सफर अभी बाकी है
। शाम हो चुकी थी रात जमीन पर धीरे _धीरे उतर रही थी । दोनो बरामदे में रेलिंग पर अपनी कोहनी रखे खडे थे । अ बाहर लॉन में लगे नीम के पेड़ को देख रहा था । मैम अपनी हथेली की रेखाओं को देख रही थी । उसके मन में भी एक रेखाओं का जाल विछता जा रहा था । जिन्दगी इन रेखाओ से गुजरी थी और ना जाने कहां किस मोड पर ठहर कर पीछे पलट कर देख रही थी ।रेखाओं के जाल को देख मैम को याद आ गई अ के कापी में खीची गई आडी तिरछी रेखाओं का जाल ,जो बिलकुल उसकी हाथ की रेखाओं की तरह ही तो था । मैम अपनी हथेली को देखते हुए पुछी आनंद तुम कापी पर पेन्सिल से आड़ तिरछी रेखाएं क्यो खींचते हो और ऐसा कर तुम्हे कैसा लगता है ? मैम मै अपने इमोशन को व्यक्त कर पाता हूं दिमाग फोकस हो जाता है । और मै रेखाओं की दुनियां में ट्रैवल करने लगता हूं। ऐसा करके अच्छा लगता है। पर आप यह क्यो पूछ रही है ? तुम्हारी रेखाओं को मैने करीब से देखा है । वह बहुत उलझे हुए भी है और दूसरे सिरे से बहुत सुलझा हुए भी है । तुम्हारी रेखा जहां से शुरू होती है फिर वही वापस लौटती है । एक लम्बा चक्कर लगाती है ।जैसे कई घाटी पहाड नदी पगड़ड़ी शहर की तंग गलियो को पार करते फिर वही पहूंच जाती है । जहां से वह चली थी ।
इसका मतलब क्या होता है मैम? देखो मै कुछ यकिन से नही कह सकती पर इतना जरूरू कहना चाहूंगी की तुम जहां से अपनी यात्रा
शुरू करते हो वही तुम रूक हो ,,भले ही तुम हजारो किलो मीटर की यात्रा कर लो, पर तुम्हारी जिन्दगी वही रूकी हुई है । तुम रुके हुए हो अपने भीतर कही ,,आज से कई साल पीछे ,,किसी मोड पर ,किसी के पास ,,साॅरी हो सकता है मैं गलत हो सकती हूं ,मेरा अनुमान गलत हो सकता है ,पर ऐसा मुझे लगता है तो सिर्फ तुम्हारी रेखाओं को देख कर । अ यह सुन एकदम से चुप रह गया। उसके मन के परदे पर आड़ी तिरछी रेखाओं का जाल एक के बाद एक आने लगा और उसके मन को छु कर उसके मन में ही विलीन होने लगा । इसके साथ मन पीछे के तरफ तेजी से भागा । और अ की तस्वीर तेजी से बदलने लगी ,वो जवान से किशोर और किशोर से बच्चा हो गया आठ साल की उम्र मे जा कर रूक गया । तभी मैम बोली आनंद ,,आनंद ,,आवाज उसके युवा मन से टकराया और वह झटके से वापस वर्तमान में लौटा ,,उसकी सांसे तेज चल रही थी । चेहरे पर दुख की लकिरे उभर आई थी । चेहरा थोडा कुमलाह गया था । वह सामने खडी मैम को देखा ,,मैम उसकी हालत देख थोडा परेशान हो गई थी । वह पूछी तुम ठीक तो हो ना , यस मैम मैं ठीक हूं ,,पर जो आपने मेरे बारे में बात की है । उसे अभी अभी मैने एक्वसपिरिस किया ,,सोचता था कि रेखाओं के साथ खेलना महज एक टाईम पास गेम है पर रेखाओं का अपना संकेत भी होता है । यह मैं आज समझ पाया कि रैखाऐ मन की भाषा बोलती है ।मैं कही भी चला जाऊ पर रात विस्तर पर जब सोने जाता हूं तो नींद में जाने से पहले और जागने के बाद वही बाते मन दोहराता है , जिसे आज तक मै लेकर सफर कर रहा हूं , मैम मैं आप से सहमत हूं मै वही रुका हूं जहां आज से दस साल पहले मेरी मां मुझे छोड कर चली गई थी । मेरी उम्र आठ नौ साल की होगी । मुझे लगता है कि मै अब भी वही बैठा हूं अपनी मां की अर्थी के पास,, कि मां अब उठ कर मुझे गले लगा लेगी ,उनका अर्थी पर गहरी नींद मे सोता हुआ चेहरा और उनकी बंद ऑखे मेरे मन के दिवार पर खुद गई है । वह कभी भी ऑखे खोल कर मुझे देख लेगी और मुझे उनकी पूकार सुनाई पड सकती है ।