सफर अभी बाकी है
शाम हो चुकी थी अ और जीत दोनो घर के छत पर खडे डूबते हुए सूरज को देख रहे थे । दोनो चुपचाप खडे थे पर दोनो के मन में अपनी चोरी पकडे जाने की फिल्म तेजी से आगे पीछे चल रही थी । मैम ने जब जीत के सामने एक सफेद पेपर रख दिया और कहा कि आज तुम अपने पापा को लैटर लिखो कि तुमने अपने दोस्त के पापा के नाम एक फाॅल्स लैटर लिखे थे । तुमने ऐसा क्यो किया ? जीत समझ गया था कि वह अपने ही फेके हुए जाल मे फंस चुका है । अब उसका कोई नया पैंतरे नही चलेगा । उसने सीधा सीधा रास्ता पकड लिया और बोला मैम मैं अपने दोस्त आनंद को बचाने के लिए यह लैटर लिखा था । इसमे उसकी कोई गलती नही है । वह तो सीधा सीधा एक लैटर अपने पापा को लिख चुका था और मै जानता था कि वह लैटर पढ कर कोई उसे माफ नही करता उल्टा उसकी सज़ा दोगुनी हो जाती। इसलिए मैने वो लैटर लिखा जो ऐसे समय में अक्सर लिखा जाता है । मैने गलती की है मुझे इसकी जो सज़ा देनी आप दे दीजिये। आप कहती है लैटर लिखने मै लैटर लिख दूंगा पर आपको पता नही है कि मेरे पापा बहुत दयालु नही है नियम के बहुत पक्के है । वह कम बोलते है और जब बोलते है तो उनका डंडा बोलता है मेरे पीठ पर ,,पर कोई बात नही मैं अपने दोस्त के लिए मार भी खा लूगा। इतना बोल जीत मैम के सामने सिर झुका कर खडा हो गया । झटके से नज़र उठा कर देखा कि मैम के चेहरे पर क्या चल रहा है । मैम खामोश नजरों से जीत के तरफ देख रही थी । जीत समझ गया कि उसकी बातो का कोई खास असर मैम के उपर नही हुआ है । थोडी देर बाद मैम बोली लैटर लिखो ,,जीत लैटर लिखने लगा ,,मैम चुपचाप कापियां जांचती रही । जीत लैटर लिखता हुए सोच रहा था कि अ मैम की तारीफ करते थकता नही था । मैम बहुत अच्छी ,बहुत सेंसिटव है , ,फ्रेंडली है ,पर यहां तो सब उल्टा पड रहा है ।कितना इमोशनल ट्रू स्टोरी सुनाई पर मैम के मन पर इमोशन का एक बूंद नही उभरा । यहैम वैसी नही है जैसे अ मैम को समझ बैठा है ।मेरी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया । यह सब अ के बेवकूफी के चक्कर में हुआ मुझे साथ ले लेता तो मै सब फीट कर देता । लैटर लिखना हो था गया जीत चेहरे पर दीन हीन दुखी भाव ला कर मैम के तरफ लैटर बडा दिया । मैम लैटर ले कर एक बार पढी और फिर बिना जीत के तरफ देखे बोली, यु मे गो नाऊ । जीत के चेहरे पर छाये दुख के भाव को धक्का सा लगा ,,एक मिनट मे गायब हो गया। उसकी जगह चेहरे पर सन्नाटा लिए कॉमन रूम से बाहर निकल गया । अब दोनो इस चिंता में यहां खडे है कि मैम से लैटर वापस कैसे ली जाये । इससे पहले की मैम पापा को स्कूल बुला कर लैटर दे दे और उसके बाद जीत की कुटाई हो जाये । उससे पहले मैम से लैटर वापस ले लिए जाये । दोनो सोच रहे थे पर कोई उपाय दोनो को नही सुलझ रहा था। सूरज डूब चुका था। दोनो बुझे हुए बल्फ की तरह डूबे हुए सूरज के सामने खडे थे । अचानक जीत के दिमाग का बल्फ मानो जल गया वह बोला देख काम हो सकता है ,,कल शनिवार है प्रो सहाब कल आने वाले है हम उनसे रिक्वस्ट करते है वह मैम को मना लेगे । प्रोफेसर सहाब रात को आयेंगे ,कल