सफर अभी बाकी
सूरज अभी अभी उगा था। ताल का पानी सिंदूरी दिखाई दे रहा था । हवा में थोडी ढंडक थी जो धीरे धीरे बह रही थी । मैम के साथ उसके बगल में अ बैठा ताल के पानी से संदूरी रंग को खेलते देख रहा था । कुछ ऐसा ही उसके मानसरोवर में चल रहा था । उसका चांद उसके पास था और उसकी चांदनी उसके मन के झील में गहरे बैठ गई थी । अब झील के पानी से चांदनी को अलग करना संमभ नही था ।अ बारह जो देख रहा था वह उसके भीतर की तस्वीर थी । यह दोनो उसी काला गोलाकार पत्थर पर पैर लटकाये बैठे थे । जिसके रूह में इन तीनो की यादे धड़क रही थी। ।मैम आकाश में उडते पंछियो के झुंड देख रही थी जो दूर तक आकाश में उडते चले जा रहे थे । तो कभी ताल के किनारे बगुले के झुंड को देखती जो सुबह सूबह टहल रहे थे । दोनो मौन थे ,बाहर से चुप पर दोनो के मन के किनारे विचार लहर बन कर टकरा रही थी । प्रतिक्रियाओ का तुफान चल रहा था । अ रात भर इस विचार को जीता रहा कि वह अपनी सच्ची भावना पर यकिन करे या मैम की कहानी पर ?इधर मैम के मन में यह विचार चलता रहा कि कहीं मैम की कहानी से अ की भावना को ठेस तो नही पहुंची । इसमे उसका कोई दोष नही कि वह अपने उम्र से बडी एक ऐसी औरत से प्रेम करता है जो उसकी क्लास टीचर है ।पर जिससे समाज को ,पुरी व्यवस्था को समस्या है । संभल कर मुझे चलना होगा । एक तरफ मुझे इसको संभालना भी है दूसरी तरफ इसे यह जताना भी है कि मै वो नही हूं जो तुम मुझे समझ रहे हो । मैम अ के तरफ देखी जो ताल के तरफ देख रहा था । अ के चेहरे पर रात की परछाई अब भी साफ दिखाई दे रही है । देखो आज पहले की तुलना में कितना चुपचाप है । शायद इसे कही मेरी कहानी चुभी है । मैं क्या करू ? इस पगले आशिक को कैसे समझाए ? असमंजस में घिरती जा रही हूं । ऑपरेशन भी करना है और वो भी बिना बेहोश किये । अचानक दो बगुले ताल के किनारे टहलते,, टहलते आपस में एक दूसरे के करीब आ गये दोनो एक दूसरे को करीब से देखने लगे । मीठी आवाज निकालने लगे । इस बात ने मैम और अ का ध्यान बगुले के तरफ खीचा । दो पल दोनो बगुले को देखते रहे । फिर दोनो ने बारी बारी से चोरी से एक दूसरे को देखा और नज़रे फेर ली ।। आ बगुले से अपनी नज़र हटा कर ताल में डोलते कमल के फूल को देखने लगा। मैम ने भी ऐसा ही किया । अ का मन हुआ कि वह एकबार फिर ताल के पानी में जा कर कमल फुल ले आये वह अपनी जगह से उठा,अपने पांव जमीन पर रखे ही थे कि मैम ने झट उसका हाथ पकड लिया और बोली नही आनंद मुझे कमल के फुल नही चाहिये। पहली बार मैम ने इतने अधिकार से हाथ पकडा था ,,अ तो भीतर से ठहर सा गया था । जैसे उसके लिए सारी कायनात ठहर सी गई थी। वह एकटक मूर्ति की तरह मैम के तरफ देखता रह गया । उनकी ऑखों में चिंता के भाव के साथ अपने पन से अधिकार जताने का भाव भी था । अ उनकी ऑखो में खो सा गया था तभी मैम ने कहा नही आनंद रूक जाओ ,अ को हल्का सा झटका लगा । इसके साथ ही उसका ध्यान अपनी कलाई पर गया । जहां अब भी मैम की गोरी हथेली जमी हुई थी । मैम ने अब भी जोर से उसकी कलाई पकडी हुई थी ।मैम को अचानक एहसास हुआ कि उसने अनजाने में ही अ को छु लिया है ,,पकड लिया है। वो धीरे से अपनी हथेली अ के रिस्ट से अलग करती हुई बोली आनंद वो पानी बहुत ठंडा है और तुम्हे स्नोफेलिया है । यह सुन अ चौक गया ।उसकी ऑखों ने सावाल किया कि मैम को मेरी यह व्यक्तिगत बाते कैसे मालुम हुई । मैम उसके चेहरे पर उभर आये भाव को पढते हुए बोली कुछ बाते मालुम हो जाती है । मुझे भी मालुम होगई ।। पर कैसे मैम ,अ ने मन में सवाल किया? बदले में मैम मुस्कुरा बोली उस दिन तुम्हे जब ब्रिद करते हुए देखा ।तभी समझ गई थी। तुम्हे ठंडे पानी में जाने की जरूरत नही। मुझे कमल के फुल आज नही चाहिये ।बस तुम बैठो मेरे पास । इतना बोल मैम फिर ताल के तरफ देखने लगी । मैम को अपने इस व्यवाहार पर थोडा आश्चर्य हो रहा था कि उसने अचानक अ का हाथ क्यो पकड लिया ।वो कौन सी भावना थी जो उससे बिना पुछे उसके भीतर सांसे लेने लगी थी । उससे बिना पुछे उसके मन में एक आकार ले लिया था। जिसकी जानकारी उसे भी अभी अभी हुई है । अपने मन की सरहद पर पहली बार इस भावना के चोट को सुचित्रा ने अनुभव किया था । इतना सोफ्ट वह कैसे होगई ? ,, पर इस सवाल का जवाब मैम के पास नही था। उधर अ अब भी अपनी कलाई पर मैम की हथेली को महसुस कर रहा था । उस हथेली से निकली ऊर्जा को अपने पुरे शरीर में दौडता हुआ महसुस कर रहा था । ऊजा अब शरीर से निकल कर उस काले पत्थर के कणो में दौडने लगी थी । उसके भीतर की मैम उसके भीतर जाग गई थी ।वह उसके कानो में बोली यह मै ही हूं , यह जो