वह आज तलक हो नही सका,और लगता है कभी हो ना सकेगा । इतना बोलते बोलते अ की ऑखे छलक गई थी । उसकी ऑखों में उतर आये खारे पानी को मैम ने अपने भीतर कही बहते हुए महसुस किया ।यह पहली बार मैम के जीवन में घटित हो रहा था। भीतर मन में मैम अ के आंसुओ से भीग रही थी और बाहर वह अ की ऑखों से बहते ऑसूओ को देख रही थी । एक बार फिर उनका हाथ अपने आप उठ गया और अ के गालो पर बहते ऑसुओ के बुंदो को छुने लगा , मैम की ऊगलियां अ के आसु को सोखने लगी । इस बार फिर अ के शरीर में वही ऊर्जा सिर से पैर तक दौड गई ।जो उस दिन उस काले पत्थर पर उसके शरीर में दौड गई थी । उसने मैम के तरफ देखा तो मैम की ऑखे भीग चुकी थी । ना जाने क्या हुआ मैम ने अ का सिर पकड उसके माथे को चूम लिया और बोली आज से चलना शुरू करो समय के साथ, समय से आगे जाओ ,,,मै हमेशा तुम्हारे साथ हूं ,और साथ रहूंगी । यह सुन अ अपने को रोक नही पाया वह मैम के सीने से लग गया । मैम को एक पल के लिए झिझक हुई पर दूसरे पल उसका हाथ अ के सिर पर था। उसके बालों को सहलाने लगी । जैसे कह रही हो कोई बात नही अभी सफर बहुत बाकी है । अभी तुम्हे बहुत चलना है चलो चलते है ।पत्थर की धडकन को सुनते दो जान आज एक दूसरे के धडकन को सुन रहे थे ।अ के ऑखों से खारे पानी बहते जा रहे थे , जैसे बर्षों बाद एक बांध उसके भीतर टूटा था । मैम का कंधा उसके ऑसूओ हे भीग गया था। कुछ पल बाद मैम अ को अपने से अलग करते हुए बोली । तुम मुझ से उम्र में काफी छोटे हो ,पर मैने तुमसे कुछ बाते सीखी है । तुम्हारे पास इस दुनियां को देने के लिए बहुत कुछ है । यह हमेशा याद रखना कि तुम्हारी मां हमेशा तुम्हारे साथ साथ चल रही है । वह उस काल में रूकी नही है ,,तो तुम चलो अपनी मां के साथ । जी मैम मै चलूंगा , जरूरू चलूंगा । अ मैम से और थोडा अलग होते हुए बोला । मैम मुस्कुरा दी और बोली तुम चाहो तो यहां आ कर भी पढ सकते हो। मैं तुम्हारे स्टडी में तुम्हे हेल्प कर सकती हूं । ओ के मैम दिन के वक्त आ जाऊंगा,,। ओके जाओ दादी जी तुम्हारा इंतजार कर रही होगी । अ वहां से निकला और गेट के तरफ बड गया । मैम खडी रही और अ को जाते हुए देखती रही । आज मैम के भीतर जो मैम थी वह चुपचाप सब कुछ देख रही थी कुछ सवाल वह करना चाहती थी । वह कौन थी जिसने फ्रेम से बाहर निकल कर अभी अभी अपनी एक नई तस्वीर बनाई थी । इस तस्वीर के रंगो में किसकी महक थी ? पर मैम अभी अ को जाते हुए देख रही थी । उसने इन सवालो पर ध्यान नही दिया । दूर तक अ को जाते देखती रही स्ट्रीट लाईट की रौशनी मे अ साईकिल चलाते हुए चला जा रहा था । आज वह वो नही था एक नये इंसान का जन्म हुआ था । जिससे आज उसकी मुलाकात हुई थी।
आज इतना ही
आप सभी मित्रो का आभार
रवि कांत मिश्र 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤😊

Apratim bhavna...
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