युद्ध में गांधी और गौतम ।

युद्ध अब जब भी होगा तो बाजार उसका नायक होगा । दुनियां भर के जो हथियार के व्यापारी है उनके जीवित रहने के लिए ,बाजार में बने रहने के लिए युद्ध को आयोजित करना अनिवार्य होता है। महाभारत के युद्ध को कृष्ण नही रोक पाये तो उस युद्ध में हथियार के व्यापारी रहे होगे । उसने दुर्योधन को इतना उकसाया होगा कि तुम किसी भी शर्त पर शांति के लिए सहमत मत होना । इधर चीन को उस हथियार के व्यापारी ने वही समझाया होगा कि तुम भारत से सहमत मत होना । युद्ध हमे चाहिये ,हमारे सर्वाइवल के लिए जरूरी है । आज गौतम और गांधी अपने अपने आहिंसा के विचार को भस्म होते हुए देख रहे है । एक टूकड़े बंजर भूमि जहां मानव तो क्या पशु भी रहना पसंद नही करता ,उस भूमि के लिए दो देशो के सैनिक शहीद हो रहे है । दोनो देशो में यह होड़ लगी है कि कौन किसके कितने सैनिक मारता है । मिडिया जोर जोर से चिल्ला रही है । दोनो देशो के सैनिक परिवार के लोग अपने अपने ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है कि यह ईश्वर युद्ध को रोक दो परंतु ईश्वर सदा से युद्ध रोकने में असफल रहा है । क्यो कि धरती पर ईश्वर से अधिक मानव मन की चलती है । अंहकार लोभ और हिंसा करने की इच्छा मनुष्य के मन पर हमेशा से भारी रहा है । चाहे महाभारत काल हो या रामायण का काल । युद्ध ना चाहते हुए भी जीवन की मांग बन ही जाता है । हमने इसके बाद प्रथम और दुतिये विश्व युद्ध को देखा उसके परिणाम देखे । आज भी हिरोशिमा और नागासाई की तस्वीर हमारे मन पर धुंधली नही हुई है पंरतु फिर भी हम युद्ध उन्मुख रहते है । संसार के सभी देशो का जितना धन और संसाधन युद्ध के लिए खर्च होता है उतना में तो पुरे संसार की गरीबी को पांच बार  सदा के लिए खत्म किया जा सकता है । गरीबी एक भयंकर बिमारी है जो सभ्यता के विकास से मानव समुदाय को पकडा हुआ है।  यह सवाल इतिहास कारो से पूछना चाहिये की दुनिया का पहला गरीब  व्यक्ति कौन था  ? जिसे अमिर लोगो ने गुलाम बना लिया था । बहरहाल सारा खेल गुलाम बनाने की प्रक्रिया का है । पहले गरीबों को गरीब रहने दो । यह चुनाव के लिए अति अनिवार्य है । भूख की आग का मुद्दा हर राजनैतिक दल के लिए एक ऐसा मुद्दा है जिस पर चल कर सत्ता तक पहुंचना उसके लिए आसान होता है । विगत सत्तर साल में हमारे देश के चुनाव प्रचार का मुद्दा देख ले गरीबी ,परंतु विगत सत्तर साल में गरीबी कम हुई है ? हम गरीबी को बनाये रखना चाहते है । वर्ना कई लाल हरे पीले नीले राजनैतिक दलों की दुकान बंद हो जायेगी। उसी तरह हम राजनीति में युद्ध को भी बनाये रखना चाहते है । पर अब युद्ध का होना पुरे पृथ्वी को नष्ट कर सकता है । पुरी पृथ्वी हिरोशिमा नागासाई में बदल सकती है । इस पृथ्वी को बचाने के लिए युद्ध को विराम देना ही होगा।  पुरे विश्व की मातृशक्ति को युद्ध के विरूद्ध एक अहिंसक युद्ध लड़नी होगी । इस भावना से उपर उठना होगा कि मेरी कोख का जना  देश के काम आ गया। नही नही मेरी कोख का जना युद्ध के व्यापारी के काम आ गया । हा युद्ध हमे करनी होगी । भूख से ,गरीबी से ,बिमारी से , अशिक्षा से ,पीये जल को बचाने के लिए , पर्यावरण को बचाने के लिए,अगर इस युद्ध को लड़ते हुए कोई शहीद हो जाता है । तो मानवता के इतिहास का वो सबसे महान सैनिक होगा । युद्ध मूर्खता से शुरू हो कर समझदारी के समझौते पर समाप्त होता है । युद्ध का वहिष्कार पुरे विश्व में होना चाहिये । 
सादर धन्यवाद 
रवि कांत मिश्र ।

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