सफर अभी बाकी है
अ तेज दौड रहा था सामने लोगो की भीड थी जिसके बीच रास्ता बनाता हुआ अ तेजी से दौडते हुए आगे निकल रहा था । उसके साथ उसके पीछे बहुत से लोग दौड रहे । अ सभी को पीछे छोड़ते हुए आगे बड गया । एक समय ऐसा भी आया की अ अकेले दौड रहा था उसके साथ और उसके आगे दौडने वाले लोग बहुत पीछे छूट गये थे इतने पीछे की दूर तक दिखाई नही दे रहे थे । अ दौडते हुए एक मैदान में पहूंचा जहां बीच मैदान में एक सुखा लंबा पेड था जिसके उपर तीन शाखाएं निकली हुई थी। अ तेजी से पेड पर चढ़ना शुरू किया और कुछ ही पलों में अ वो
तीन शाखाओं के नीचे पहूंचा की वह पेड एक घोडा बन गया और एक खंम्बा उसके हाथ में आ गया अब अ घोड़े पर दौडने लगा। घोडा बहुत मजबुत और समझदार बिना लगाम के अ को लेकर दौडने लगा। तभी एक आदमी बोला ठहरो मैं झड़ा ला कर देते हूं वह आदमी झंड़ा लेने चला गया । तभी एक कुत्ता ब्राउन रंग का जाने कहां से आया और घोड़े के उपर बैठे अ के सीने पर प्यार से चढ़ते हुए उसका मुहं चाटने लगा । ऐसा कुते ने दो बार किया । और नीचे उतर गया इस बीच कोई लगातार अ की तस्वीर लेता रहा । अंतिम बार जब कुत्ता अ का मुहं चाट कर नीचे उतरा तो अ कि नींद खुल गई । उसने समय देखा तो रात के तीन बज कर बीस मिनट हुए थे। अ को भीतर से खुशी होने लगी कि वह सपने में भी अपना टारगेट पुरा किया। वह उठ कर खिडकी के पास बैठ गया और सोचने लगा कि इस सपने का क्या मतलब है ? खैर जो भी मतलब है मेरे दिन बदलने वाले है । सुबह सुबह का सपना वह भी जीतने का सपना। एक पाजेटिव फिलिंग अ को होने लगी। उसका कॉफिडेस बुसट हो गया । रात गुजर रही थी अ के भीतर मन में भोर हो चुकी थी।सोचने लगा कि मैम इस समय क्या कर रही होगी ? जरूरू गहरी नींद में सोई होगी । मैम और सर दोनो सोये थे । एक ही विस्तर पर एक दूसरे के तरफ मुहं फेरे । दोनो के कपडे विस्तर के नीचे गिरे हुए थे । दोनो लिहाफ में थे एक दूसरे से बेखबर। तभी मैम की नीद॔ खुल गई चौक कर जाग गई उसे लगा जैसे अ ने उसके कंधे को छुआ और जागने की कोशिश कि ,,पर आनंद तो कही दिखाई नही दिया वह कमरे में चारो ओर चौंक कर देखी । आनंद कही नही था ,,अरे आनंद कैसे हो सकता है ?वह तो असम में है । पर मुझे ऐसा ही लगा कि आनंद आ कर मुझे छूआ और जागने की कोशिश की ,,,,तभी फोन की घंटी बजी । प्रो सहाब करवट बदल कर बोले सुचित्रा देखो ना कौन है ,? इतनी रात गये । सुचित्रा अपने को पास रखी चादर मैं कवर करते हुए उठी और लगातार बजते फोन के पास गई और फोन रिसीव किया दूसरी तरफ आनंद था । साॅरी मैम इतनी सुबह सुबह आपको डिस्टर्ब किया गुड मार्निग , मैम का चेहरे खिल गया अरे अभी तो उसके छुअन को याद कर रही थी और उसका फोन आ गया इसे क्या समझु इतफाक या टेलीपैथी, गुड मांर्निग आनंद ,,तुम कैसे हो ?मैम मैं ठीक हूं , मैम सोफे पर आराम से बैठ गई । पैर समाने फैला लिया । इतनी सुबह फोन किया । मैम वह एक सपना मैने देखा वही आपको बताना चाहता हूं । हां बोलो ना क्या सपना देखे। अ मैम को सपना सुनाने लगा। मैम सुनती गई । सपना सुनाने कि बात जब खत्म हुई तो मैम बोली बहुत उंचाई को छुओगे,,सब कुछ होगा तुम्हारे पास नाम ,पैसा ,रुतबा और तुम्हे चाहने वाले लोग । मैम आप जब से मिली है मेरी जिन्दगी बदलती जा रही है । मेरी हालत उस पतंग की तरह थी जिसकी बागडोर एक अकेले बच्चे के हाथ में थी पर अब लगता है कि बागडोर एक समझदार कुशल हाथ में है । असम की हवा में तो जरूरू कोई बात है कि तुम वहां जा कर पहले से भी अच्छी बाते करने लगे हो । वैरी गुड ,,कीप इट अप ,,सुचित्रा किससे बाते कर रही हो । आनंद का फोन है असम।