सफर अभी बाकी है
कभी कभी एक छोटा सा दीया उस अवचेतन के तलघर को रौशन कर देती है जहा कोई सूरज नही पहूंच सकता । मैम के अवचेतन के तलघर में एक छोटी सी दीया रौशन हो गई थी । जिसकी रौशनी में उसे वो दिखाई देने लगा था । जिसे देखना वह भूल गई थी । जीवन हो और जीवन की तंरगे कही खामोश हो किसी तलघर में बैठ जाये ,तो जिन्दगी बाहर चलती है पर भीतर जिन्दगी कही तन्हा हो कर भटकने लगती है । वो जो चाह है वो हमारे अवचेतन की गलियों में भटकता रहता है । मैम भी अपने चेतन और अवचेतन की गलियों में भटक रही थी । रात नींद में भटकते हुए विस्तर पर गुजर गई । सुबह हुई तो वही नपी तुली मेकअप वाली मैम समाने खडी हो गई । स्कूल जाने के लिए मैम ना चाहते हुए भी उसी लिबास को पहन लिया । जो उसे पहनना था । आज मैम ने मेकअप नही किया । बस माथे पर एक नीले रंग की बिंदी लगाई और स्कूल के लिए निकल गई । स्कूल की बस आई मैम को ले कर चली गई । खिडकी के पास बैठी मैम बाहर देख रही थी पर उनकी ऑखे अपने अतित में खोई हुई थी । क्या वह अपने को अब तक मिस अंडरस्टेड कर रही थी । शायद हां ,,शायद नही,, यह यकीनन हां ,,कुछ कह नही सकते , हम जिन्दगी जीते_ जीते कब जिन्दगी जीना भूल जाते है इसका ख्याल तक मन में नही आता । जिन्दगी हमारे सामने बहती रहती है और हम अपने फ्रेम में एक तस्वीर बन कर रह जाते है । अच्छा हुआ वह फ्रेम टूट गया । बस झटके से रूक गई । मैम अपने विचारो से बाहर आ गई । बस की खिडकी से बाहर देखी तो स्कूल ग्राउंड में स्टूडेंट एसेम्बली के लिए जमा हो रहे थे । मैम बस से उतर कर आफिस के तरफ निकल गई ।
अ के क्लास का आज स्कूल में आखिरी दिन था। पुरे क्लास को सज़ाने में लडकी और लडके व्यस्त थे । जीत खुश था कि कल से स्कूल नही आना पड़ेगा । स्कूल के दिनो का आज द एंड होने वाला है । वह अ से बोला तु तो बहुत खुश होगा बे कल से तुझे बैग का बोझ नही उठाना पडेगा । अ जीत के तरफ देखा उसकी ऑखों में उदासी थी , जिसे देख जीत चौक कर बोला अरे बेटा तु तो उदास हो गया ,,वो समझा कल से स्कूल में मैम से मुलाकात नही होगी , कमीने अब तु मैम को देख नही पायेगा । तुझे मैम को देखने उनके घर जाना पडेगा । तो बेटा चले जाईयो, पर आज के दिन अपने चेहरे पर ग्रहण मत लगा यार अबे जीत आज पहली बार जब स्कूल छोडने का समय आया तो लग रहा है कि यह समय इतनी जल्दी क्यो आ गया । कुछ समय बाद आता तो हम कुछ दिन और स्कूल आ जाते ।यार बडी मुश्किल में पड गये है कल से हम करेगे क्या ? दिन भर तो पढ़ नहो सकते ,,समय तो काटनी पड़गी, कैसे काटेगे ? यह सुन जीत सोच में पड गया हा यार आठ घंटे एक महिने तक खाली रहना सचमुच समस्या है । इस बात पर दोनो गंभीर हो कर सोचने लगे। कुछ देर बाद जीत बोला मेरा दिमाग काम नही कर रहा है ।तु ही बता कैसे समय बिताया जाये । अ ने कहा मेरी समझ में भी नही आ रहा है। अब दिन रात किताब ले कर तो बैठ नही सकता । किताब कापी ,,छोड कर हमे कुछ करना होगा। जिससे पढने में इटेरस्ट बना रहे । तभी स्कूल की घंटी बज गई । दोनो उठ कर क्लास में चले गये। जा कर देखा तो पुरा क्लास बैलुन रंगविरंगे रिबन और पोस्टर से सज़ा हुआ था । एक बडा सा सफेद पेपर बैल्क बोर्ड के बगल में चिपका दिया गया था ।