गेट पर ताला लगा हुआ था । जीत बोला अबे देख क्या रहा है । चढ कर पार कर ले ।अ ने वही किया धीरे धीरे आगे बड़ते हुए बरामदे में पहूंच गया । दरवाजे के पास पहूंचा ही था की दरवाजा खुला और दरवाजा के भीतर से वही काला कुत्ता जोर से भौंकता हवा मे लहराता हुआ अ के चेहरे से टकराया । अ के मुहं से चीख निकल गई ,,जोर से चीखते हुआ अपने विस्तर बैठ गया। गहरी सांसे लेने लगा। अब भी उसका दोनो हाथ चेहरे पर था । थोडी देर में वह सहज हो गया । तपाई पर रखी जग से पानी पिया और अपने आप से बोला यह कुत्ता कहां से आ गया । लगता है उस काले कुत्ते का असर मुझ पर कुछ ज्यादा ही हो गया है । सपने तक पहूंच गया । चलो सोने की कोशिश करता हूं पर नींद अब आयेगी नही । अ विस्तर से नीचे उतर गया खिडकी खोल बाहर सुनसान सडक को देखने लगा । तभी उसके मन से जीत बोला अबे तु सोचना बंद कर दे नही तो तु एक दिन पागल हो जायेगा। यार तु अपने उम्र से बहुत आगे की सोच रहा है । चल अभी यह मान ले कि दो घंटे कुछ मत सोच , दिमाग को खाली रहने थे । कोशिश करता हूं । वापस जा कर विस्तर पर लेटता है और अपनी ऑखे बंद कर लेता है । दिगाग से तस्वीर निकल कर हवा मे विलीन होने लगते है ,सिर्फ मैम की बातें, मैम के साथ पत्थर पर बैठे हुए । कमल फुल मैम को देते हुए । मैम के घर पर उनके सामने सोफे पर बैठे हुए । मैम के सामने क्लास रूम में कापी पर आड़ी तिरछी रेखाएं बनाते हुए । मैम का बारमदे में खडा रहना और अ का दूर से मैम को देखना । मैम के सामने सिर झुका कर खडा रहना । मन धीरे धीरे थकने लगा । तस्वीरें धुंधली होने लगी । मैम के कहे कानो में दूर से गूंजते हुए नजदीक आते और फिर दूर जाने लगे । शब्द निशब्द हो गये ।उसके चेहरे पर शांति उतरने लगने ।थोडी देर बाद उसे नींद आ गई । फिर वह गहरी नींद में सो गया है ।मैम का तकिया उसके सीने से लगा हुआ था ।
दूसरे दिन अ और जीत दोनो स्कूल पहुंचते है । क्लास में मैम आती है । मैम अपना क्लास ले कर चली जाती है एक बार भी अ के तरफ नही देखती अ और जीत दोनो इस बात को नोटिस करते है । जीत कहता है मैम का मुड ठीक नही हुआ है । तु संभल कर रहना कोई दूसरी गलती मत कर देना । यार घुटन होने लगी है । मुझे क्लास करने की इच्छा नही हो रही है । मै कल से मेडिकल लिव ले लूगा । घर पर रह कर स्टडी पुरा कर लूगां । अबे ऐसा मत कर यार मेरा क्या होगा , मुझे भी तेरे चक्कर मे मेडिकल लिव लेना होगा । तो सोच ना क्या किया जाये । मैम की खामोशी और इगनोर दोनो सहना मुश्किल है । यार आनंद जा कर माफी मांग ले या लैटर लिख कर ,,नही हो सकता ,,अब मैं माफी नही मांग सकता अपने ही बर्ड्स में बंध गया हूं । दोनो चुप चाप हो गये। तभी दास सर आये और मैथ की क्लास शुरू होगई । दास सर ने जान बुझ कर अ को एक मैथ सोल्व करने के लिए अपने पास बुलाया और बोला कि अ आज इस मैथ की समस्या को सोल्व कर दिखायेगे । दास सर का मकसद आज अ को मैथ नही बनाने पर टार्चर करने का था । अ ने बैल्क बोर्ड पर सवाल लिखा हुआ देखा और फिर सवाल को सोल्व करने में लग गया। कुछ मिनटों के बाद मैथ का सवाल सोल्व था । दास सर की ऑखे यह देख फैल गई ।