दोस्तो नफरत करने वालो की दुनियां में,इश्क की दास्तां पर लोगो का यकिन करना थोडा मुश्किल हो जाता है । पर इश्क अपने आपमे यकिन है । उस पर कोई यकिन करे या ना करे ,वो अपने यकीन पर जिन्दा रहता है । अ भी अपने यकिन पर जिन्दा था । लोग उसके बारे में क्या सोचेगे या उसकी क्या ईमेज अपने मन में बनायेंगे? इस बात की परवाह उस पगले ने कभी नही किया । दूसरी सुबह जब वह जोगिंग के लिए ग्राउंड में गया तो मैडम और प्रो सहाब वहां पहले से ही मौजूद थे । दोनो तेजी से वॉक कर रहे थे । यह अ के लिए एकदम नई बात थी । उसने जब दोनो को अपने पास आते देखा, तो वह समझ गया कि रात वाली घटना पर यह लोग पुछेगे । अ का दिल जोर से धड़कने लगा। वो दोनो जैसे जैसे अ के करीब आ रहे थे अ का दिल जोर से धडकता जा रहा था । जब वो दोनो एकदम करीब आ गये तो एक मन हुआ की वो तेजी से ग्राउंड में दौड लगा दे पर अब बहुत देर हो चुकी थी । बहुत मुश्किल से उसके मुख से निकला गुडमॉर्निग सर गुडमॉर्निग मैम ,इस पर दोनो खुश होते हुए बोले गुडमॉर्निग आनंद । कल तुम पार्टी से बिना बोले ही चल गये । तुमने डिनर भी नही लिया ,दस इज नॉट फेयर ,तुमने हमारे पार्टी को सक्सेस करने के लिए कितना डेकोरेशन किया था । इस तरह बिना डिनर के तुम्हारा चले जाना हम दोनो को अच्छा नही लगा । अ की समझ से बिलकुल उल्टा उसके साथ हो रहा था । बडी मुश्किल से उसके बोल फुटे सारी मैम ,,वो रात बहुत हो रही थी इसलिए दादी घर पर इंतजार कर रही थी । ओके ,,,प्रो सहाब उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए बोले तुम्हे मैम पनिश करेगी। तुमने गलती की है और तुम्हे इसकी सज़ा मिलनी चाहिये या नही मिलनी चाहिये ? यस सर । क्या यस सर मैडम बोली तुम मेरे स्टूडेंट हो तुमने गलती की है और तुम्हारी सज़ा है कि आज रात का डिनर तुम
हम दोनो के साथ करोगे । बोलो तुम्हे यह सज़ा मंजूर है । अ असमंजस में आ गया था एक मन कर रहा था कि हां बोल दे ,दूसरा मन कह रहा था कि ना बोल दे, कोई बहाना बना कर निकल जाये । पर कुछ कह नही पाया इतने में मैम बोली की आज रात आठ बजे हम दोनो तुम्हारा इंतजार करेगे । इतना बोल दोनो तेज वॉक करते हुए वहॉ से निकल गये । अ उनको जाते हुए देखता रहा ।कुछ पल वो अपनी जगह पर खडा रहा फिर अचानक उसे क्या हुआ कि वह तेजी से अपने घर के तरफ दौडना शुरू कर दिया । उस दिन अ स्कूल नही गया । दिन भर अपने को कमरा में बंद रखा । शाम हुई तो ग्राउंड में आया जीत से मिला और सारी बाते जीत को बता दी । यह सुन जीत बोला चल यह तो एक दिन होना ही था। अब जा ,जा कर सामना कर । मैं पहली बार कंफियूज हूं। जाना भी चाहता हूं और नही जाना भी चाहता हूं । मेरी बात मान चला जा । सामना कर ,तुमने तकिये की चोरी की है यह बात मान लेना । माफी मांग लेना बडे है तुम्हे माफ कर देंगे। जीत तु भी चल ना मेरे साथ । मै तेरे साथ हूं यार बस जहां तुम्हे प्रोब्लम हो मुझे याद कर लेना । कसम से तुरंत तुम्हारे पास आ जाऊंगा । अ समझ गया कि अब कोई चारा नही है । सात बजे चुके थे वह घर गया तैयार हो गया। अपना सूट बाहर निकाला टाई बांधी ,सलीके से बाल बनाये । आईने के सामने कई बार गया अपने को उपर से नीचे ,नीचे से उपर ,दायें से बायें, बाये से दायें देखता रहा । दादी यह सब कुछ देख रही थी और मंद _मंद मुस्कुरा रही थी । सात बज कर तीस मिनट हो गये तब दादी से ना रहा गया वह बोली टाईम का ध्यान दे किसी को इंतजार करवाना अच्छी बात नही होती । यह सुन अ मुस्कुरा दिया और बोला आप डिनर कर लीजियेगा। मै डिनर के लिए जा रहा हूं । विश यु आल दा बेस्ट माई सन दादी बोली । अ ने अपनी स्टाइलिश वाली लाल