श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं
मन भारी था रात भर ठीक से मैं सौ नही पाया था । बार _बार उन बच्चियों का चेहरा मेरी ऑखों के सामने घूमता रहा। उनकी उदास और ऑसू से भरी ऑखे मुझ से अनेकों सवाल करती रही । मै एक बेबस इंसान की तरह उनके सवाल सुनता रहा। सर हमारी क्या गलती है ? आप बाताये ? हमे शो करना है हमे नाटक से ना हटाये ,,मन एक बार फिर भर गया । निशब्द हो कर में खडा रह गया था पर भीतर मन चीख मार कर रो रहा था ।जी चाह रहा था जा कर उससे पुछ कि जिसे लोग भगवान कहते है कि तुमने इन बच्चो के मन को क्यो दुखाया ? कहते है बच्चो के मन में भगवान रहता है तो फिर इसके मन को क्यो दुखाया?? बहुत देर तक खुद को सहज करने की कोशिश करता रहा पर सब बेकार था । उनसे यह भी नही कह सकता था कि सब कुछ ठीक हो जायेगा या चलो अगले नाटक में तुम काम कर लेना । पता नही इन लोगो से जीवन में फिर मुलाकात होगी या नही ? सब कुछ ऐसा ही चल रहा है । मै उठा और विस्तर पर बैठ गया मेरे बगल वाले विस्तर पर गुरूजी तकिया को बांहों में लिए बच्चों की तरह सौ रहे थे । सुबह हो चुकी थी सूरज देव आकाश में निकलने की तैयारी कर रहे थे । पंछियो की चहचहाट से पुरा वातावरण गूंज रहा था । संजय भी बगल वाले विस्तर पर सोया हुआ था । मै चुपचाप उठा वाथरूम के तरफ चला गया। हांल में कुछ ही लोग सोये थे मेरे स्टूडेंट और उसके माता पिता सभी निकल गये थे । मैने अपने आप से कहा शायद कैटिन के तरफ या दर्शन के लिए गये होगे । मै फ्रैश हुआ शेव बड गई थी सोचा शेव कर लूं नही तो गुरू जी ठोक देगे और शेव करने के लिए बोलेंगे पर मै बिना शेव किये वापस रूम में आया और सफेद कुरता पाजामा पहन कर निकल गया । कुछ तय नही था कि कहां जाऊंगा बस चलता जा रहा था। चलते चलते गणेश गेट पहूंच गया देखा लोग स्वामी के दर्शन के लिए लाईन लगा कर जा रहे थे । मै भी ना जाने क्यो उनके साथ चल दिया। साईं कुलवंत हाल के गेट पर हर पुरूष और महिल की चैकिंग होती है । मेरी भी चैकिंग हुई आप एक पैन तक भीतर नही ले जा सकते । मेरे मन ने फिर सवाल किया कि कैसा जमाना आ गया है भगवान को भी पृथ्वी पर डर लगता है वह भी अपने भक्तों से । हां डरने की जरूरूत है जीसस की हत्या उसके भक्त जुदास ने ही किया था । फिर गांधी की हत्या करने से पहले नाथूराम ने उनके पैर छुये थे । मै भीतर हाल में गया और आगे में जगह खाली थी मै बैठ गया, थोडी देर बाद मेरी ऑखे बंद हो गई मै ध्यान में चला गया भीतर एक मौनता उतरती चली गई । अब उस मौनता में पंछियों की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी । कभी ऐसा प्रतीत होता कि पछियो की आवाज मेरे भीतर हो रही है और बाहर भी हो रही है । मैं अपने साईलेस मै डूबा रहा । तभी अचानक से वेद पाठ शूरू होगया मेरी ऑखे खुल गई देखा तो वही आदमी गैरिक वस्त्र पहने धीरे धीरे जमीन पर पैर रखते हुए जैसे जमीन पर अधिक उसके शरीर का भार ना पडे चलते हुए हाल के भीतर मेरे दांये तरफ वाले द्वार आ रहे है । लोग हाथ जोड़ कर उनको देख रहे है । कोई हाथ फैला कर कुछ मांग रहा है । कोई अपने हाथ मे रखे पत्र को देने के लिए आगे बडा रहा है । स्वामी के साथ दो युवा जो श्री सत्यसाई विश्वविधालय के छात्र है सफेद वस्त्र पहने पीछे पीछे चल रहे है । स्वामी दूर तक बैठे लोगों को देखते और फिर हाथ हवा में घुमाते आकाश की तरफ देखते और आगे चल देते । वह धीरे धीरे मेरे करीब आ रहे थे मै चुपचाप उनको एकटक देख रहा था । उनकी ऑखों में चैपलिन वाली करूणा का भाव मुझे दिखाई दे रहा था । शरीर शांत पेड की तरह धीरे धीरे चल रहा था । उनके सिर पर घुंघराले बालों का ताज मन को सौन्दर्य से भर दे रहा था । कितना शांत मृदु और सौम्य आदमी है । चेहरे पर कैसी स्थिरता है । मन का झील शांत हो गया है । वह मेरे पास से गुजरे मैं उनको देखता रहा ना हाथ दुआ के लिए उठे और ना मन ने कुछ कहा । बस मैं देखता रहा कारवां मेरी ऑखों के सामने से गुजर गया । जब गुजर गया तो मेरे मन ने कहा कि क्या यह आदमी किसी को दुख दे सकता है । मन का तुरंत उत्तर आया नही ,,नही यह आदमी दूसरो को दुखो से बचाने के लिए उसका दुख अपने उपर ले सकता है । यह आदमी आदमी नही है यह तो प्रेमदुत है जो इस नफरत हिंसा वाली दुनियां में उसका मैसज ले कर आया है । लव इज गाॅड ,गॉड इज लव । तो यह क्या हो रहा है ? नाटक के साथ । स्वामी अपने रूम में चले गये । मैं भी धीरे से उठा और वहां से बाहर निकल गया । गणेश गेट से बाहर आ कर एक कैफेटेरिया में चला गया जहां बहुत सारे विदेशी सफेद कपडा पहने काफी सिगरेट का आनंद ले रहे थे मै भी उनके साथ शामिल हो गया । सभी अंगरेजी में धीरे धीरे बात चीत कर रहे थे । मै एक खाली टेबल पर बैठ गया ।