सुबह अगर मैम ने पापा जी को यानी अंकल जी को बुला कर लैटर दे दी तो ? हां यार यह तो मैं सोचा ही नही था । फिर दोनो खामोश हो गये । थोडी देर बाद अ बोला चल तु जा मै मैम से तेरा लैटर वापस ले कर आऊंगा। पर कैसे ? जीत पुछा । बस तु जा ना मैं ले आऊंगा। जीत की समझ में कुछ नही आ रहा था कि अ कैसे इतने विश्वास से कह सकता है जब कि अ अभी मैम का ठीक से जानता ही नही । मैम बिलकुल अलग है । देख बे तु समझ नहीं रहा है । जीत अ से बोला । तु जा अब मै कुछ समझना भी नही चाहता । मैम ऐसा कैसे कर सकती है ? उनको यह क्यो नही दिखाई दे रहा कि तुने जो कुछ भी किया मुझे बचाने के लिए किया ,इसमे तेरी नही मेरी गलती है कि मै तेरे बातो में आ गया तेरी बात को चुपचाप सुनता रहा आ कर उसी समय तेरे विरोध कर देता तो आज तु गिल्टी नही होता। गलती मेरी है और इस गलती के लिए सज़ा मुझे ही मिलनी चाहिये । तु निकल यहां से ,,मुझे कुछ सोचने दे । जीत समझ गया कि अ का पारा उबाल मार रहा है । इस वक्त इसे अकेला छोडने का मतलब है कुछ उल्टा पूल्टा हो जाना। पर अगर बात नही मानो तो यह गुस्सा हो जायेगा । इसलिए निकल लो पर दूर रह कर नज़र इस पर रखनी होगी ।जीत यह सोच कर चला गया । अ थोडी देर अंधेरे में खडा रहा फिर नीचे सिढियो से उतरने लगा । रात हो चुकी थी मैम के गेट के पास अ की साईकिल आ कर रूकती है । अ साईकिल पर बैठे बैठे मैम के घर के तरफ देखते है । मैम के घर के भीतर, की सारी बतियां जल रही थी । अ साईकिल से नीचे उतरकर साईकिल गेट कै बगल में खडा करता है । गेट खोलते है बरामदे के तरफ चल देता है । अचानक उसका ध्यान बगल के जमीन पर जाती है जहां की मिट्टी खुदी हुई है वह नीम का पौधा लगा हुआ है जिस पर बरामदे मे जल रही लाईट की रौशनी पड रही है। अ के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान उभर आती है वह अपने आप से बोलता है मैम ने अपना वादा निभा दिया । अब मुझे अपना वादा निभाना है । अ यह सोचते हुए बरामदे तक पहूंच गया है ।बरामदे में पहुंचकर एक बार गेट के तरफ देखा गेट के बगल में उसकी साईकिल खडी थी । अ वापस अपने सामने बंद दरवाजे के तरफ देखा । अ यहां कुछ गया था जब वह गेट के तरफ देख रहा था तो गेट के पास दूसरी तरफ झाड़ के पीछे जीत छुप कर अ को देख रहा था । अ ने दरवाजे पर हल्का सा नाॅक किया टक टक , भीतर से आवाज आई कौन ? बदले मै अ ने फिर टॉक किया टक टक , भीतर कदमों की आवाज नजदीक आते हुए दरवाजे के पास आ कर रूक गई खट की आवाज हुई दरवाजा खुला सामन मैम खडी थी पर अ मैम के सामने घुटनों के बल सिर झुकाये बैठा था । मैम यह देख एकदम।सकते में आ गई । फिर अपने आप को सहज करती हुइ बोली आनंद यह क्या है ? उठो अपनी जगह से उठो ,,आनंद वैसा ही बैठा रहा । कुछ नही बोला ।यह देख मैम आस पास देखते हुए बोली देखो यह ठीक नही है । उठो ,,और जाओ यहां से ,मै तुम से कोई बात नही करना चाहती । अ फिर चुपचाप बैसा ही बैठा रहा । सिर झुकाये नजरें नीचे किये हुए । मैम यह देख थोडा गुस्से में आ गई और बोली अगर तुम मेरी बात नही मानना चाहते हो तो कोई बात नही पर तुम ऐसा क्यो कर रहे हो ? अ फिर कुछ नही बोला चपचाप वैसे ही नजरें नीचे किये घुटनों के बल खडा रहा ।