2025 अवसाद युग विस्फोट


भारत वो खाली घडा है जिसमे सभी तरफ से अवसाद भरे जा रहे है । 2025 के आते _ आते यह अवसाद का घड़ा भर जायेगा और उससे जो विस्फोट होगा वह भारत के टूकड़े कर सकता है। अगर हम आज नही चेते तो कल हमारे पास संपूर्ण भारत नही होगा । जिस तरह से सत्ता की राजनीति धन के लिए और धन की राजनीति सत्ता के लिए हो रहा है वह भारत की एकता अखंडता के लिए भयंकर है । समाज में बनता वर्ग और वर्ग में बटता समाज अपने स्वार्थ की राजनीति के लिए भारत के टूकड़े करने पर आमद है । उसे आज नही रोका गया तो परिणाम उसके भयंकर होगे । आर्थिक स्तर पर समाज में वर्ग संघर्ष एक तरफ नक्सलवाद को जन्म दे रहा है तो दूसरी तरफ नक्सलवाद का राजनीतिकरण हो रहा है । पूंजीवाद का वर्चस्व आज शिक्षा स्वास्थ ,व्यवसाय ,मनोरंजन उधोग पर हावी है । बाजारवाद आज का नायक है, वह हमारे जीवन की शैली और दिशा को तय करता है । हमारे घर में क्या होना चाहिये या नही होना चाहिये यह विज्ञापन हमारे भीतर उतर कर तय करता है । इन सभी के बीच वह जीवन शैली जो महात्मा गांधी ने हमे बताया था सदाहरण जीवन और उच्च विचार वह दम तोड चुका है उसके स्थान पर मंहगा जीवन और दूसरे को लूटने का विचार अपनी जगह ले चुका है। ज्ञान विचार संस्कार साहित्य, नैतिकता ,सब बेकार और बेमतलब की चीजे है । जिसका आज के बाजार में कोई खरीदर नही है । झुठा दिखावा खोखला जीवन ही सब कुछ रह गया है । आज धन ही सब कुछ तय करता है चाहे आदमी का चरित्र कुछ भी हो। एक कहावत तो हम सभी  ने सुना ही होगा कि if character is gone everything is gone . पर आज इसके विपरित है चरित्र भ्रष्ट हो जाये तो कुछ नही खोया अगर धन खो गया तो सब खो दिया । जो समाज बाजार में घर और घर  में बाजार बना लिया हो । जीवन में व्यापार और व्यापार को ही जीवन बना लिया हो । वो समाज स्वयं  को बिकने से कब तक रोक सकता है ? वह अपने स्वार्थ के लिए ,अपने लाभ के लिए कुछ भी कर सकता है । यह समाज की खतरनाक सोच है। जो भारत के टूकड़े करने में महत्वपूर्ण कारण बन सकता है । दूसरी तरफ हिंदू मुस्लिम के मन में एक दूसरे के प्रति  भरता  नफरत  तेजाब बन कर खोलने लगा है ।  ईसाई समुदाय भी इससे अलग नही है । भारत धर्मो की भट्टी पर बैठा है वो घडा है जिसके शरीर पर दरारें पड चुकी है उसमे से रह रह कर तेजाब बाहर गिरने लगा है । आज हम चीन से युद्ध लड रहे है पर चीन से भी भयंकर युद्ध हम अपने देश के भीतर देश में नफरत फैलाने और राष्ट्र के विरूद्ध षंडयंत्र करने वालो से लड रहे है । पर्यावरण की समस्या और विकास का माॅडल दोनो एक दूसरे के विपरीत है । नदियो का जल और हवा में आक्सीजन दोनो की हत्या दिन पर दिन हो रही है । पीये जल की समस्या 2026 से तीस तक गृह और विश्व युद्ध का कारण बन सकता है । सृष्टि को मानव ने विष से भर दिया है अब विष वापस मानव के पास लौट रहा है । इसका पान तो संम्पूर्ण मानव जाति   करना होगा । अब युद्ध, बीमारी ,आकाल ,बाड़ ,मानव के हिस्से में आ चुका है । अब भी समय है हमें भारत के प्राचीन विचार और जीवनशैली के तरफ लौटना होगा । तभी सृष्टि अपने संतुलन में आ पायेगी । सदाहरण जीवन और मानव सेवा ।

आपने मेरे विचार को ध्यान से पढा इसके लिए मै आपका आभारी हूं ।

सादर धन्यवाद 

रवि कांत मिश्र 

8757122773 

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