सफर अभी बाकी है

जिन्दगी के कैनवास पर एक नई तस्वीर बनी थी जिसमे दो दिलो  ने अपनी जज्बात का इजंहार किया था । रात आधी बीत चुकी थी सुचित्रा अपने घर मेें सोफे पर बैठी थी । आज उसकी ऑखो ने नींद को इंकार कर दिया था । बार बार वह तस्वीर उसके जेहन मे उभरती और सुचित्रा से सवाल करती कि मुझे क्या नाम दोगी ? सुचित्रा इस सवाल पर खामोश हो जाती । उसके पास कोई एक सटीक उत्तर नही था । क्या यह तस्वीर बेनाम नही रह सकती ,,बेनाम ही तो है । हम जिस रिश्तो को नाम देते है कुछ दिनो बाद वो नाम सिर्फ नाम ही तो रह जाता है । रिश्ते पीछे किसी गली ,किसी मोड पर ,ठहर जाते है और हम नाम के साथ आगे बडते रहते है । नाम रिश्ता नही है  और ना हो सकता है , नाम से रिश्ता नही बनता ,रिश्ता तो बस एहसास है । एहसासो का सफर है । जब तक है तब तक है किसी दिन कहीं मन की गलियों में छुप भी सकता है और फिर किसी मोड पर अपनी बाहें फैला कर मिल भी सकता है । मैं इस तस्वीर को कोई नाम नही देना चाहती ,कोई फ्रेम के भीतर इसे कैद नही करना चाहती । सुचित्रा अपनी जगह से उठी और चलते हुए घर के बरामदे में 
आ गई । उसी जगह जहां वह शाम को खडी थी।अ  उसके पास खडा था। सुचित्रा उस जगह को देखती रही और फिर नजरें उठा कर सडक के तरफ देखी। सुनसान सडक पर दूर तक स्ट्रीट लाईट एक कतार मे किसी संत कि तरह सिर झुकाये खडे थे । सुचित्रा बहुत देर तक खडी सडक के तरफ कभी नीम के पौधे को ,कभी आसमान मे टिमटिमाते तारों को देखती रही । तभी फोन की घंटी बजने लगी । सुचित्रा घंटी सुन कर चौक गई इतनी रात किसका फोन हो सकता है । यह सोचते हुए फोन रिसीव किया तो दूसरी तरफ से आनंद का फोन था । उसने कहा मैम साॅरी मै इतनी रात गये फोन कर आपको डिस्ट्रब कर रहा हूं । मैम बोली कोई बात नही तुम बोलो क्या बोलना चाहता हो । मैम कल सुबह मै और दादी जी पापा के साथ असम जा रहे है । पापा की पोस्टिग फील्ड में होगई है । छोटी मां अकेली हो गई है । हमे अब उनके साथ रहना है । तुम्हारे इग्जाम का क्या होगा ? वह मै आ कर दे दूंगा।  मैम मैं आपको गुडवॉय कहने के लिए फोन किया हूं ।  और एक बात कहना चाहता हूं कि आपको अपने साथ इस सफर में लेकर जा रहा हूं । ओके आनंद अपना ख्याल रखना और स्टडी पर फोकस करना । जब यह बात मैम बोल रही थी तो भीतर मन में  एक दर्द की लकिरे खींचती चली गई । उसका मन नही चाहता था कि आनंद उससे दूर जाये । वह तो कल दोपहर स्टडी के लिए आने वाला था । अचानक सब कुछ बदल गया । माईंड इसके लिए तैयार नही था । मैम मैम हैलो मैम,,,,हा आनंद बोलो ,,मैम आप अचानक चुप हो गई।  सुचित्रा हंसते हुए बोली कल से दो नई बाते होगी एक मेरे क्लास खाली होगे और दूसरा तुम स्टडी के लिए मेरे पास नही आओगे । ओ के तुमने अच्छा किया कि फोन कर मुझे बता दिया। अपना ख्याल रखना ,,ओके मैम , मै असम  पहूंच कर फोन करूगा ।  हां जरूरू करना हैपी जर्नी ।थैकियु मैम ,,फोन कट गया मैम फोन को धीरे से वापस रख दी । उसकी ऑखों में एक खालीपन उभर आया था । यह खाली पन उसे अभी से चुभने लगा था । वह वापस खिडकी के पास आ कर खडी होगई । तभी उसके मन के एक कोने से आवाज आई। सुचित्रा सच बोलना आनंद का यु चले जाना तुम्हे अच्छा नही लगा।  हां अच्छा नही लगा,,इतने दिनो में मुझे उसकी आदत सी हो गई थी । आज इस बात को महसुस कर रही हूं । मानस और मैं मिलते और अलग होते रहे शुरू शरू में  मानस से अलग होना बहुत खराब लगा था । इसके बाद सब सेट हो गया । आज फिर वही अनुभव मन को चुभ रहा है । क्यो ?  मानस के लिए यह चुभने क्यो नही होती है , जो चुभन आज आनंद के लिए हो रही है । क्या रिश्ते सिर्फ रिश्ते ही रह गये, फ्रेम की हुई तस्वीर की तरह ।क्या  एक नाम हम दोनो अपने अपने पर्स में लेकर जिन्दगी काट रहे है । उफ यह क्या सोचने लगी हूं मैं ,,,सच तेज धार तलवार है झूठ को कटना ही पडता है । ठीक सोच रही हो । नही हम दोनो को फिर से सोचने की जरूरूत है । मानस को और मुझे भी । यही ठीक रहेगा । इतना बोल सुचित्रा विस्तर पर लेट गई । रात अभी थोडी बाकी थी । उनकी ऑखे थक गई थी । वह अपनी ऑखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगी ।