तुम्हारे बगल में बैठी है वह मेरी हमशक्ल है । आज पहली बार मैने खुद को उसमे और उसे खुद में देखा है । अ यह मै हूं जो इसके भीतर आज अपनी पंख फैला दी है । यह सुन अ ने अपनी ऑखे बंद कर ली और बोला यह जीवन तरंग मेरे भीतर से निकल कर दूर तक फैल जाये ,चारो दिशा में फैल जाये । एक धुन्ध बन कर मेरी जिन्दगी के आकाश पर छा जाये । मेरा साया बन कर मेरे साथ साथ चले । आज पहली बार ऐसा हुआ कि मेरे मन के ताल में एक नन्हा सा कमल अपने पंख पसार दिये है । थैंक्स मैम, अनजाने में ही सही पर आपने मेरे भीतर उस तार को को छु लिया जो गीत गाना चाहता है । आनंद ,,आनंद,,,मैम जोर से दूसरी बार बोली तब आनंद चौंका और हडबडाते हुए बोला जी जी मैम ,,,,। देखो वह हंसो का झुंड ताल में तैरना शुरू कर दिया है । अ ने देखा की बहुत सारे सफेद हंस ताल के पानी में मस्ती से तैर रहे थे । मैम बोली यह हंस अचानक कहां से आ गये ? मैम लगता है इस जगह पर आदिवासी लौट आये है । क्या यह वही आदिवासी है जो इस जगह को छोड कर चले गये थे । नही मैम यह कोई और होगे । चलो अच्छा है यह जगह फिर से बस रही है ।अ कुछ नही बोला वह काले पत्थर को देखने लगा वह एकटक पत्थर को देख रहा था । मैम ने देखा की अ पत्थर, को देख रहा है। वह पुछी क्या बात है तुम इस पत्थर को इतने गौर से क्यो देख रहे हो ? मैम यह पत्थर मुझ से कुछ कह रहा है।। पत्थर ,,मैम आश्चर्य से बोली पत्थर तुम से कह रहा है और तुम सुन रहे हो ,,क्या तुम पत्थर की भाषा भी समझ लेते हो । हा मैम ,,मुझे अब भी सुनाई पड रही है ,,आप भी सुन सकती है आईये ना हम दोनो साथ साथ सुनते है अ गोला कार पत्थर से नीचे उतर कर अपना कान पत्थर पर लगा कर सुनने लगा । मैम पत्थर से नीचे उतर कर ,अ को देख रही थी जो पत्थर पर बच्चे की तरह कान लगाये अपने दोनो हाथ उसके सीने पर रख उसकी आवाज सुन रहा था । उसकी दोनो बडी बडी ऑखे बंद थी । किसी मासूम बच्चे सा वह दिखाई दे रहा था । मैम उसकी मासूमियत में अपने आप को खोती हुई महसुस करने लगी । उसके मन ने कहा कितना विश्वास के साथ यह पत्थर,की आवाज को सुन रहा है । यह पागलपन है मैम की बुद्धि ने मैम से कहा ,,जिसका जवाब मैम के दिल से आई अगर यह पागलपन है तो यह पागलपन अच्छा है । मुझे भी यह पागलपन करना चाहिये । अरे क्या कर रही हो तुम टीचर हो ,,,कुछ तो अपना ख्याल रखो । मैं भी पत्थर की आवाज सुनुगी,,इतना बोलते हुए मैम अ के बगल मैं बैठ गई और अ की तरह पत्थर के सीने पर हाथ रख दिये अपना सिर उसकी गोद में रख उसकी आवाज सुनने लगी ।सचमुच पत्थल के दिल धडक रहे थे ,उसकी सांसे चल रही थी ,यह धड़कने आपस में गूप्तगू करने लगी । पहली बार मैम मैम ना रही वह पन्द्रह साल पीछे की सुचित्रा हो गई थी । उसके पंख फिर से फड़फड़ने लगे थे ,उसकी दो लंबी चोटियां हवा में लहराने लगी थी । उसके भीतर जो रूकी नदी थी, बर्फ की तरह सख्त वह कतरा कतरा बहने लगी थी । कुछ हुआ था शायद भीतर जो मौसम रुका हुआ था वह बदलने लगा था । बादल बरसना लगे थे वह अपनी नदी की धार में बहती जा रही थी । अ ने अपनी ऑखे खोल मैम को देखा जो उसके बगल मे थी बिलकुल उसके पास ।मैम की केशो की महक उसकी सांसों में उतर कर उसके दिल के ताल में उतरने लगी एक तरंग उसके मन के ताल से उठ कर उसके जिस्म के किनारे को छूने लगे थे । उसने फिर अपनी ऑखे बंद कर ली ।,,दोनो उसी तरह एक दूसरे के पास पास जमीन पर घुटनो के बल बैठे पत्थर, की घडकने सुन रहे थे ।
आज इतना ही ,,
आप सभी मित्रो का आभार ।

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