से , क्या सर आये है ? कल शाम को आये है और तुम्हारे लिए एक किताब भी लाये है किताब का नाम है। माई टीन ऐज । मैम सर को मेरे तरफ से थैंक्स बोल दिजियेगा। मै जब आऊंगा तो उनसे किताब ले कर जरूरू पढुंगा । ओ के आनंद अपना ध्यान रखना। जी मैम ,,इतना बोल फोन आनंद के तरफ से कट हो गया। मैम रिसीवर कान से लगाये बैठी रह गई । क्या हुआ सर का नाम सुनते ही आनंद का सुर बदल गया। शायद वो मुझे और अधिक ड्स्ट्रब नही करना चाहता हो । पर यह अजीब इतफाक है फोन आने से पहले उसका मुझे छु कर जागना और फिर उसका फोन आना । प्रो सहाब कमरे से बोले सुचित्रा अब जाग गई हो तो दो कप चाय बना लो । तीस मिनट लगेगे मैं फ्रैश होने जा रही हूं। इतना बोल सुचित्रा सोफे से उठी अपने को चादर में ठीक से कवर किया और वाशरूम के तरफ चली गई । उसके दिमाग में आनंद का छुना और आनंद का फोन आना दोनो बाते चल रही थी । यह क्या है ? महज एक इतफाक या कुछ है जो हमारी बुद्धि की सीमा से दूर ,,कही मन के आकाश में कुछ होता है और मन के तरंग एक दूसरे के पास आ जाते है बिना तार के और एक दूसरे के दिलो में समा जाते है । सुचित्रा इसी अधेडबुन के साथ वाशरूम गई और वाशरूम से बाहर निकल गई । तो देखा कि प्रो सहाब सोफे पर ऑख बंद किये बैठे थे । सुचित्रा किचन के तरफ चली गई कुछ समय बाद दो कप चाय ट्रे में लेकर मानस के पास उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गई । मानस की ऑखे खुल गई सामने देखा तो चाय के कप से गरम गरम भाप निकल रही थी । प्रो सहाब चाय का कप हाथ में लेते हुए बोले थैंक्स सुचित्रा,, चाय की चुस्की ली और फिर बोले वाह वही टेस्ट जो मुझे सिर्फ तुम्हारी चाय में मिलती है । जिस अदा से तुमने मेरे चाय की तरीफ की है उसके लिए थैंक्स । हा तो क्या बोल रहा था आनंद ? सुबह उसने एक सपना देखा और सपने का मतलब पूछने के लिए तुरंत फोन कर दिया । मै सपने के बारे में नही पूछूंगा पर तुम बताओ पहले से उसके विहेव में चेंज आया है कि नही । हां चेंज आया है बहुत पाजेटिव चेंज आया है। देखा मेरा यह प्रयोग सफल रहा । अगर उस दिन मैं उसे पनिश करवाता या इंसल्ट करता तो आज आनंद कूछ और ही होता। may be एक विचलित सोल ,, इसका मतलब है कि इस तरह के केस में साईको पेथ ही इमपोर्टेट होता है । उसे इडिपस कॉम्पलेक्स है ,,जो हर पुरूष में होता है ।अगर उसे अपनी माॅ का प्यार अधूरा मिला हो तो वह अपने से अधिक उम्र की महिला के प्रति लगाव का अनुभव करता है । जो आनंद के साथ हो रहा है । उसे समझना होगा ,,उसकी इस भावना को तब शांति मिलेगी जब वह किसी हम उम्र लडकी के तरफ आकर्षित होगा तब उसकी भावना संतुष्ट होगी । पर तब तक उसे संभालने की जरूरूत है । सुचित्रा तुमने बहुत अच्छा काम किया है । आनंद कि जिन्दगी को विकसित करने में तुम्हारा इमपोर्टेट कंट्रिब्यूशन है । आई एमप्रेस। तुम उसे अपना इमोशनल सपोर्ट देते रहना। इतना बोल मानस चुप हो गया चाय की चुस्की ली और सुचित्रा के तरफ देखा जो कहीं खोई चाय पी रही थी । प्रो सहाब गौर से उसकी तरफ देखते हुए बोले , क्या हुआ तुम इतना सीरियस क्यो हो गई ।माई डियर प्ले एज लाईक ए गेम । मानस आनंद कोई खिलौना नही है और मैं कोई खेलने वाली खिलाडी नही हूं ,,मै इस गेम को अब नही खेल सकती । मानस यह सुन हंसने लगे और हंसते हंसते बोले तुम उसे सिर्फ इमोशनल सपोर्ट करो बस बाकी सब छोड दो । मानस मैं इमोशनल सपोर्ट करते हुए खुद इमोशनल हो गई हूं। मैं उसके साथ अटैच हो गई हूं । यह सुन मानस तुरंत बोले ऐसा होता है मै जानता हूं । इसमे डरने की बात नही है । समझने की बात है यह याद रखने की बात है कि तुम