जिसमे उपर लिखा था योर थांटस एड फिलिगि । यानी जो कोई कुछ लिखना चाहता है वह लिख सकता है । अ चुपचाप बैठ गया जीतभी उसके बगल में बैठ गया । अब भी क्लास में शोर गुल हो रहा था । तभी मैम क्लास में आई ,,उनका बिना मेकअप वाला चेहरा देख अ को झटका सा लगा। यह क्या मैम आज वह भी बिना मेकअप के । इस बात को और भी लडके लडकियो ने नोटिस किया । सब आपस में थोडी देर खुसुर फुसुर करते रहे । फिर चुप होगये । मैम चुप चाप अपनी कुर्सी पर बैठ गई । अ मैम के बदले रूप को एकटक देख रहा था। उसे आज अपनी वह मैम दिखाई नही दे रही थी । मैम के आव भाव सब कुछ बदले बदले से दिखाई दे रहे थे । मैम ने अपना काम शुरू कर दिया । अटेडेसं ली । फिर वह अपने चेयर से उठ कर टेबल के आगे आ गई । शून्य में देखते हुए बोली । आज आप सभी का दिन है आज आप सभी अपनी बात करेगे । आप मे से जो कोई कुछ कहना चाहता है । वह यहां आ कर अपनी बात रख सकता है । यह सुन कर कुछ देर तो खामोशी छाई रही फिर क्लास की एक लड़की उषा अपनी जगह से उठी और बोलना शुरू कर दिया । सभी लोग उसकी बात सुन रहे थे पर अ आज फिर अपनी कापी पर पेन्सिल से आड़ी तिरछी रेखा खीच रहा था । उसे मैम का यह रूप बिलकुल अच्छा नही लगा था ।वह परेशान होने लगा था । वह सोचने लगा कि कल तक सब ठीक था फिर अचानक यह बदलाव कैसे हो गया ? जीत अ से बोला अबे तु आज भी टेंशन में आ गया ,,अबे नार्मल कर अपने को ,और बंद कर यह कापी पर बिना सिर पैर के लकिरे खीचना। अ पर जीत की बात कि कोई असर नही हुआ वह अपना काम जारी रखा ।यह देख जीत गुस्से से बोला ,,तु कभी नार्मल नही हो सकता ,साले कर अपने मन की । इतना बोल वह उस लड़के के तरफ देखने लगा जो उस लड़की कै बाद बोलने के लिए आया था । इस तरह यह सिलसिला चलता रहा। बहुत से लडके लडकयो ने अपनी अपनी बाते रखी । जीत से रहा नही गया उसे मालुम था कि अ कुछ नही बोलेगा । वह अपनी जगह से उठा और जा कर टेबल के पास खडा हो गया । अ जीत को अपनी कापी से नज़र हटा कर देखा और फिर अपने कापी पर अपनी नज़रे फिक्स कर ली । जीत बोलना शुरू कर दिया ,,दोस्तो आज के बाद हम सभी फिर मिलेंगे पर इस तरह नही मिल पायेंगे। जैसे आज मिल रहे है । कुछ महीने के बाद हम सभी के पास अपने अपने रास्ते होगे और हम सभी उस पर तेजी से आगे निकलते जायेगे । फिर जिन्दगी के किसी मोड पर हमारी मुलाकात होगी या नही भी होगी । कुछ कहा नही जा सकता । तो आज मैं कुछ बाते कहना चाहता हूं और कुछ आप लोग के सामने कंफेस करना चाहता हूं मेरा अपराध बडा है कि छोटा है अपराध है या नही है इसका फैसला मैं मैम के उपर छोड़ता हूं । मै जब दसवीं करने के बाद इस स्कूल में आया तो जिस सीट पर मैं बैठा था उसके बगल में एक लड़का आ कर चुपचाप बैठ गया । मैने उसे करीब से देखा तो पहली नज़र में लगा एक खामोश चेहरा जो कुछ कहना चाहता नही ।मुझे उसकी खामोशी चुभने लगी । मै बहुत देर तक चुपचाप नही रह सकता । मैने बातचीत करना शुरू किया तो छोटे छोटे जवाब मिलने लगे । छोटे जवाब धीरे धीरे बडे होने लगे। और फिर हम दोनो एक दूसरे से बात चीत करने लगे। इस तरह रोज बातचीत करते हुए ना जाने कब हम एक दूसरे के करीब आ गये कि हम दोनो अब बिना बातचीत किये यह समझने लगे कि अगले के मन में क्या चल रहा है। मै और वो एक दूसरे के विपरीत है मै बहुत बोलता हूं ,,शरारत करना ,,झूठ बोलना ,,,किसी को कंफियूज करना । चिटिंग करना ,मुझे अच्छा लगता है । पर वह ठीक इससे अपोजिट है । फिर भी वह मुझे अपना दोस्त मानता है ।