मैं अब यहां से जाना चाहता था ,,ऐसा लगने लगा था की मेरी जिन्दगी रूक सी गई है । बोर होने लगा था मैं वही पांच किलो मीटर के दायरे मैं जिन्दगी घुमती हुई दिखाई दे रही थी । वही साईं राम साईं राम।की ध्वनी,,पुराने हिंदी फिल्म के गाने सुने कितने वर्ष हो गये ऐसा लग रहा था । कितने अच्छे थे वो दिन जब बेगम अख्तर को सूनते सुनते सौ जाया करता था । कहा यहां बेगम अख्तर । पुरे माहौल को मोनोटोनस बना कर रख दिया है । ना कोई डांस ना कोई संगीत बस भजन करो भजन सुनो । साला मै तो बैरागी हो जाऊंगा । ऐसे भी मन संसार के बनावटीपन से जल्दी उठ जाता है । बस यह नाटक हो जाये छुटकारा मिले । तभी एक महिला का स्वर मेरे कानो में टकराया एक्सकियुज मी मे आई सीट हियर,,,मै सिर उठा कर उसकी तरफ देखा तो वह एक विदेशी महिला थी मेरी तरफ देख रही थी ,,मैने कहा यस प्लीज। मेरे इतना बोलते ही वह बैठ गई । उसने हैलो कहा बदले में मैने भी हेलो कहा । उसने हिंदी में सवाल किया आप बिहार से आये है । मैने कहा हां पर आपको कैसे मालुम ? उसने मुस्कुराते हुए कहा मै आपके नाटक के रिहर्सल देखने गई थी । अच्छा लगा । आपका शो अच्छा होगा । मैने थैंक्स कहा पर मन ही मन कहा बस हो जाये । तभी उसकी काफी आ गई । उसने अपना विदेशी लंबी सिगरेट की पैक्टगुलाबी रंग के हैड बैग से निकाल कर एक सिगरेट निकाली लाईट किया और सिगरेट मेरी तरफ बढ़ाते हुए बोली सिगरेट। मैने नो थैंक्स कहा और फिर उठते हुए बोला एक्सकियुज मी ,,आप मेरे शो मे जरूरू आईगा । उसने सिगरेट का धुंआ मुंह से बाहर फेकते हुए बोली हां जरूर आऊंगी । वाय,, मैनै भी बाय कहा और कैफेटेरिया से बाहर निकल गया । वापस हाल में आया तो गुरू जी और संजय दोनो नही मिले मै समझ गया कि दोनो कैटिन नाश्ता करने गये होगे । मै शेविंग का सामान ले कर वाथरूम के तरफ निकल गया । वहां बडा सा आईना लगा हुआ था । मैने क्रीम लगा कर शेव पर फेन करने लगा । थोडी देर बाद मैने शेव करना शुरू कर दिया बाये साईड का शेव किया ही था कि एक आदमी तेजी से बाथरूम में आया और मुझे देख कर बोले जल्दी चलिये चौधरी जी बुला रहे है । साला मन एक बार फिर कांप गया कि अब क्या बम फुटेगा । मै आधे सेव की हालत मैं हाथ में रेजर लिए हाल में गया तो सभी बडे भक्तमुनी बैठे थे मुझे आधे शेविंग की हालत में देख सभी को थोडा सा हल्का सा झटका लगा । पर सबो ने अपनी प्रतिक्रिया पर रोक लगा दी । चौधरी जी बोले कि स्वामी ने पैंतालीस मिनट यानी फुल लेंथ नाटक की स्वीकृति दे दी । मेरे मुख से निकला आर यू श्योर । उन्होने कहा हां । सच मुच मन में कोई खुशी नही हुई । एक पल में खडा रह गया। तभी फिर चौधरी जी बोले मुझे स्वामी डांटते हुए बोले इतना बुडा हो गया पर समझ बिलकुल नही है मंच पर नौ दिनो से यज्ञ हो रहा है मंच पर हंवन कूड़ बनाया गया है और बच्चा लेकर नाटक करने आ गया है । कब समझदारी आयेगा । तब अब क्या होगा । हंवन कूड़ तो अभी प्रज्वलित है । उसे मंच से हटाये बिना नाटक कैसे होगा ?हवन कुंड नही हटाया जा सकता है । अब आप कुछ ऐसा कर दे कि नाटक मंच पर हो जाये । मै समझ गया कि नाटक की ब्लाॅकिग को शुरू से बदलना होगा । तभी कोई बोला अगर कोई बच्च हवन कुंड में गिर गया तब ? नाटक कैसल कर दिया जाये । स्कूल के टीचर और बच्चियों के माता पिता इस बात के लिए इजाजत नही देंगे। हवन कुंड बडा है ।देख कर डर लगता है ।ना बाबा ना कौन रिस्क ले ।मै समझ गया कि नाटक फिर लटक गया । यह लोग बात करने लगे मैं अपनी आधी शेविंग बनाने बाथरूम में चला गया आज इतना ही ।

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