श्री सत्य सांई की मायावयी दुनियां और मैं

बेगम अख्तर की आवाज आती रही और हम जमीन पर गहरी नींद में सोये रहे करीब तीन बजे गुरू जी उठ गये और बेगम अख्तर की आवाज पर विराम लगा दिया । टेप बंद हो गया । क्षमा करे वो टेप नही था अभी मुझे याद आया वो वर्ल्ड स्पेस रेडियो था । मै भी उठ गया और मुहं हाथ धो कर वापस रिस्पशन पर आ गया । गुरू जी करीब चार बजे वाशरूम से निकले । ड्रेसिंग रूम मे गये । बेहतर तरीके से तैयार हुऐ फरफियूम लगाये सिल्क का कुर्ता पाजामा पहने हाथ में छडी लिए रिस्पशन में आ कर अपने चेयर पर बैठ गये।  तभी उनका सेवक चिरंजीव एक अधेड़ आदमी उनके लिए दूध और हारलिक्स और मेरे लिए दूध वाली काफी ले आया । हम दोनो साथ साथ काफी और हार्लिक्स पीने लगे।  तभी संगीत सीखने वाले विधार्थी का आना शुरू होगया। मैने अपनी काफी समाप्त की और गुरू जी फिर मिलने का वादा कर वापस घर के तरफ चल दिया ।इस बात के बाद करीब तीन दिन बाद सरस्वती  जी का फोन आया और मैं दूसरे दिन मिटिंग के लिए जमशेदपुर में विष्टुपुर जनरल ऑफिर के पास बने एक बंगले पर पहूंचा तो देखा की सरस्वती राव जी ,एस बी चौधरी जी खडे है । चौधरी जी की उम्र लगभग साठ पैसठ के करीब होगा।संवाला छोटा चेहरा मध्यम ऑखे ,ऑखों पर चश्मा माथे पर सफेद गोलाकार टीका। हाथ मे एक किताब या फ़ाईल रखे हुए थे । मेरा परिचय करवया गया प्रणाम पाती हुआ ।चौधरी जी ने पहले प्रश्न किया कि आपका गांव कहां है मैने उत्तर दिया भागलपुर । यह सुन वह बोले आप विद्यापति पर लिख सकते है । मै मन ही मन विद्यापति का नाम सुन थोडा उदास सा होगया । की कौन इतना पढे और फिर नाटक लिखे पर मै चुप रहा । हम बाहर घर के सीठी पर बैठ गये पता चला कि गीता सरदाना अपने पति के साथ अपने नये घर का काम देखने गई है । मै थोडा असहज होने लगा था क्यो कि टाईम को लेकर मेरा माईडसेट भारतीये नही है । मै समय को लेकर ब्रिटिश माईंड सेट के साथ काम करता हूं । दस का मतलब दस बजे । करीब दस पंद्रह मिनट तक हम बैठे रहे तभी एक लंबा  पतला दुबला बाल पक्के ऑखों पर चश्मा लगाये सफेद शर्ट और पेंट पहने एक आदमी और एक गोरी भूरी बडी बडी ऑखों वाली महिला ब्राउन रंग की सिन्दूर की गोल सी बडी सी बन्दी लगाये आहते  में प्रवेश कि  जिसे देख हम सभी अपने जगह से उठ गये । साईं राम साईं राम से वतावरण गूंज गया । गीता जी लेट हो जाने की माफी मांगते हुए घर के द्वारा खोल दी । हम सभी को भीतर ,बुलाया गया । पतला दुबला इंसान चुप चाप था । वह सभी को ध्यान से सुन रहा था । बात चौधरी जी ने शुरू की क्या हम लोग विधिपति पर नाटक करने को राजी है । क्या आप विद्यापति पर नाटक लिख लेंगे। इस प्रश्न पर सभी मेरी तरफ देखने लगे । मैने कहा कि क्या हम लोग गौतम बुद्ध पर नाटक कर सकते है । इस प्रश्न पर सभी चौधरी जी के तरफ देखने लगे । चौधरी दो पल कुछ सोचते रहे फिर बोले हां हम लोग कर सकते है । पर नाटक बुद्ध पर ही क्यो ? इस प्रश्न पर मैने कहा कि बुद्ध पर मैने पहले से ही पढ रखा है और मै अच्छ काम कर सकता हूं । आप कितने दिनो में नाटक लिख लेंगे? यह प्रश्न सरस्वति राव जी का था । मेरे मुख से निकल गया एक सप्ताह में। यह सुन सभी को विश्वास नही हुआ । सभी मेरे तरफ देख रहे थे । एक पल के लिए मुझे भी लगा कि कही मैने एक सप्ताह कह कर गलती तो नही कर दी पर दूसरे ही पल मन में आया जो बोल दिया सो बोल दिया । अब पीछे नही हटुगा । मैने कहा मै एक सप्ताह बाद आपको पैंतालीस मिनट की स्क्रिप्ट दे रहा हूं । नाटक का नाम होगा सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध तक । इतना कहने के बाद मै चुप होगया तब तक शरबत आ गया।  हम सभी ने अपना अपना गिलास उठा लिया । बात नाटक के सेट और म्युजिक रिकार्डिंग पर होने लगी मैने कहा यह सब जमशेदपुर में हो जायेगा । मै जब उन सभी से विदा ले रहा था तभी वो चुपचाप रहने वाला व्यक्ति आया और उसने मुझे गले से लगाते हुए बोला आप जरूरू इस प्रोजेक्ट को कर ले गे।  आपके पास गजब का कानफिडेस है । यह व्यक्ति और कोई नही आई आई टी खडगपुर से पास आउट मेकानिकल इंजीनियर बलराज सरदाना जी थे । जो आज इस संसार में नही है मेरा बहुत अच्छा संबध रहा।  वो  मित्र गाईड रहे मेरे लिए । एक सच्चे इंसान जिनका देहांत कुछ साल पहले हो गया । उनसे मैने सिखा छोटी से छोटी वस्तु को कैसे केयर करना । उनका एई वाक्य आज भी याद आता है कि मशीन भी अपनी तकलीफ बोलता है पर हम सुनते नही है । बस चलाते रहते है तब तक जबतक उसका ब्रेकडाऊन नही हो जाता । 

