युद्ध दुनियां का सबसे बडा व्यापार है ।


जरा सोचने वाली बात है जब पुरा विश्व कोरोना से युद्ध लड रहा है तब चीन को अपनी सीमा पर युद्ध लड़ने की जरूरूत क्यो आन पडी ? भारत युद्ध नही चाहता पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है । भारत  के लिए युद्ध क्या है एक थोपी हुइ वस्तु जिसे भारत लड़ रहा है । एक टूकड़े जमीन के लिए चीन भारत के और भारत चीन के सैनिकों की हत्या कर रहे है । क्या एक दूसरो की हत्या कर चीन और भारत उस एक टूकड़े जमीन की समस्या को सुलझा लेंगे।  दो विश्व युद्ध हमने देख लिया है लाखो सैनिक मारे गये । फिर शांति वार्ता हुई । अगर लाखो सैनिक के मरने से पहले शांति वार्ता हो जाती तो लाखो परिवार को अपने बेटे खोने का दर्द नही सहना पडता पर हम इतिहास से सबक नही लेगे इसलिए इतिहास अपने आप को दोहराता है। भारत और चीन के इस झड़प वाली युद्ध का अंत भी इसी तरह होगा।  अभी भारत और चीन के माताओ का कोख सुना करना है । इसके साथ दोनो देश अपने युद्ध सामग्री का खपत करेगे।ताकि और युद्ध सामग्री बनाई जाये या खरिदी जाये । युद्ध का व्यापार शांति के दिनो में मंदी में पडा रहता है । बाजार में तेजी युद्ध के समय आता है । जब दोनो देशो को गोला बारूद की जरूरूत पडती है । यही वह समय जब चीन अपने देश की जनता का ध्यान कोरोना और उससे उतपन्न मंदी और त्रासदी से हटाने के लिए भारत पर युद्ध थोप रहा है । भारत इस चाल को भली भांती समझ रहा है पर उसके पास युद्ध में हिस्सा लेने के शिवाये और कोई चारा नही है । क्या भारत जैसा देश जो अभी मंदी और कोरोना से निकल नही पाया है उसके लिए युद्ध एक भयंकर बोझ नही है ? जी हां भारत अपनी मातृभूमि के लिए यह युद्ध लड कर जीत सकता है पर इसका मूल्य इस देश की जनता को चुकानी पड़गी। उसी तरह चीन की जनता को भी युद्ध की कीमत चुकानी पड़ेगी । इस युद्ध से दोनो देशो की जनता का आर्थिक  मानसिक भावनात्मक संतुलन बिगड़ जायेगा ।याद रखे  युद्ध जब भी हुआ है आम लोग को सबसे अधिक युद्ध का मूल्य चुकाना पडा है ।कमी आपने सुना है कि किसी प्रधान मंत्री या देश के सबसे बडे पूंजीपति का बेटा सीमा पर शहीद हो गया । सीमा पर देश के किसान ,शिक्षक ,
मजदूर का बेटा ही शहीद होता है । इस विचार का अपवाद हो सकता है पर अपवाद से कोई नियम नही बनता उल्टा अपवाद नियम को ही प्रमाणित करता है । इस वक्त होश में रह कर काम करने की आवश्यकता है । युद्ध दोनो भारी जनसंख्या वाले देश के लिए अभिशाप है । दोनो देशो की जनता को इस विचार पर एक हो कर अपने देश में युद्ध के विरूध अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिये । दोनो देशो की महिलाओ को   खास कर माताओ को देश के प्रधानमंत्री पर यह दबाब डालना होगा कि हमे युद्ध नही चाहिये । हमारे बेटों को सीमा से वापस बुला ले । याद करे इस भयंकर त्रासदी से दोनो देश की जानता को कोई बचा सकता है तो दोनो देश की माता और बहने । युद्ध प्रेमी लोग मेरी बातो से सहमत नही होगे क्यो कि युद्ध के रोमांच को आप भोग नही पायेंगे । युद्ध  के समय लोगो के भीतर वीर  रस जाग जाता है। लोग मरने मारने की बाते करने लगते है । पर इन महामूर्खों को यह नही मालुम होता कि इस युद्ध नाम के तमाशा का टिकट आपको मंहगे दाम में खरीदना पडेगा । जिसका ब्याज आपके आने वाले पीढी को अपने जीवन में चुकाना होगा । जो बहुत मंहगा पडेगा । लाखो जवानी युद्ध मैं मारे जायेगे और युद्ध के बाद लाखो जवान युद्ध से बाहर निकलने में मारे जायेगे । देश भक्ति नाम की भावना का उपयोग युद्ध में क्यो ?देश के विकास में लगाये । टैक्स भरे ईमानदारी से ,देश के लिए ईमानदारी से काम करे । देश के लिए जीये । यह तभी संभव होगा जब दोनो दशो की माताओ को अपना कमर कस कर यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने बेटों को युद्ध सामग्री नही बनने देंगे। बेटा चाहे भारत का मरे या चीन का कोख तो मां का उजड़ता है किसी नेता ,व्यापारी , पूंजी पति का कुछ नही उजड़ता। 
आपने मेरी बात को ध्यान से पढा इसके लिए आप का आभार । अपनी प्रतिक्रिया के साथ अपना नाम सेल नंबर जरूरू लिखे ।
रवि कांत मिश्र

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