बहुत बार झगड़ाता है कि मैं सुधर जाऊं। पर कभी दोस्ती तोडने की बात नही की । मेरी सारी कमजोरियों के बाद भी वह मुझे अपना दोस्त मानता है । उसने कभी मुझे या मेरी दोस्ती को कम नही हंका। वह मुझ से अधिक तेज बुद्धि का मालिक है पर कभी मुझे मंद बुद्धि नही समझा। उसने कभी यह भी नही कहा तु मुझे सलाह मत दे तुझसे अधिक बुद्धि मेरे पास है । वह हमेशा मेरी बात को सुनता रहा । मैने घंटो बोला और वह घंटो सुनता रहा । वह अलग है इस दुनियां का नही लगता वह किसी और दुनियां से इस मतलबी फरेबी दुनियां में आ गया है । मै बहुत लक्की हूं कि मुझे तुमने अपना दोस्त समझा । थैंक्स आनंद ,,। इतना बोलते ही क्लास रूम तालियो सें गूंज गया ।आनंद अपनी जगह खडा हो गया और जीत के तरफ देखा जिसकी ऑखों में पानी तैरने लगे थे । जीत मैम के तरफ देखा और बोला मैम मुझे माफ कर दिजियेगा , मैने जो कुछ भी किया उसके पीछे अपने दोस्त को बचाने की बात थी । मै आपसे इसलिए माफी मांग रहा हूं कि उस काम में मैं अपने दोस्त को शामिल कर लिया था । जो कि बिलकुल वैसा नही है । वह खरा सोना है । जो सज़ा देनी है मुझे दे दे ,,वह गलती जान बुझकर मैने की थी । जिसकी सज़ा उसने अपने नाम कर ली । इतना बोल आनंद के तरफ देखा तो आनंद की ऑखे भीग चुकी थी । मैम आनंद के तरफ देखी आनंद जीत के तरफ देख रहा था । मैम का मन बोल पडा यही है इसका जादु । यह दिल से सुनता है दिल से बोलता है ,दिल से जुड़ता है , दिल से जीता है । मै दिमाग से जिन्दगी को कलकुलेट करने में व्यस्त हो गई थी। जीत जब अ के पास पहूंचा तो अ ने जीत को गले से लगा लिया । एक बार पुरा क्लास तालियों से गूंज गया । मैम यह देख मुस्कुरा दी अचानक बैलुन फूटने लगे । फटाक फटाक की आवाज से रूम गूंजने लगा । सब एक दूसरे को रंग लगाने लगे। मैम चुपचाप क्लास से बाहर निकल गई । कुछ देर बाद अ कॉमन रूम में मैम के पास खडा था । उसके चेहरे पर हरे पीले लाल रंग लगे हुए थे । मैम उसे देख कर बोली रंग तुम्हारे चेहरे पर अच्छे लग रहे है । अ हल्का सा मुस्कुरा दिया । और बोला मैम थैंक्स,,एक सवाल पूछना चाहता हूं अगर आप परमिट करेगी तो । मै जानती हूं उस सवाल को आनंद मेरे पास आज तुम्हारे सवाल का जवाब नही है । मैं आज खुद कई सवालो से उलझ गई हूं । यह सुन अ कुछ नही बोला अपनी मुट्ठी खोल दी जिसमे हरा रंग था । मैम ने अ की हथेली में रखे हरे रंग को देखा और फिर अ की ऑखों में जहां एक हसरत पलके उठाये मैम के तरफ देख रही थी। मैम का हाथ आगे बडा अ की हथेली से एक चुटकी रंग ले कर अ के माथे को छु लिया । अ अपनी जगह खडा रहा । तभी मैम बोली विश यु आल दा बेस्ट ,,थैंक्स मैम ,,अ धीरे से बोला ,,आज उसके जिस्म पर रंग तो लगा था पर मन कोरा रह गया था । वह अपने कोरे मन के साथ कॉमन रूम से बाहर निकल गया था । बाहर सभी एक दूसरो को पकड कर रंग लगाने और शोर मचाने में व्यस्त थे ,जीत एक कोने में खडा सब देख रहा था । वह अ को देख उसके पास तेजी से आया और बोला चल आज साथ साथ आखिरी बार इस स्कूल के गेट से बाहर निकल जाये । अ कुछ बोला नही हल्का सा मुस्कुरा दिया दोनो दोस्त एक दूसरे के कन्धे पर अपनी अपनी बाहें डाले स्कूल के गेट से बाहर निकल रहे थे । कॉमन रूम की खिडकी से मैम दोनो को स्कूल से बाहर जाते हुए देखती रही,,
आज इतना ही
सभी मित्रो का आभार 🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤

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