सफर अभी बाकी है


जीत जैसे ही रेलवे स्टेशन से बाहर निकाल तो उसके सामने वही सडक थी जिस वह बर्षों से जानता था पर आज वह सडक उसे अपरिचित से लगा । उसने नज़र घुमा कर चारो तरफ देखा तो वही सब कुछ था दुकानें  , सडक पर चलते लोग ,लोग की भीड । सडक पार करते स्कूल के बच्चे  ।खोमचे वाले भिखारी ,मंदिर ,मंदिर में बजती घंटियां ,नुक्कड़ पर कुल्हड पर चाय पीते लोग।पर कुछ बदल गया था उसके भीतर कुछ टूट कर उससे अलग हो गया था ।
 उसे एक खालीपन सा लगा जैसे वह अपने ही खाली घर में खडा हो । इस घर का जो खालीपन था  उसे चुभ रहा था । सामने जो उसका शहर था । वह उसे सुना सुना सा लगने लगा । उसके दिल से अ चीखा अबे क्या सोच रहा है मै हूं तेरे साथ । कमीन तु इतना इमोशनल कब से हो गया बे ,,चल साईकिल निकाल मै तेरे साथ साथ चल रहा हूं। यह सुन जीत मुस्कुरा दिया और बोला कमीने तु जा कर भी मेरे भीतर से जा नही सकता । पर यार पहली बार लाईफ में अपना शहर ही अजनबी सा लगा है । वाह बेटा तु तो कलाकार होते जा रहा है । चल साईकिल उठा और मैम तक मेरा मैसज पहूंचा दे ,,अरे हा यार मैं तो भूल रहा था। उस बंद लिफाफे का खोल कर देखना भी है । तु कमीना है चल देख ले अपनी इच्छा पुरी कर ले ।जीत ने अपनी साईकिल उठाई और निकल पडा किसी आवारा बादल की तरह । साईकिल चलाते चलाते उसने अपने बगल में देखा तो अ उसे साईकिल चलाते हुए दिखा । जीत समझ गया यह वह साये है जो कभी मेरा साथ नही छोड़ेंगा।वह तेजी से साईकिल के पैडल पर पैर मारना लगा । साईकिल हवा से बात करने लगी । जीत भूल गया कि वह अकेले है उसे अनुभव हो रहा था कि अ उसके साथ साथ है । उसके बगल में साईकिल चलाते हुए ।
सुचित्रा की ऑखे तब खुली जब दरवाजे पर दस्तक हुई । वह उठ कर दरवाजा खोली तो सामने जीत खडा था । देखते ही बोला गुडमार्निग मैम,, जीत को देख मैम को थोडी हैरानी  हुई पर उसने गुडमार्निग कहा । उनकी ऑखो में प्रश्न उठा तुम यहां ? मैम आनंद ने आपको देने के लिए कहा है । कार्ड वाला लिफाफ आगे बडा दिया । मैम लिफाफे ले कर बोली ओके जीत थैंक्स,,उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई । वह जीत को बोली आओ भीतर आओ बैठो । चाय पी कर जाओ । यस मैम बोलता हुआ जीत कमरे के भीतर मैम के पीछे पीछे आ गया । मैम लिफाफ लेकर अपने कमरे में जाते हुए बोली जीत तुम बैठो मै दस मिनट मैं आती हूं ।तुमसे बहुत सी बाते पूछनी है ।जाना मत । जी मैम मै यही हूं ।इतना बोल मैम अपने कमरे में चली गई । जीत सोफे पर बैठ गया और चारो तरफ देखने लगा सचमुच मैम का लिविंग रूम फोटोग्राफ से सजा हुआ था । मैम की और सर की तस्वीर के साथ नदी पहाड हिरण हाथी सन राईज की तस्वीरें दिवार पर टंगी हुई थी । तभी जीत का ध्यान सामने टेबल पर गया जहां फ्रेम किये दो तस्वीर पलट कर रखी हुई थी । जीत ने एक तस्वीर को उठा कर पल्टा तो देखा कि आनंद मैम को कमल फुल दे रहा हैं ताल के किनारे खडा है और पीछे एक बडा सा कला गोलाकार पत्थर दिखाई दे रहा है । दूसरी तस्वीर मैम की थी जो केक काट रही थी  । जीत समझ गया कि यह केक काटती हुई तस्वीर उसी दिन की है जब अ ने मैम का तकिया चुराया था। और सर ने उसे पकड लिया था पर कुछ बोले नही थे । यह कहानी की शुरू वात तो उसी दिन से हुई थी ।सर ने ही इस कहानी की शुरू वात की थी । सर के जगह कोई और होता तो दूसरी कहानी लिखी जाती । पर सर तो सर है । कमल फुल मैम को दे रहा है कितना शर्मा रहा कुत्ता कही का ,,,पर लग रहा है प्यारा ,,,जीओ मेरी जान,,जिन्दगी को जीने का तरीका कोई तुमसे सीखे । इंसान तो क्या घर पत्थर पहाड रास्ते सभी से  रिश्ता बना लेते हो । अ वाली फोटो को वापस टेबल पर रखने जा रहा था कि मैम आ गई और जीत से बोली क्या तस्वीर देख रहो हो ।