आत्महत्या का वयरस और अवचेतन मन ।

आत्महत्या का वायरस हर व्यक्ति के मन में रहता है । प्रत्येक व्यक्ति अपनी जीवन यात्रा में कभी कभी ऐसे विपरीत पल से गुजरता है जहां उसके मन में आत्महत्या का वायरस  उत्पन्न होता है । इस वायरस से जो लड़ना जानता है वह वायरस को पीछे छोड आगे निकल जाता है और जो लड़ना नही जानता है वह वायरस का शिकार हो जाता है ।  जीवन कौशल की दृष्टि से देखे तो जीवन आपके विचारो का परिणाम है । तनाव या डिप्रेशन जीवन का संकेत है कि आप अपने को सहज सरल करे । तनाव या डिप्रेशन को समाप्त करने के लिए कई उपाय है परंतु तनाव और डिप्रेशन क्यो हमारे मन में जन्म ले रहा है ? इसके लिए कौन जिम्मेदार है व्यक्ति की मानसिकता या जीवन की परिस्थिति या फिर दोनो ? यह हर व्यक्ति को समझना होगा इसके कारण को समझना होगा और अपनी मानसिकता में, अपने सोचने की शैली पर ,अपने जीवन दर्शन पर काम करना होगा । कलाकारो की समस्या कुछ अलग होती है और नही भी होती । ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि इस फिल्म उधोग में बहुत से स्टार ऐसे हुए जिनके पास एक समय में सब कुछ था पर उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया कि वह अपने रोज़ी रोटी के लिए छोटे छोटे चरित्र करने को विवश हुए और इस चुनौति को उन अभिनेताओं ने स्वीकार किया और संघर्ष करते हुऐ अपनी जीवन की गाडी को खीचते रहे । क्या एक स्टारडम को जीने के बाद फिर से नीचे दर्जे से शुरू करना कितना अवसाद उनके मन में आया होगा । आत्महत्या का वायरस उनके मन मे भी जगा होगा परंतु जीवन जीने और जीवन से संघर्ष करने की इच्छा शक्ति ने उन्हें धक्का दिया होगा । दरअसल आत्महत्या का मूल कारण है जीवन में प्रेम का आभाव और प्रेम का आभाव का कारण है कि आपने अपने भीतर प्रेम से अधिक अपनी महत्वकांछा को दे रखा है । महत्वाकांछी व्यक्ति अपनी सफल असफल महत्वकाछा के साथ तन्हा हो जाता है । यही तन्हाई ,यही अकेलापन ,व्यक्ति को अपने सकारात्मक ऊर्जा से दूर ले जाता है। जीवन से ,या अपने आप से अपेक्षा और अपेक्षा की पूर्ति या आपूर्ति दोनो में उदासीनता का आना अनिवार्य है ।इस उदासीनता से स्वयं को अलग रखना हर व्यक्ति को सीखना होता है और  यह जीवन के पाठशाला में प्रतिदिन सीखने वाला विषय है । अगर आप जरा सा भी चुके और आपके मन में नकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होना शुरू होगया । आप अपने जीवन में व्यस्त है आप अपने अवचेतन मन पर ध्यान नही दे पा रहे है या आप अपने अवचेतन मन से भाग रहे है । अपने आप को मोबाईल टी वी या किसी और माध्यम में व्यस्त कर आपने अवचेतन के वायरस से भाग रहे है। उसे भुलाने की कोशिश कर रहे है पर हर प्रयास एक समय के बाद थक जाता है और वह वायरस आपके उपर हावी होने लगता है । दरअसल आप यह समझने में चुक जाते है कि वह नाकारात्मक वायरस का जन्म आपकी मानसिकता से हुआ है या आपके जीवन की परिस्थिति से हुआ है या फिर दोनो से हुआ है । आपको उसका समझना होगा और यह स्वीकार करना होगा कि आप नकारात्मक ऊर्जा का शिकार हो रहे है । ऐसे समय में आपके जीवन के करीब तीन व्यक्ति का होना बहुत आवश्यक है पहला आपका गाईड ,दूसरा मित्र ,तीसरा फिलोसफर ,यह तीनो व्यक्ति आपको अवसाद से बाहर आने में सहयोग करेगे । अगर आपके जीवन में यह तीन व्यक्ति का आभाव है जो कि महानगरों की सेल्फ केन्द्रित जीवन शैली में अकसर देखने को मिलता है ,जिसे मैं स्वस्थ जीवन शैली नही मानता । जिस दिन इस संसार में केवल आप ही बच गये आपके मन में कोई मित्र ,कोई गाईड  कोई साथी कोई फिलोसफी, कोई प्रेम का भाव नही बचा उस दिन आत्महत्या का वायरस आप पर अटैक करेगा और आप स्वयं को बचा नही पायेंगे ? स्वयं को अपने भीतर के आम आदमी से जोड़ कर रखना ,अपने बचपन से जोड़ कर रखना ,अपने जीवन के  उजाले पक्ष से अपने को जोड़ कर रखना और हर दिन अपने जीवन को जीरो से शुरू करना । एक तरीका हो सकता है आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा के संचार का ,,, दूसरा विचार जो बहुत से थियेटर एक्टर अभ्यास करते है सदाहरण  जीवन शैली और मानव की सेवा करना । जीवन में जो मिला उसके लिए आभार और जो नही मिला उसके लिए प्रयास करते रहना पर उम्मिद को जीरो करके । हमारे यहां समस्या है जीवन कौशल के प्रशिक्षण का ,लोग इंजीनियरिंग कालेज या मेडिकल कालेज की परिक्षा पास कर लेते है ,आई पी एस और आई एस की कठिन परीक्षा पास कर लेते है पर जीवन को कैसे जिया जाये इसकी परिक्षा में असफल हो कर आत्महत्या कर लेते है । आज महानगरों और शहरो में जो एकांकी जीवन शैली है उसका अभ्यास हमें प्रकृति से दूर ले जाता है । हम भारतीये को डी ए ने ग्रामीण जीवन शैली से जन्म लिया है जहां मानव जीवन प्रकृति से अलग नही प्रकृति का हिस्सा है । हमारे अवचेतन में आत्महत्या का वायरस प्रकृति से अलग या दूर होने के कारण भी होता है । अंततः हमे अपने जीवनशैली ,जीवन कौशल  ध्यान योगा पर पुनः ध्यान देने की आवश्यकता है । इसके साथ समय-समय पर अपने गाईड ,मित्र और फिलासफर से संवाद करते रहना चाहिये ।ताकि आतहत्या का वायरस को सकारात्मक ऊर्जा से नष्ट किया जा सके 
 ऊं शांति 
रवि कांत मिश्र 

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