सफर अभी बाकी है ,,
मैम किचन से बाहर निकल कर फोन रिसीव की हैलो ,,दूसरी तरफ से मानस की आवाज थी जिसने कुछ कहा जिसे सुन मैम थोडा नाराज होते हुए बोली यह क्या मैने सारी तैयारी कर ली थी , पहले बता देते । फिर कुछ कहा गया जिसे सुन कर मैम बोली ओके ध्यान रखना । इतना बोल कर फोन कट हो गया। मैम अ के तरफ देखी जो मैम के तरफ एकटक देख रहा था । मैम बोली प्रो सहाब आज नही आ रहे है । अब वह अगले सप्ताह आयेंगे । देखो मै कुछ भूल रही हूं वो याद आ गया । मैम इतना बोल कर किचन के तरफ चली गई ,अ चुपचाप बैठा था पर उसके मन मे छुपी उसकी अपनी मैम बार बार उससे कह रही थी तुम जो देखना चाहते हो दरअसल वह नही है । वह अलग है मै उससे अलग हूं । तुम मुझ में और मै तुम्मे कही रच बस गई हूं ,हम दो होते हुए भी कही एक है । हम एक दूसरे से है एक दूसरे के लिए । देखो उसे ,वह प्रो सहाब की पत्नी है ,तुम्हारी मैम है ,,हो सकता है तुम्हारी दोस्त हो जाये । पर रहेगी हमेशा तुम्हारी क्लास टीचर सुचित्रा मैम , अ अपने भीतर की मैम
की बाते सुन रहा था ,जब वह चुप हो गई तो अ अपने आप में बुदबुदाया नारी पहले एक नारी होती है ,,,फिर बाद में सब कुछ और नारी को सच्चे प्रेम की प्यास हमेशा रहती है ,वह उसके इंतजार में जीती है । मैम हाथ में केक का प्लेट लिए अ के सामने खडी थी और अ को अपने आप से बाते करते सुन रही थी ।अ अपने आप में खोया बोले जा रहा था । मैम भी इसी प्यास में जी रही है । आनंद ,,क्या बोल रहे हो ? आनंद एकदम से हडबडा गया अपनी दुनियां से बाहर आ गया उसकी समझ में नही आ रहा था कि वह क्या कहे ,,घबडाहट में उसके मुहं से निकल गया मैम मै अपने भीतर के मैम से बाते कर रहा था,,,, नही ,,,,नही मैम मै अपने मन से ,,नही मै अपने जीत से बाते कर रहा था । मैने बाते सुन ली तुम,,मैम नारी प्यास के बारे में बाते कर रहे थे । तुम परेशान मत हो हम इस विषय पर बात कर सकते है । लो पहले केक खाओ , केक का प्लेट टेबल पर रखते हुए बोली । तुम केक इंजाव करो मै अपनी कॉफी ले कर आती हूं । इतना बोल कर मैम वापस किचन मैं चली गई । कुछ समय के बाद मैम अपने बडे से काफी कप के साथ आई और अ के सामने बैठ गई । अपनी काफी के एक सिप लिया और सिप लेने के बाद बोली केक कैसा लगा तुम्हे ? मैम बहुत अच्छी बनी है । खास कर आपने जो चॉकलेट का फेलवर दिया है वो तो लाजवाब है । तुम कहते हो तो मैं मान लेती हूं ,तुम कभी झूठ नहीं बोल सकते ।झूठी तारीफ नही कर सकते । जानते हो आनंद तुम्हे कौन सी बात औरो से अलग करती है ,तुम्हारी सच बोलने की आदत । मैम ने काफी का एक घुट भरा और फिर अ के तरफ देखती हूई बोली तुम जीवन की जंग हार कर भी जीत जाओगे। पर जिस दिन तुमने अपनी यह आदत बदल ली
उस दिन तुम जीत की तरह हो जाओगे ।उस दिन तुम जीवन की जंग जीत कर भी हार जाओगे । चालाकी से चीजे हासिल की जा सकती है पर चालाकी करके अपने भीतर के निर्दोष मन को फिर से नही पाया जा सकता । याद रखना मैम की बातो को । निर्दोष मन ही हमारी सबसे बडी शक्ति है । या यु कहे की सृष्टि से हमे जो मन जोडती है वो हमारा निर्दोष मन है । मैम ने काफी का एक घुट लिया और कप टेबल पर रखते हुए सोफे पर टेक लगा कर बैठ गई । कुछ समय तक दोनो खामोश रहे अ केक खा चुका था । मैम अपने आप में खोई रही। कुछ देर इसी तरह से बीता अ का मन हुआ की उठ कर जाने की इजाज्त मांग ले । तभी मैम बोली