जी जी मैम,  देखा ना कल यह तस्वीर उस समय आई जब आनंद जा चुका था । मैने सोचो कि आज उसे यह तस्वीर दिखाऊगी, , पर आज तो बिलकुल नया आज है । जिसकी हमने कभी कल्पना नही थी । यस मैम मुझे भी रात उसका फोन आया था कि वह जा रहा है । कल सुबह उसकी ट्रेन है । तुम अभी कहां से आ रहे हो ? मैम मैं अभी आनंद को सी ऑफ करके आ रहा हूं । वह तो तुम स्टेशन से आ रहे हो । यस मैम ,,दो मिनट में आती हूं,, चाय बन चुकी है ,,इतना बोल मैम किचन के तरफ चली गई उनका कमरा और किचन बिलकुल सटा हुआ था । मैम के जाने के बाद जीत फिर अ की तस्वीर को टेबल से उठा कर देखने लगा । उसे तस्वीर में अ का शर्माना बहुत अच्छा लग रहा था और वह काला  पत्थर जिसकी कहानी अ ने उसे सुनाई थी कूछ इस तरह से सुनाई थी कि वो काला पत्थर,कोई पत्थर नही है वह एक जीता जागता चरित्र  है जिससे उसकी दोस्ती हो गई है और वह दोनो एक दूसरे की भाषा समझते है । मैम चाय ले कर आ गई लो जीत चाय पी लो ,,ट्रे टेबल पर एक तरफ रखते हुए बोली । उसका ध्यान फिर जीत के हाथ पर गया । तस्वीर उसके हाथ में थी ।मैम मुसकुराते हुए बोली क्या बात है तस्वीर बहुत पसंद आ गई या आनंद को मिस कर रहे हो । हा मैम मैं उसे मिस कर रहा हूं बट क्या आप उसे मिस नही कर रही है । यह सुन एक पल के लिए मैम का हाथ कप में चाय डालते हुए कांप गया।वह एक नज़र जीत के तरफ देखी और फिर अपने आप को संभालते हुए बोली । हा  मिस कर रही हूं ,,आखिर इतने दिनो तक तुमलोग मेरी क्लास में रहे । तभी अ बोला अबे यह क्या पूछताछ शुरू कर दी तुमने , , मैम से ज्यादा पर्सनल सवाल करने की जरूरूत नहो है । अबे चुप सवाल मैम ने किया था तब मैने पुछा था । क्या हुआ तुम भी आनंद की तरह चुप हो जाते हो । यस मैम वह बिमारी  मुझे भी है जो आनंद को लगी हुई है । मैम यह अजीब बिमारी है जिसको लग जाती है तो लग जाती है । मैम आपको भी तो यह खुद से बात करने की आदत है । किसने बताया ,,वह आनंद ने बताया होगा । और आनंद ने तुम्हे क्या क्या बताया जीत ,,मैम आनंद और मै दो होकर भी एक है । वह मैं जानती हूं तुमने वो लिफाफ खोल कर देखा ही होगा । यह सुन जीत थोडा घबड़ा गया , एकदम से उसकी चोरी पकड़ गई थी । उसके मुख से निकल गया यस मैम । यह सुन मैम मुस्कुरा दी और बोली तुम दोनो की दोस्ती कमाल की है । थैंक्स मैम । चाय दोनो पी चुके थे । जीत अपनी जगह से खडा होते हुए बोला मैम चलता हूं । ओ के जीत ,,मैम भी अपने स्थान से खडी हो गई । जीत को छोडने दरवाजे तक आई जीत चला गया । मैम फिर वही पहूंच गई जहां वह रात में थी । वह भीतर कमरे में गई और स्कूल के लिए तैयार होने लगी ।  
अपने बर्थ पर बैठा आनंद खिडकी से बाहर पीछे के तरफ भागते खेत पहाड नदी गांव मैदान जंगल को भागते हुए देख रहा था । दरअसल इस वक्त वह यह सोच रहा था कि वह एकदम से  कितना अकेला हो गया।  उसने अपने पापा के
 तरफ देखा जो बर्थ पर सौ रहे थे । दादी ऑख बंद किये माला जप रही थी । अ फिर खिडकी के तरफ देखने लगा । उसके दिल ने कहा वह अपनो के बीच भी कितना अकेला है । और जीत मैम अपने ना होते हुए भी कितने अपने लगते है।कभी उन लोगो के साथ अकेलापन महसुस ही नही हुआ । साला क्या चक्कर है समझ में नही आता । जिसके साथ जिन्दगी गुजारनी है वह अपने होते हुए भी अपने नही लगते और जिनके साथ कुछ कदम जीवन का चलना होता है वह इतने अपने क्यो लगते है ? नही मै छोटी मां के साथ एडजस्ट नही कर पाऊगा  ।पापा सही नही कर रहे है हम लोग साथ साथ नही रह सकते। मैं दादी को लेकर वापस आ जाऊंगा। छोटी मां को देखते ही मुझे तनाव हो जाता है । और वह मुझे इस तरह देखती है जैसे मै उनके लिए एक अनचाहा गेस्ट हूं जो उनके माथे थोप दिया गया है । पापा भी ,,,,,ना क्या जरूरूत थी सभी को एक साथ रखने की पर  यह सुनेंगे नही ,,करेगे वही जो इनको पसंद है । मुझे थोपे हुए विचार पसंद नही है ,,मुझे अपने विचार से जिन्दगी जीना है । बस इग्जाम हो जाये मैं अपने जीवन का रास्ता खुद बनाऊंगा। यह सोचते सोचते उसकी ऑखों में पानी उतर गया । बाहर के दृश्य उसे धुध॔ले दिखाई देने लगे । दो बूंद ऑसू उसकी ऑखों से निकल कर उसके गालो पर दो लकिर खीचते नीचे गिर गये।  अ ने अपने ऑसू अपनी हथेली से पोछ लिया और बोला मुझे अपने रास्ते खुद बनाने होगे । मैं मैम के पास वापस लंटूगा । मेरी जिन्दगी की शुरूवात वही से हुई है । उनके कारण ही हुई । मुझे वापस वही लौटना है ।
आज इतना ही ,,,,,
सभी मित्रो का आभार 
रवि कांत मिश्र 🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🙏🏻❤❤❤❤❤❤❤🙏🏻

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