सफर अभी बाकी है ,,,,
डिम्पल बहुत देर से आनंद को देख रही थी आनंद उसके साथ होते हुए भी साथ नही है । आखिर उससे ना रहा गया । वह आनंद के तरफ देखी जो डैम के रेलिंग पर खडा दूर तक फैले झील के पानी को देख रहा था । उसे यह भी एहसास नही था कि वह पीछे तीन घंटे से डिम्पल के साथ था और इन तीन घंटो में उसने बहुत कम बात कि थी । आखिर यह क्या चक्कर है ? यह और लडको जैसा क्यो नही है? जो कोना देखते ही लडकी के सामने अपनी इच्छा जताने लगते है । एक यह है कि लडकी सामने है और यह ध्यान से एक नज़र देखता भी नही । आनंद ,,आनंद ,,अ हा यस डिम्पल ,,,आनंद एकदम से चौंक गया ,,थोडा परेशान भी हो गया। डिम्पल आनंद के कंधे पर हाथ रखते हुए पुछी तुम्हारी तबयत तो ठीक है ना ,,या आई एम फाइन,,नही आनंद कुछ तो है तुम मुझसे छुपा रहे हो । क्या तुम मेरे साथ हो कर भी मेरे साथ हो ? झूठ बोलने कि जरूरूत नही है सच बोलो । अगेन आई एम सॉरी सच यही है कि मैं रात से ही डिस्टर्ब हूं और आज सुबह मैं टैकिंग पर आने के मुड में नही था पर तुम्हे ना भी नही बोलना चाहता था । देखो तुम मुझे गलत मत समझना । मैं जान बुझ कर कुछ नही कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ इस डैम के साथ होना की कोशिश करता हूं पर कुछ पलो के बाद मैं मैम के पास चला जाता हूं । यह मैम कौन है ? देखो यह मैम है तो मैं हूं नही तो मैं डिप्रेशन में आ कर कुछ भी कर सकता था । तो क्या तुम मैम को मिस कर रहे हो । हा मिस तो तभी से कर रहा हूं जब अपने शहर निकला था । तो अब क्या समस्या है ? डिम्पल थोडा इरिटेट हो कर बोली । देखो तुम प्लीज मेरे लिए खुद को परेशान मत करो। यह सुन डिम्पल बोली अबे अजीब आदमी हो यार सुबह से मैं इतना मेकअप कर नई जीन्स टी शर्ट पहन कर आई की तुम्हारी अटेनशन होल्ड करूंगी । पर तु किस प्रकार का जन्तु है देखा तक नही । बस चलता रहा मेरे साथ , बाईक के पीछे मिस्टर साईलेंस बन कर बैठ गया । अबे कभी किसी लडकी के साथ मेरा मतलब अपनी मैडम के साथ डेट पर नही गया । देखो मै ऐसा ही हूं । क्या ऐसा ही हूं ? डिम्पल एकदम उबल चुकी थी। जेब से सिगरेट निकाल कर जलाई और ढेर सारा धुआं बाहर फेकते हुए बोली । आनंद तेरी समस्या यह है कि तु हक्कित में नही सपनो कि दुनियां में जीता है । माई डियर मेरी तरफ देख मैं हक्कित हूं ,,तुम्हारे साथ ,तुम्हारे सामने खडी हूं।हाथ लगा मुझे,,अरे लगा हाथ ,,आनंद थोडा झिझकते हुए डिम्पल के हाथ को टच किया और हाथ वापस पीछे ले आया । डिम्पल सिगरेट अ के तरफ बढ़ती हुई बोली जरा पकड एक मिनट के लिए । आनंद को जीत की याद आ गई जीत स्कूल के बाद छुप कर सिगरेट पीता था । और कभी कभी उसे पकडा कर वाशरूम चला जाता था । जीत अ के मन से चीखा अबे माखनचोर लडकी खुद आगे बड रही है तो तु क्यो पत्थर की मूर्ति बन कर खडा है । साले आगे बड ।।आनंद आनंद कहां खो गये। आनंद तेजी से बोला मैं आगे बड़ता हूं । डिम्पल कहां आगे बड़ता है आगे झील है ।।