मैम बोली ठीक है तुम ऐसे ही चुप रहना चाहते हो तो चुप रहो , मै जा रही हूं मुझे किचन में काम है । इतना बोल मैम दरवाजा खुला छोड कर भीतर चली गई । अ वैसे ही खडा रहा । यह सब जीत झाडी के पीछे से खडा होकर देख रहा था । मन ही मन बोल रहा था काश यह आईडिया मुझे आ जाता तो मै अ की जगह खडा जाता । कितनी तकलिफ घुटनों में उसे हो रही होगी । यह मैम है कि पत्थर की मूरत।। थोडी सी भी दया इनके मन में ना आई ,,अ को छोड कर घर के भीतर चली गई । हे ईश्वर मैम के मन में दया जगा दे । अ की तकलिफ मुझ से देखी नही जा रही है । कुत्ता हे साला मेरे बदले खुद चला गया ,,चल उठ जा थार उठ जा मेरे यार । यह जिद्दी है नही उठेगा ।मुझे जाना चाहिये ,इतना बोल कर जीत झाड़ के पीछे से निकल गया और तेजी से गेट के तरफ भागा तभी देखा की मैम दरवाजे पर तेजी से आई और देखी की अ उसी तरह जमीन पर बैठा है । जीत यह देख वापस झाड़ के पीछे चला गया । तभी मैम बोली तुम जो चाहते हो मैं समझ गई य लो जीत का लैटर ,अब तो उठ जाओ । जीत का नाम सुन अ पहली बार सिर उठा कर देखा मैम के तरफ जो हाथ में लैटर ले कर उसके सामने खडी थी उसकी ऑखों में अ ने करूणा के भाव देखे । अ अपनी जगह से उठ गया और हाथ बडा कर लैटर ले लिया । मैम उसकी तरफ देख रही थी बोली तुमने मुझे हर्ट किया है ,मेरे विश्वास को तोड़ा है । तुम स्कूल ए बैंक किये कोई बात नही ,थियेटर पेलेस के पास पकडे गये कोई बात नही ,मेरे पास लायेगे कोई बात नही ,पर तुमने जीत से मिल कर फाॅल्स लैटर लिखा मेरे सामने वो होने की कोशिश की जो तुम कभी हो नही सकते । यह बात मुझे हर्ट कर गई । तुम कुछ भी शरारत कर सकते हो पर तुम कभी चलाकी नही कर सकते हो । तुमने उस दिन कैसे कर लिया । आई हेट,,आई हेट ,,इतना बोलते बोलते मैम का गला रुंध गया उनकी आवाज भीग गई । वह एकदम से चुप हो गई । अ मैम के तरफ नज़र उठा कर देखा मैम उपर छत के तरफ देख रही थी । अ कुछ नही बोला अपने जेब से वह लैटर निकाल कर मैम के तरफ बडा दिया जो उस दिन जीत के कारण दे नही पाया था । मैम बोली अब इसकी क्या जरूरूत है ,अपने पास रख लो और फिर कभी वो मत करना जो तुम दिल से नही चाहते हो । अ यह फिर कभी नही होगा मैम ,,,,पर मै तुझे माफ नही करूंगी तेरी यही सज़ा है । ओ के मैम मुझे माफ मत कीजियेगा शायद ऐसा करने से मेरे भीतर कोई बदलाव आ जाये । अच्छी बात से चल भीतर आ केक बनाई हूं खा कर जाना । मैम इतना बोल कर भीतर आ गई अ दो पल अपनी जगह खडा रहा गेट के तरफ देखा फिर दरवाजे से भीतर चला गया ।बाहर जीत की ऑखे यह देख भीग गई थी । उसने कहा थैंक्स गॉड सब ठीक हो गया । मै चलता हू यहां से साले मच्छरो ने बहुत खून चुप लिया है । अ भीतर गया और तभी टेबल पर रखी काला डिब्बा वाला फोन बजने लगा,मैम किचन से बाहर आई और फोन रिसीव की हैलो ,,,आज इतना ही । सभी मित्रो का आभार ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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