रंग की साईकिल निकाली और निकल पडा। वह अपने को उपर से सहज करने की कोशिश अब भी कर रहा था । साईकिल के पैडल पर पैर मारते उसके पैर थोडा थोडा कांप जा रहे थे । हथेली पीसने से भीगने लगी । गला सूखने लगा था । चेहरे पर पसीने की बुन्दे उभरने लगी । एक एक पैडल पर पैर मारना भारी लगने लगा था फिर भी वह पैडल पर पैर मार रहा था । वो जो उस लम्हे को जीना चाहता था । मैम को करीब से महसुस करना चाहते था वह कुछ कहना चाहता था और बहुत कुछ मैम से छुपा कर वापस आना चाहता था । वह जो जीने की इच्छा है वह विपरीत परिस्थिति में भी अपना काम करती है । डर से कोसों दूर और बिना किसी झिझक के वो अपना काम कर रही थी । अ अपनी भावना के बारिश में पुरी तरह भीगते हुए मैडम के घर के गेट के पास जैसे ही पहूंचा । एकबार फिर उसका मन हुआ कि भाग जाये । वापस पलट कर तेजी से दौडता हुआ अपने कमरे में पहूंच जाये । तभी गेट के भीतर बरामदे में मैडम और,प्रो सहाब आ गये । प्रो सहाब बोले। वेलकाम आनंद। यह सुन अ के पैर जमीन में वही धस गये। जैसे अब भागने की शक्ति को जमीन ने सोख लिया हो । भारी मन से उसने अपनी साईकिल पार्क की और गेट खोल कर भीतर आ गया तभी प्रो सहाब आये हाथ आगे बढ़ाते हुए बोले हैलो आनंद ,आनंद ने अपना पसीने से भीगा हाथ झट अपनी पेंट के पीछवाडे में पोछते हुए प्रो सहाब से हाथ बडे अदब से मिलाया और गला थूक से तर करते हुए बोला गुडइवनिग सर । प्रो सहाब उसके कंधे पर हाथ रखते हुए घर के तरफ ले जाने लगे । बरामदे से मैडम अ को बडे ध्यान से देख रही थी। अ कि नजंर मैम की नज़र से मिल गई । वह भीतर तक सिहर गया । आज मैम की नज़र वो नजर नही थी जिसका सामना वह आज तक करता आया था। आज उनकी नज़र में कुछ था ऐसा जैसे वह जाना ना चाहती हो ,कि सच क्या है ? वह कही बरसना भी चाहती है और उसकी जमीन उसे मिल गई हो । यह बरसात बरसात ही हो बिना गर्जन वाली बरसात। रिमझिम फुहार वाली बरसात । हे भगवान मेरी रक्षा करना अगर बारिश बादल गर्जन के बिना हो जाये । मै मैम की बारिश तो सह लूगां पर यह प्रो सहाब की गर्जन को नही सह पाऊगा ।वह भी मैम के सामने । गुडइविनग मैम । गुडइविनग आनंद सही वक्त पर आ गये । आओ भीतर आओ । मैडम अ और प्रो सहाब के साथ कमरे के भीतर आ गई। कमरा बडा था और कल के जैसा ही सज़ा हुआ था । एक डाईनिग टेबल पर डिनर ढक कर रखे हुए थे । अ उपर से चुप पर भीतर से एक तुफान से गुजर रहा था । प्रो सहाब सोफे पर बैठते हुए बोले बैठो आनंद । आनंद बैठ गया । मैम भी उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गई थी । अ को बारिश के आसार दिखाई देने लगे । वह आने वाली बारिश में भीगने के लिए खुद को तैयार करने लगा । उसके कान के पीछे से पीसने की एक बूंद धीरे धीरे एक लकीर खीचते हुए गरदन के तरफ आने लगी । अ ने अपनी दोनो हाथ की उंगलियों को एक दूसरे में फंसा कर उसे अलग करता और फिर एक दूसरे में फंसाता और फिर अलग करता । तभी मेड ट्रे में सुप के तीन चीनी मिट्टी के प्यालो में ले आई । चीनी प्याले का रंग दूध की तरह सफेद था जिस पर लाफिंग बुद्धा के छोटे छोटे चित्र बने हुए थे । मेड सूप टेबल पर रख वापस चली गई । तभी प्रो सहाब बोले आनंद तुम्हारे पापा क्या काम करते है । सर मेरे पापा फौज में है उनका नाम कैप्टन अभय सिंहः है । और तुम्हारी माता जी ,,मैडम ने प्रश्न किया ? जिस सुन अ का चेहरा एक पल के लिए उतर गया । दर्द की एक छाया आई और उसके चेहरे को छु कर चली गई । अ धीरे से बोला मैम मेरी मां इस दुनियां मे नही है । मै अपनी दादी के साथ रहता हूं । हो सॉरी आनंद एक साथ प्रो सहाब और मैम दोनो बोल पडे।