दूसरी सुबह जीत रेलवे स्टेशन अ के पहूचने से पहले पहूंच गया था ।जैसे ही अ अपने पापा और दादी के साथ रेलवे प्लेटफ्राम पर पहुंचा जीत भागता हुआ अ के पास पहूंचा पापा और दादी के पैर छुए और मेरे हाथ में चॉकलेट केक का डिब्बा देते हए बोला रात तुमसे फोन पर बात होने के बाद बेकरी वाले डेविड अंकल को
 फोन कर बोल दिया की सुबह सुबह मुझे अपने दोस्त के लिए चॉकलेट वाला केक चाहिये । तु याद इतनी जल्द में जा रहा है ,,,मुझे तो समझ में नही आ रहा है कि मै क्या करू ,,एक तरफ दिल दुख रहा है दूसरी तरफ यह भी अच्छा लग रहा है कि तु अपने पापा और मम्मी दादी के साथ रहेगा। नही जीत मै दादी छोटी मां एक साथ रहेगे पापा कि पोस्टिंग बोर्डर  पर हो गई है ।वो तभी तू इतनी जल्द जा रहा है । हा यार जा तो रहा हूं पर ऐसा लग रहा है कि मै जा कर भी नही जा पाऊगा ,,दिल दिमाग तो यहां रह जायेगा ।खास कर तुझे बहुत मिस करूगा । क्या मैम को तुमने बता दिया । हा तुम्हे फोन करने के बाद मैम को भी फोन कर दिया था । वेल्डन यार ,,पर मैं तो यार तेरे बिना अकेला रह जाऊंगा । पर कोई बात नही मै तुझे फोन करता रहूँगा । तु मुझे वहां का फोन नंबर दे ,,अ ने तुरंत  दो कार्ड अपने कोट के जेब से निकाले जो उसने अपने हाथ से बनाये थे ,एक जीत को देते हुए बोला यह ले रात अपने हाथ से बनाये है मुझे मालुम था कि तु जरूरू आयेगा इसमे फोन नंबर लिखा हुआ है यह रख ले और दूसरा कार्ड लिफाफे मे बंद था उसे देते हुए बोला यह जा कर मैम को दे देना।  कमीने चाहे तो खोल कर पढ लेना पर जा कर दे देना। हा हा यार दे दूंगा मां कसम खोल कर जरूरू पढुगा  । यह सुन दोनो हंसने लगे । तभी ट्रेन प्लेटफ्राम पर आ गई । पापा बोले ओके जीत टेक केयर योर  सेल्फ माई सन । आनंद एग्जाम से पहले यहां आ जायेगा । ओ के अंकल जी हैपी जर्नी ,चल यार मिलते है जीत अ के गले लग गया । अ और जीत कि ऑखे डबडबा गई । दोनो एक दूसरे को मुसकराते हुए डबडबाई  ऑखों से देखा ,एक दूसरे से हाथ मिलाकर अलग हो गये ।जीत ने   दादी जी के पैर छुए तो दादी जी बोली जरा घर का ध्यान रखना । तीनो ट्रेन पर चढ़  गये,,दरवाजे पर आखिरी बार अ हाथ हिला कर जीत को विदा कहा , फिर एसी बॉगी के भीतर चला गया। ट्रेन पटरी पर रेंगने लगी । जीत खडा उस बोगी को देखता रह गया । जो उसके दोस्त को उससे दूर ले जा रही थी । ट्रेन जीत की ऑखों के सामने से दूर होता चला गया । जीत ने गहरी सांसे ली और गहरी सांस छोड़ते हुए खुद से बोला चल जीत वापस जहां तेरे दोस्त की यादे तेरा इंतजार कर रही है । जीत तेजी से स्टेशन से बाहर के  तरफ जाने लगा 
आज इतना ही 
आप सभी कि बहुत आभार 
विशेष तौर पर अपने मित्र मनोहर जोशी जी आभार प्रकट करता हूं कि आप लगातार कहानी पढ कर उसकी समिक्षा कर रहे है । और आपने इस कहानी का पोस्टर अपने कर कमलों से स्केच किया है ।जो आज इस एपीसोड के साथ प्रकाशित हो रहा है आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मनु भाई 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤

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