उसकी क्लास टीचर हो और तुम्हे उसका क्लास टीचर ही रहना है । वह जो तुम्हारे बारे में समझता है उसे समझने दो ,,बस ध्यान देना की उसकी समझ को कोई ठेस ना लगे नही तो वह तुमसे डिटैच हो जायेगा। मानस प्लीज इसे यही रोक दो ,,देखो वह अब दूर चला गया है अब एक बार वह आयेगा एग्जाम देने के लिए ,फिर वह कहां जायेगा किसे पता ? नही सुचित्रा अभी हम ऐसा कुछ भी नही करेगे । आनंद को जिस दिन यह समझ में आ जायेगा कि तुम उसकी मंजिल नही हो वह खुद अपना नया रास्ता बना कर निकल जायेगा। अगर तब तक मै उसके साथ अटैच हो गई तब , तुम ऐसा कैसे सोच सकती हो तुम उसकी टीचर हो ? मानस तुम भूल रहे हो कि मैं एक नारी भी हूं । मेरी भी भावना है ,मुझे भी दुख सुख लगाव ,विरह का अनुभव होता है । मानस मै आनंद को इमोशनल सपोर्ट करते करते खुद इमोशनली अटैच हो चुकी हूं । मानस यह सुन एक पल के लिए चुप रहा फिर बोला इसका मतलब है कि हमारे संबध में कही कोई कमी रह गई जिसे हम दोनो समझ नही पाये ,नही तो ऐसा नही होता । हां कमी रह गई है हम दोनो अपने संबध को ले कर कही रूक गये है । हम यह मान लिये है कि हमारा संबध इस संसार में अमर हो गया है, हम मरते दम तक एक दूसरे के साथ रहेंग,पति पत्नी बन कर रहेगे। चाहे लाख मतभेद हमारे बीच क्यो ना हो जाये । मैं अब ऐसा नही मानती आनंद से मिलने के बाद परिवर्तन सिर्फ आनंद में नही आया मेरी भावना का विस्तार हुआ । एक परिवर्तन यह भी मेरे भीतर आया कि मेरी जिन्दगी जो नपी तुली मेकअप के फ्रेम में कैद थी वह उसने आजादी का स्वाद चखा ,,थोडा पागल होकर पत्थर के धडकनो को सुनने की कोशिश की । जिन्दगी ऐसे भी जी जा सकती है यह आनंद के साथ मुझे जीने को मिला । मानस अब बोलो क्या करू मैं ?वापस उसी नपी तुली फ्रेम की हुई जिन्दगी में आ जाऊं या इस नई जिन्दगी के साथ आगे निकल जाऊं? आनंद का साथ मुझे मिले या ना मिले,, पर मैं इस रूटिन वाली जिन्दगी से अलग जीना चाहती हूं । अब वापस आना मेरे लिए आत्महत्या जैसा होगा । मानस यह सुन मुस्कुरा दिया फिर बोला तुम्हे याद होगा सुचित्रा ताल के किनारे उस गोलाकार पत्थर के उपर हम बैठे बाते कर रहे थे तभी तुमने कहा था कि तुम इतना विश्वास कहां से लाते हो ? तो सुनो मेरा विश्वास आज भी तुम पर उतना ही है । मैं यह खेल खेलने से पहले यह जानता था की इसमे ऐसी बाते हो सकती है। तुम सही हो अपनी जगह और तुम जैसा चाहती हो जिन्दगी वैसा ही जीओ । हम पति पत्नी से पहले मानव है । जोर-जबरदस्ती से किसी के शरीर को कैद किया जा सकता है ,,पर मन को कैद नही किया जा सकता । मैं तुम्हारे साथ हूं । सुचित्रा चुपचाप सब सुन रही थी । मानस अपने स्थान से उठा और वाशरूम के तरफ चला गया । सुचित्रा की समझ में कुछ नही आ रहा था ,,पर एक बात बार बार उसे याद आ रही थी कि आनंद के साथ ताल के किनारे उस पत्थर के धडकनो को सुनने की कोशिश, ,,आज वह अपने जिन्दगी के थडकने सुनने की कोशिश कर रही थी ,,
आज इतना ही
आप सभी दोस्तो का आभार
रवि कांत मिश्र 🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤

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