सफर अभी बाकी है

 सुचित्रा बाहर बरामदे में निकल कर  खडी हो गई। कुछ पल बीतेे तो उसे लगा कि आनंंद उसके बगल मेें खडा है । वह झटके से पलट कर देेेेखी तो वहां कोई नही था। पर उसके वहां होने  का एहसास मैैम को हो रहा था । उसके अस्तित्व की जो  महक है उसे लगातार मैैैम अपने भीतर महसुस कर रही थी । यह एहसास 
कितना सहज सरल है। उस जीवन को फिर से जीने के लिए मन व्याकुल हो रहा है । आनंद तुम्हारे साथ बिताये पल जीवन ऊर्जा से भरपुर थे। सच्चे असली पल थे । जिसे आज भी याद कर मन  जीवन ऊर्जा से भर जाता है । उन पलों से एक रिश्ता सा बन गया है।  जिसे किसी नाम की जरूरूत नही है । वह बिना नाम के ही अच्छे ,,उस दिन मेरे कंधे उसके आंसुओ से भीग गये थे । मानो वो आंसू नही संवेदनाओ का सैलाब हो । कितना कुछ उसके भीतर दबा पड़ा था । क्या कोई डाॅक्टर किसी मनुष्य को बाहर से देख कर यह  बता सकता है कि इसके दिल में क्या छुपा है ? कितना रहस्मय है सब कुछ ,,  इस रहस्य का ना कोई अंत है और ना कोई इसकी शुरूवात है ? जिन्दगी क्या है ? यह  सवाल अगर सवाल है तो इसका क्या कोई जवाब भी हो सकता है । हा जवाब हो सकता है और नही भी हो सकता है । नदी ,पहाड ,सूरज ,चाँद  हवा ,पशु ,पंछी बादल ,जंगल क्या जिन्दगी की परिभाषा खोजते है या जानते है, ,,, नही बस वह जिन्दगी के साथ सफर करते है । मानस मानव मन की बाते करते है पर मानव में नारी मन को समझना खुद मेरे लिए भी संभव नहीं है । आज जिन्दगी जिस मोड पर खडी है वहां एक तरफ  मानव का विश्वास है दूसरी तरफ आनंद का एहसास ,जैसे पत्तों पर रात भर गिरी ओस की बूंदे । जो पत्तों कै जिस्म में घुल गई है ,उतर गई है उसके रोम रोम में , उसके नसो में बहने लगी।क्या मानव इस एहसास को समझ सकते है ? क्या एक नारी बन कर महसुस कर सकते है ? रात तुमने जिस जिस्म को छुआ था । जिसे अपनी बाॅहो में लिया था ,चुमते रहे उतेजना के पलों में ,,पुरी तरह खुद को समाते रहे मेरे जिस्म में ,,,पर जिस्म के भीतर जो नारी रहती है तुम्हारा  स्पर्श वहां तक क्यो नही पहूंचता है ? जिस्म पर ही हर बार ठहर जाता है तुम्हारा स्पर्श ।  जब कि हजारों किलो मीटर दूर वह  मुझ से है । फोन आने से पहले मुझे उसके स्पर्श का एहसास नींद में हुआ , और मेरी सोई आत्मा जाग गई । यह स्पर्श क्या था ? बिना जिस्म के स्पर्श का एहसास । जो मेरी आत्मा में समा गया । मानव जो मैं तुम्हारे बारे में अनुभव कर रही हूं , हो सकता वही तुम मेरे बारे में अनुभव करते होगे । मैं दोष नही दे रही हूं ।अगर यह हम दोनो का सच है तो यह सच कितना अधूरा है । मानस तैयार हो कर अपना बैग लिए बरामदे में आये और बोले अरे तुम तैयार नही हुई ,,क्या तुम सी ऑफ करने नही चलोगी ? मुझे देर होगी क्या तुम कुछ देर रूक सकते हो । हां रूक सकता हूं सात बजे की बस छुट जायेगी कोई बात नही नौ बजे की बस लेनी होगी । चलो तुम रेडी हो जाओ ।मैं तब तक कुछ नाश्ता तैयार करता हूं । आओ भीतर चलते है ।मानस सुचित्रा के कंधे पर हाथ रख बडे प्यार से कमरे के भीतरी  ले गया ।सुचित्रा किसी यंत्र की तरह मानस के साथ कमरे के भीतर चली गई ।
जीत असम के कंटोमेंट एरिया में रह रहा था ।चार बडे कमरो का घर किचन और सरवेंट काॅवटर अलग से । घर के सामने बडा सा गार्डन था जिसमे आम और नीम के पेड़ लगे हुए थे । अ नीम के पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठा था । वह नीम के पेड को देख कर यह सोच रहा था कि एक दिन वो नीम का पेड़ भी इतना बड़ा हो जायेगा। फिर उसकी छाया में खडे होने पर कितनी खुशी होगी । मैम मेरा और जीत का पेड। एक नाम उस पेड का जरूरू होना चाहिये।क्या नाम रख सकते है ? दोस्ती हा दोस्ती ठीक रहेगी । तभी अ की छोटी मां घर से निकल कर उसके तरफ आने लगी । उनके पैरो में जो पायल थी उसकी आवाज धीरे धीरे अ के करीब आने लगी और एक समय ऐसा आया जब पायल की आवाज उसके पास आ कर  रूक गई । उसके बगल की कुर्सी खाली थी । छोटी मां ने पुछा आनंद क्या मैं तुम्हारे पास थोडी देर के लिए बैठ सकती हूं । जी मैडम आप बैठ सकती है । अ के मुहं से अपने लिए मैडम सुनना वर्षा जी को अच्छा नही लगा । वह कुछ ना बोलते हुए अ के सामने बैठ गई । अ दूसरी तरफ मुहं फेर कर देखने लगा।  