जीत मारे खुशी के रो पडा उसे डर था कही अ सवाल सोल्व नही कर पाये तो उसे सारे क्लास के सामने इंसल्ट होना पड़ेगा । सारा क्लास ऑखे फैला कर अ की तरफ देख रहा था । सवाल जिस चैपटर से लिया गया था उसकी पढाई क्लास में नही हुई थी । फिर अ ने यह सवाल कैसे सोल्व कर लिया? चुपचाप खडा था किसी मासूम बच्चे की तरह । तभी दास सर बोले तुमने मेरा विचार बदल दिया । you have changed my veiw . मै तुम्हे एक लापरवाह स्टूडेंट समझता था ,पर तुम तो स्मार्ट स्टूडेंट हो।तुम्हारी क्लास टीचर सुचित्रा मैम उस दिन कह रही थी कि तुम बहुत शार्प स्टूडेंट हो । वह तुम्हारी गलती को गलती नही तुम्हारी बचपना मान रही थी पर हम लोग उनकी बात से सहमत नही हुए । पर आज मै मान गया की सुचित्रा मैम सही कह रही थी । यह सुन अ की ऑखों भीग गई जीत की भी ऑखे भीग गई थी ।तभी क्लास खत्म होने की घंटी बज गई । दास सर ने अ के कंधे थपथपाये और क्लास से चले गये । अ तेजी से जीत के पास आया जीत के गले लग गया। जीत उसे अपनी बाॅहो में ले लिया । क्लास के लडके लड़किय सभी अ को बधाई दे रहे थे । अ मुस्कुरा रहा था इस बात पर की मैम ने उसका पक्ष लिया था । मैम मुझे गलत नही समझती है। मैम ने पहले ही मुझे निर्दोष मान लिया है फिर वह क्यो खामोश है । उफ उनकी खामोशी हर पल सूई की तरह चुभ रही है । तभी दास सर प्रिसपल सर और सुचित्रा मैम के साथ क्लास में आये सभी शोर करते स्टूडेंट शांत हो गये। प्रिंसिपल सर बोर्ड के तरफ देखने लगे । कुछ देर बाद प्रिंसिपल सर बोर्ड से नज़र हटा कर दास सर और फिर सुचित्रा मैम के देखे और बोले मैम यु आर राईट पर आनंद इससे से पहले कभी इस तरह परफोरम नही किया था । बट आपने जो पक्ष आनंद का लिया था उससे मै सहमत हूं । आनंद यहां आओ । अ अपने सीट हे निकल कर प्रिंसिपल सर के पास के पास खडा हो गया। मैम अब भी अ के तरफ ना देख प्रिंसिपल सर के तरफ देख रही थी । अ चोरी से नज़र उठा कर मैम की तरफ देखा और मैम भी चोरी से नज़र फेर कर अ के तरफ देखी दोनो की नजरें मिल गई मैम ने तुरंत नज़र दास सर के तरफ कर ली पर अ मैम के तरफ देखता रह गया ।वह जो एक क्षण का आपस में नज़र मिलना । अ के मन में गुलाबी रंग घोल दिया । वह मैम के तरफ देखता ही रह गया तभी प्रिंसिपल सर बोले वेलडन आनंद हम तुम्हारी उस गलती को भूल गये ।सुचित्रा मैम वह लैटर जो आनंद ने अपने पापा को लिखा था आप आनंद को वापस कर दे ।यस सर । मैम पुरी गंभीरता से बोली । इसके बाद प्रिंसिपल सर आनंद के कंधे थपथपाये और कीप इट अप ,,प्रिंसिपल सर दास सर के साथ चले गये। मैम अ के तरफ देखी और बोली उस झूठे लैटर को तुम लोगे या जीत लेगा । यह सुन अ के पैरो तले जमीन खिसक गई । उसकी समझ में कुछ नही आया कि वो क्या बोले । वह फिर एक बार अपराधी की तरह सिर झुकाये खडा हो गया था । मैम बोली जाओ जीत को काॅमन रूम में भेजो जिसका लिखा लैटर उसी को दुगी । इतना बोल मैम चली गई । अ वापस अपनी सीट पर गया और जीत से बोला जा मैम तुझे कॉमन रूम में बुला रही है । मुझे क्यो ,?जीत तपाक से पुछा ,लैटर देने के लिए । यह सुन जीत का मुहं खुला का खुला रह गया।
आज इतना ही ।
सभी मित्रो का आभार ।
यह एपीसोड कैसा लगा आप अपनी प्रतिक्रिया जरूरू लिखे ।
धन्यवाद
रवि कांत मिश्र ❤❤❤❤❤❤❤❤❤🙏🙏🙏🙏🙏🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

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