इसके बाद एक पल के लिए एक दूसरे के तरफ देखा। दोनो के बीच एक मौन संवाद हुआ । जैसे कह रहे हो कि हम दोनो सही राह पर है ।तभी झट प्रो सहाब बोले आनंद सुप लो एक प्याला ट्रे से उठा कर अ के तरफ बढ़ाये, तो अ ने बडे अदब से प्याला प्रो सहाब के हाथ से लिया और फिर झुका कर बोला थैंक्स । मैम की नजरें एकटक अ को देख रही थी । करूणा का भाव उनकी ऑखों में तैरने लगा था । तीनो धीरे धीरे सुप पीने लगे थे । अ अब भी मन ही मन सोच रहा था कि अब वह प्रश्न मेरे कान के परदे से टकरायेंगा। कि तुम मैम का तकिया क्यो चुरा कर ले गये। मैं साफ साफ ना कह दूंगा। इनके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नही है । इनको मेरी बात पर यकीन करना होगा। फिर अगर पुलिस तक बात गई तो पुलिस भी एक तकिये के लिए एफ आई आर दर्ज नही करेगी । मैं साफ साफ बच कर निकल जाऊंगा। तुम्हारे पापा छुट्टी में आते ही होगे ? प्रो सहाब ने पुछा था । हां दो चार दिन के लिए आते है और फिर छोटी मां के पास चले जाते है । क्या तुम अपनी छोटी मां से मिलने नही जाते ? एक बार गया था फिर पापा कभी लेकर नही गये । यह उत्तर सुन मैम प्रो सहाब के तरफ देखी और प्रो सहाब मैम के तरफ देखे । दोनो की ऑखों ने फिर एक बार मौन संवाद किया। तभी प्रो सहाब ने विषय बदलने के लिए एक प्रस्ताव रख दिया कि हम इस माउंटेन सीटी के पहाड झरना नदी देखना चाहते है क्या कोई गाईड हमे मिलेगा ? इस पर मैम बोली की आनंद से बेहतर कोई और क्या हो सकता है । अ कि समझ में नही आ रहा था कि जो बात यह लोग करना चाहते है वह ना करके यह लोग दूसरी बाते क्यो कर रहे है? अ को चुप देख कर प्रो सहाब ने कहा लगता है तुम्हे हमारा गाईड बनना पसंद नहीं। यह सुन अ तुरंत बोला कि नही नही मैं आपका गाईड बन सकता हूं । इस बात पर दोनो खुश होकर बोले थैंक्स आनंद ।चलो डिनर करते है । तीनो उठ कर डिनर टेबल पर चले गये । मैम ने खाना सर्व करना शूरू किया । अ के प्लेट में रोटी रखते हुए उसके हाथ को करीब से अ ने देखा । तो देखता ही रह गया । मेहंदी लगे हाथ कितने खूबसूरत है । उसका मन उनकी हाथो की खूबसूरती में खो गया । दोनो अ को चुप चाप बैठा देख एक दूसरे के तरफ देखे। उनकी ऑखों ने फिर एक बार मौन संवाद किया। तभी मैम बोली आनंद क्या बात है? आनंद चौक गया और तुरंत बोला कुछ नही इसके बाद उसने खाने शुरू कर दिया। डिनर समाप्त होने के बाद । जब अ जाने को तैयार हुआ तो मैम ने एक पेन जिसका रंग नीला था । उसे देते हुए बोली यह मेरी तरफ से । अ एक पल के लिए आवाक रह गया क्यो कि यह वही पेन का एक और पीस था जो उसने चोरी की थी । पेन लेते समय अ का हाथ एक बार कांप गया ।वह पेन लेकर मैम को थैक्स बोला।प्रो सहाब यह देख मंद मंद मुस्कुरा रहे थे । इसके साथ वह अपना कैमरा निकाल कर बोले एक ग्रुप फोटो हो जाये । यस सर अ ने अपनी सहमति जताई । तभी मेड आ गई और उसने एक फोटो उन तीनो की खीची जिसमे अ बीच में खडा है और दोनो तरफ मैम और प्रो सहाब खडे है । इसके बाद अ को छोडने दोनो गेट तक आये । अ के भीतर अब बहुत सारे प्रश्न चलने लगे थे । जिस बात की उम्मीद नही थी वह उसके साथ हुआ था । यह क्या था ? क्या मैम को सब कुछ पता चल गया है। या मैम को अभी मेरे उपर शक है । यह लोग मुझ से चाहते क्या है ? अबे छोड इस बात को आज मैम के साथ समय बिता कर कैसा लगा इस पर फोकस कर । एक नशा भीतर नही उतर गया ?हां पर इस नशा में डर भी शामिल है । यह लोग सब कुछ योजना बना कर रहे है । पर क्यो कर रहे है यह मिस्ट्री है खास कर प्रो साहब की मंद मंद मुस्कान,
आज इतना ही
रवि कांत मिश्र ।
आप सभी का आभार।
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