यह देख वर्षा बोली आनंद मै तुम्हारी मां हूं ,,मुझे इतना सम्मान तो दे दो । आज दस साल हो गये तुमने मुझे उस बात के लिए माफ नही किया। वह एक घटना थी जिसमे मेरी गलती थी पर मैने गलती जानबुझ कर नही थी । वह ना समझी वाली गलती थी । आनंद क्या तुम उस गलती को भूल नही सकते हो । मैं भूल जाता हूं तब तक , जब तक आपकी याद नही आती । पर जब याद आती है तो सब कुछ याद आ जाता है।कैसे आपने कार को लाॅक कर एक आठ साल के बच्चे को कैद कर दिया था । मेरी गलती थी की मै कार में सो गया था ।  मेरा दम घुटने लगा था दरवाजा खोलने चहा तो दरवाजा नही खुला मै चीखने लगा था मेरी आवाज बाहर नही जा रही थी ,,आप कुछ दूरी पर अपने सहेलियों के साथ हंस हंस कर बाते करने में यह भूल गई थी की एक आठ साल का लड़का कार में जिन्दगी और मौत के बीच झुझ  रहा है । तभी वह अर्दली कार के पास से गुजरा और उसने मुझे चीखते हुए हाथ से कार का शीशा पीटते हुए देख लिया और उसने कार का सीसा तोड कर मुझे बाहर निकल लिया ,पर तब तक मैं बेहोश हो चुका था। मिलिट्री हास्पीटल में मुझे होश आया तो पापा दादी और आप खडी थी । मैने आपको देख कर ऑखे बंद कर ली थी । उस शाम जो मेरी ऑखे आपके लिए बंद हुई थी ।वह आज तक खुल नही पाई। जब भी कोशिश करता हूं आपका वो हंसता हुआ चेहरा और अपना वह दर्द से चीखता चेहरा याद आने लगता है । मैंने कार के बैक मिरर में अपना डरा हुआ चेहरा देखा था। वो  बहुत ही भयानक अनुभव था। आज फिर आपने याद दिला दी । आई एम सारी आनंद मुझे माफ कर दो । मै चाह कर भी आपको माफ नही कर पा रहा हूं । मैं आपको माफ नही कर पा रहा हूं । मैडम दरअसल मैं यहां आना ही नही चाहता था पर पापा के सामने ना नही बोल सका । सच पुछे तो मैं यहां कैदी कि तरह अनुभव करता हूं और आपसे डर लगता है कि कहीं मौका मिलते ही आप मुझे मार तो नही देगी । जैसा आपने पहले एक बार मुझे मारने की कोशिश की थी । आनंद ,,,वर्षा जोर से चीखी,,,यह मत कहो ,,,मै भला तुम्हे क्यो मारूगी । वो एक हादसा था जो बीत गया।  प्लीज उस हादसे को वही दस साल पीछे छोड दो । मैडम जिस बच्चे का विश्वास बचपन में टूट जाये।  उसे वह बडा हो कर कैसे जोड़ सकता है ? क्या आपके पास है कोई तरीका ? तो मुझे बताये ? मैं उस टूटे हुए विश्वास को फिर से जोड़ने की कोशिश करूगा। इतना बोल कर अ छोटी मां  के तरफ एक बार देखा फिर उपर नीम के पेड़ की  डाल को देखने लगा। मेरे पास ऐसा कोई तरीका नही है आनंद । क्या मुझे यह समझ लेना चाहिये कि तुम मुझे हमेशा मुझे मैडम ही कह कर पुकारोगे। आनंद इस बात पर कुछ नही बोला नीम के पेड़ को देखता रहा फिर उसकी ऑखों भीग गई । वह तेजी से वहां से निकल कर घर के तरफ चला गया। छोटी मां उसे जाते हुए देखती रही । उसकी ऑखों में एक सुनापन था । 
सुचित्रा मानस को सी ऑफ कर स्कूल चली गई थी ।  शाम जब घर वापस लौटी तो उसे अपना घर सुना सुना सा लगने लगा।  वह कुछ देर चुपचाप सोफे पर बैठी अपने आपको शिथिल करने की कोशिश  करती रही । शरीर शिथिल होना चाहता था पर मन शिथिल होना नही चाहता था । एक भंवर सा बन गया था उसके भीतर जिसमे वह अपने आपको डूबते उभरते हुए देख रही थी । मुझे किसी से बात करनी चाहिये । अपनी सहेली मीठी से बात करनी चाहिये ,,,पर क्या बात करनी है । मै क्या बात करू ?क्या वह समझ पायेगी । नही,,, नही ,  फ्रेम की हुई बाते वह कहना चाहेगी । आनंद को फोन करती हूं । पर उसका फोन तो आया था क्या बात करूंगी उससे । छोडो मुझे किसी से बात नही करनी है । मुझे कुछ देर के लिए सब कूछ भूलना है गहरी नींद की जरूरूत है मुझे । सौ कर जब जाग जाऊंगी तब  सोचूगी। 
आज इतना ही 
सभी मित्रो का आभार
रवि कांत मिश्र 🙏🏻🙏🏻🙏🏻❤❤❤ 
मनोहर जोशी जी का धन्यवाद आपने आज के एपीसोड के लिए स्केच अपने हाथो से करके भेजा । आपका आभार ❤❤🙏🏻🙏🏻


 

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