मृत्यु से जीवन को कैसे बचाया जाये ??

मित्र आप किसी की प्रतीक्षा में है कि कोई चमत्कार हो जायेगा और सब कुछ पहले की तरह समान्य हो जायेगा तो यह भ्रम है । जीवन की चुनौतियां बदल चुकी है । जीवन की शैली बदल चुकी है । हमारा खान पान बदल चुका है । हमारा जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदल चुका है । अगर आप बदलते जीवन मे स्वयं को बदलने के लिए तैयार है तो आप आने वाले समय में जीवित रहेंगे । कल का जो सच था आज वो सच बदल चुका है। वो सच क्या है क्या आप जानते है ? अगर जानते है तो आप अपने को सच के अनुसार ढाल लेंगे अगर आप अभी भी पुराने मानसिकता में जी रहे तो आप को आने वाले समय में भयंकर परेशानी का सामना करना होगा । देखिये क्या सच जो तेजी से बदल रहा । नौकरियां जो पहले थी आज नही है।कल जो व्यवसाय व्यवसाय था आज वो व्यवसाय नही रह गया । शिक्षा, मनोरंजन ,और खेल अब व्यवसाय होते हुए भी व्यवसाय नही रह गया । कोरोना काल ने मानव को मानव से अलग कर दिया है । आज मानव और उसका परिवार एक युनिट बन कर रह गया है । जीवन में जो सामूहिकता का महत्व था वो समाप्त हो गया है । अब आप सिर्फ डिजिटल माध्यम से ही समाज से जुड सकते है । इस काल में अगर हमारे पास इंटरनेट नही होता स्मार्ट मोबाईल नही होता तो हम कहां होते ? हमारा जीवन अपने चारदिवारी में ही कैद रह जाता । यह विज्ञान का सूचना क्रांति का आविष्कार है कि हम कोरोना काल में भी समाज के हर स्तर और स्तम्भ से जुडे हुए है । अब यही एक माध्यम है जो हमें जीवित रख सकता है । दूसरा कृषि जो जीवन का आधार है वो हमे जीवन दे रहा है । अब रोजगार को कृषि क्षेत्र में केन्द्रित करने की मांग है । इसके साथ कृषि से संबंधित जो घरेलु उधोग धन्धे है उनको जीवित करने की जरूरूत है । अब मानव को अपने घर से ही अपना रोजगार शुरू करना होगा । चाहे वो पापड़ बनाये या घी निकाले ,या अचार बनाये या मधु निकाले ,या मसाला पीस कर पैक करे या कुछ और परंतु रोजगार स्वरोजगार की मांग कर रहा है । इस क्षेत्र में कौशल विकसित करने  का काम पुरे भारत में करना होगा । मजदूरो को किसानो को युवाओं को स्वरोजगार का हुनर देना होगा । यानी पुरे भारत में स्वदेशी विचार धारा से काम करना होगा । अब एक ही विकल्प है कि भारत को अपने संसाधनो को लेकर आत्मनिर्भर होना होगा । जो नये भारत के निर्माण में नीव का पत्थर साबित होगा । आने वाले समय का भारत विज्ञान और कृषि की बुनियाद पर खडा भारत होगा । जिसमे हर भारतीये कौशल संपन्न भारतीये होगा । सौ प्रतिशत स्वदेशी संसाधनो पर आत्मनिर्भर भारत होगा तभी हम भविष्य में जीवित रह पायेंगे।  हमारा पर्यावरण संतुलित होगा।बदलते समय में स्वयं को बदलना होगा।  जो कौशल आज काम नही कर पायेगा उसे छोड कर नया कौशल सीखना होगा। यह कोरोना काल की चुनौति है । चाहे कलाकार हो या अभियंता चाहे वकिल हो या डाक्टर अगर आपका हुनर आपको रोजगार नही दे पा रहा है तो स्वयं को बदलने का साहस रखे । तभी बदलते हुए भविष्य में आप अपना योग्यदान दे पायेंगे और आप भविष्य का हिस्सा बन पायेंगे। 
रवि कांत मिश्र 

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