मै तुम्हे एक सच्ची कहानी सुनाना चाहती हूं । क्या तुम सुनोगे ? हां मैम सुनना चाहुगा ,,ओके पर ध्यान से सुनना ,,कहानी जहां आ कर धीरे धीरे चलने लगेगी वहां मैं तुमसे कोई सवाल कर सकती हूं । जैसे इस कहानी में नायक ने ऐसा क्यो किया ? यस मैम । चलो तो शूरू करते है । अ सजग हो कर बैठ गया । इस कहानी की नायिका और नायक एक सेमिनार में मिलते है । दोनो के बीच बातचीत होती है । वो बातचीत देश के आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को ले कर होती है । दोनो अपना अपना पक्ष रखते है । दोनो के बीच कुछ मतभेद रहता है पर दोनो कई बातो पर एक दूसरे से सहमत हो जाते है । इस मुलाकात के बाद दोनो की कोई एक साल तक कोई मुलाकात नही होती है ।फिर एक साल बाद सेमिनार कालेज में आयोजित किया जाता है । दोनो कि फिर एक बार मुलाकात होती है ।दोनो के बीच कोई खास बातचीत नही होती ,पर दोनो एक दूसरे से कूछ कहना चाहते है। सेमिनार की समाप्ति पर दोनो एक दूसरे से विदा लेते समय एक दूसरे का फोन नंबर एक्चेज करते है । फिर दोनो के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू होता है ।जो फिर एक साल तक चलता है । एक साल बाद फिर कालेज में सेमिनार होता है । दोनो मिलते है उन दोनो के बीच सेमिनार की कोई बात चीत नही होती ।दोनो एक दूसरे से अपने निजी विचार और भावना की बाते साझा करते है । दोनो को एक दूसरे के साथ समय गुज़ारना अच्छा लगता है । दोनो इस बात पर सहमत हो जाते है कि दोनो को ता जिन्दगी साथ रहना चाहिये। पर दोनो की पढाई का अंतिम साल है । एक साल उनको रुकना ही पडेगा । दोनो रुके एक साल नही दो साल दोनो को रूकना पडा । तब नायक को कालेज में नौकरी मिल गई दोनो ने शादी कर ली पर शादी के छः महीने बाद नायिका की भी नौकरी लग गई । दोनो अपने अपने काम पर लग गये । वो दोनो पन्द्रह दिनो में एक बार मिलते है। फिर अपने अपने काम पर वापस चले जाते है । दोनो के बीच विश्वास का रिश्ता है । तुम से यह प्रश्न है कि क्यो दोनो के बीच एक दूसरे के लिए इतना विश्वास है ? अ यह सुन समझ गया की प्रश्न क्यो किया जा रहा है । तभी जीत बोला बेटा इसे कहते है मैम का स्टाइल। मैम जो कहना चाहती है वह अंत मे तेरे मुहं कहलवाना चाहती है । अ कुछ सोचते हुए बोला मैम जो संबध समय के साथ डिवलेप होता है । उसकी बुनियाद बहुत मजबुत बन जाती है । जैसे की इस कहानी के कैरेक्टर की है । यह सुन मैम कुछ बोली नही बस मुस्कुरा दी । अ मैम की मुस्कुराहट के पीछे छुपे अर्थ को समझ गया था । उसके मन में यह विचार एक बार बिजली की तरह चमका कि सच्ची चाहत की बुनियाद को हम भी आजमायेगे मैम । आनंद क्या सोचने लगे? आनंद कुछ नही बोला मैम के तरफ देख कर मुस्कुरा दिया। मैम भी मुस्कुरा दी । दो पल कि खामोशी कमरे में छाई रही फिर आनंद बोला मैम मै जाना चाहता हूं । ओ के जाओ ,,कल आ सकते हो ,? कितने बजे मैम? सुबह छः बजे । मै उस ताल पर जाना चाहती हूं तुम्हारे साथ ,,ले चलोगे मुझे । हां मैम मै आ जाऊंगा । अ कमरे से बाहर निकल गया मैम बरामदे तक आई। अ गेट खोल कर एक बार मैम के तरफ देखाता है और फिर अपनी साईकिल ले कर चल दिया । एक सन्नाटा उसके साथ चलने लगा था ।
आज इतना ही
आप सभी मित्रो का आभार
रवि कांत मिश्र। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤

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