  • मै निकला गया उस मिटिंग से यह संकल्प ले कर की एक सप्ताह में नाटक लिख कर दूंगा।  घर आया काम पर लग गया जो कुछ पढने के लिए था सब एक बार पढ डाला फिर एक कविता का जन्म हुआ ,,और उस कविता को आधार बना कर नाटक पांचवे दिन तैयार हो गया । इस बार मिटिंग हुई सिदगौडा एस डी यम इंगलिश मीडियम स्कूल में । नाटक पढा गया नाटक सभी को पसंद आ गया । मुझे एंडवास फीस दे दी गई ।  नाटक को इंगलिश में अनुवाद करने की बात हुई । मेरा तो सिर ही घुम गया कि यह क्या ? भाषा की तो ऐसी की तैसी हो जायेगी । गौतम बुद्ध पाली भाषा में बात करते थे आप पाली से सीधा इंगलिश पर ले जाये गे।  अजीब नही लगेगा कि भगवान बुद्ध जंगल में अंग्रेजी बोल बोल कर सत्य खोज रहे है । पर कुछ नही चला अब तो नाटक इंगलिश में ही होगा क्यो कि पूट्टापर्ति में अंतरराष्ट्रीय लोग आते है । मै भी अड गया कि चाहे जो कुछ भी हो जाये कविता तो हिंदी में ही रहेगी । भले ही आप संवाद इंगलिश मे अनुवाद करवा ले । बात का एक हल निकला सभी सहमत हो गये पर मै मन ही मन दुखी हो गया कि मै हिंदी में नाटक नही कर पाया । अब दूसरा बम।मेरे उपर फटा कि नाटक में सिर्फ लड़कियां ही भाग लेगी लडके भाग नही ले सकते । ऐसा स्वामी का नियम।  मेरा मिजाज फिर खराब हो गया कि लडकी को गौतम बुद्ध कैसे बनाऊ ? पर मेरे पास कोई चारा नही था ।स्वामी का नियम था जो हमे मानना था नही तो नाटक नही हो सकता । अब तीसरा बम।मेरे माथे पर तब फटा जब फर फर इंगलिश बोलती लडकियो के बीच मुझे छोड दिया गया जो स्कर्ट टी शर्ट पहने बाॅली बाल खेल कर अभी अभी आई थी । इनसे गौतम बुद्ध का चरित्र करवाना है  । मैने एक प्रश्न पुछा कि आप लोग मे से किसने गौतम बुद्ध को पढा है तो सभी ने हाथ खडे कर दिये ।मैने पूछा गौतम का जन्म इसा से पहले हुआ था या बाद में ? जबाव उल्टे पूल्टे आये । मैने सोचा छोडो यार इनको थियेटर के शर्त  पर ले आए बस फिर आगे देखता हूं क्या हो सकता है ।अपनी कास्टिंग फिजिकल लेवल पर शुरू कर दी । करीब बीस लडकियो का चुनाव किया।  सभी लड़कियां फारवट और बातूनी थी लगातार कुछ ना कुछ बोले जा रही थी ।एक लिस्ट बन गई इनकी ट्रेनिंग कै लिए एक रूम तय हो गया । सभी ने अंग्रेजी स्टाइल में मुझे बाय कहा और चल दी । मेरा सिर घुमने लगा मन ने कहा अबे रवि कहां फस रहा है एक तरफ साईं राम बोलने  वाले साईं डिवोटी दूसरी तरफ हाय बाय बोलने वाली लड़कियां। क्या होगा मेरा दोनो को बैलेंस करते करते कही मेरा खुद का बैलेंस ना ही बिगड़ जाये । एक मन हुआ भाग जाऊं फिर सोचा बिना कोशिश किये हार कैसे मान लूं ? इनको कुछ आये ना आये पर डिसिपिलन तो सीखा ही दूंगा आने दो हाय बाय वाली लडकियो को । चौथा बम फटा कि सारे डायलाग पहले से रिकार्ड रहेंग एक्टर उस पर अपनी लिपसिग देगा । बस मै सिर पकड कर बैठ गया । मन ही मन सोचा यह लोग मुझे पागल कर देंगे।  डबिंग में अपने बोले डायलाग को मिलना अच्छे अच्छे एक्टर के लिए मुश्किल का काम हो जाता है । फिर यह तो रंग-रूट  है । इनको रिकाडेड डायलाग पर एकटिग करना । कहां फस  गया है भाग जा , अभी भी समय है भाग जा फिर मन के एक कोने से आवाज आई बिना लड़े तो हार नही मानूँगा।  चलो पहले इन आधुनिक लडकियो के साथ थियेटर वर्कशाप करता हूं ।
  • अब थियेटर वर्कशाप मै क्या हुआ। यह मै आपको अगली कडी में बताऊंगा। अभी और भी बम फटने बाकि है । आपने मेरी बातो को ध्यान से पढा इसके लिए मै आपका आभारी हूं ।
  • रवि कांत मिश्र 

Comments

  1. Bahot kam hote jo har nahi mante unhi me se aap hai

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    1. धन्यवाद ,,आप अपना नाम लिखते तो अच्छा होता ।

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