कुछ भी बोलना शुरू कर देता है। ले पकड सिगरेट ,,अ सिगरेट उसी तरह पकड लिया जैसे कोई अगरबत्ती पकड़ता है । यह देख डिम्पल बोली अबे ला सिगरेट पकड ऐसे और लगा एक कश,, मार । नही मैं नही पी सकता,,,अबे मार यार डिम्पल सिगरेट अ के होठों कर उसका हाथ पकडा कर लगा दी । अ गुस्सा होते हुए बोला डिम्पल दिस इज नॉट फेयर ,,तुम मुझे फोर्स नही कर सकती ,,पकडो आपनी सिगरेट डिम्पल अ का चेहरे देख एक पल के लिए चुप सी हो गई । वह गुस्से में आ गया था। डिम्पल सिगरेट वापस ले ली और एक कश ले कर धुऑ फेकते हुए बोली । आनंद आई एम सारी ,,मै फ़्रेंडशिप मे सब कर रही थी । आनंद थोडा सहज होते हुए बोला डिम्पल मेरे लिए रिलेशन रिलेशन है जिसे मै जीता हूं। जरूरूत के बुनियाद पर जो संबध बनता है वह जरूरूत पूरा होते ही खत्म हो जाता है । मैं तुम्हे अपना दोस्त मानता हूं तुम अच्छी हो पर मैं अभी परेशान हूं । मुझे यह लग रहा है कि मैम किसी परेशान से गूजर रही है । मुझे उनसे बात करनी है पर वह फोन नही उठा रही है । डिम्पल सिगरेट कि आखिरी कश ले कर उसे झील के तरफ उछाल दी । आनंद के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली चल अपन दोनो मैम के पास चलते है ।अभी इसी वक्त ,,यह कैसे हो सकता है हमारे पास टिकट के पैसे कहां है ? मेरे एकाउंट में है दो हजार है हो जायेगे । हा दो हजार मेरे पास भी है पर घर पर क्या बोलेंगे? यह सुन डिम्पल बोली अरे बोल देगे स्पोर्टस ट्रेनिंग में जा रहे है । पर मै तो झूठ नही बोल सकता ,,तो फिर सच ही बोल दे बाबा जी ,,,क्या आइटम है यार तू, चल तु सच बोल और मुझे जो बोलना है वो मैं बोल दुगी ।पर तेरा यह लटका हुआ चेहरा नही देखना चाहती । यह सुन आनंद के चेहरे पर चमक वापस आ गई । जिससे देख डिम्पल बोली एकदम साला बच्चा है। चल अब निकलते है । पल पहले घर जायेगे मै दादी और छोटी मां को बाता कर जाएगा । ओ कै चलो फिर पहले घल ही चलते है । डिम्पल आनंद का हाथ पकड उसे अपने साथ साथ ले जाने लगी । आनंद डिम्पल के साथ साथ किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह चल रहा था ।
शाम हो चुकी थी जीत नीम के पेड़ के पास खडा था उसकी समझ में नही आ रहा था कि वह अ को सच बताये या सच को छुपा ले । सच सुन उसके दिमाग में भूचाल आ जायेगा । एग्जाम में उसका परफोरमेशन खराब हो सकता है । मैम ने ऐसा क्यो किया जरूर कोई बात है पर अ के लिए वो बात जानना अभी जरूरी नही । मुझे झूठ बोलना होगा । यह सोचते हुए जीत मैम के घर का लॉक खोल कर भीतर चला गया । मीठी मैम ने चाभी जीत को रखने दिया था क्यो की नये किराये दार को वो घर दिखा सके । जीत खाली घर के भीतर आ चूका था । चारो तरफ खालीपन सांस रोके जीत को देख रही थी । जीत को लगा कि इस खालीपन में वह खोता जा रहा है । उसने सामने टूल पर रखे फोन को देखा उसके पास पहूंच गया ।रिसीवर उठा कर अ का नंबर डायल किया ,दूसरे तरफ घंटी बजी छोटी मां ने फोन रिसीव किया हैलो , हैलो आंटी मैं जीत आनंद का स्कूल फ्रेड बोल रहा हूं । हां जीत मै आनंद की छोटी मां बोल रही हूं । गुड ईवनिंग मैम मुझे आनंद से बात करनी है । वह तो आज टैरकिंग पर गया हुआ है । अब लौटता ही होगा । तुम बोला क्या मैसज है मुझे बता सकते हो । आंटी वह जो हमारी स्कूल की मैम थी सुचित्रा मैम वह कुछ दिनो के लिए अपने घर कोलकात्ता गई है । इसलिए आनंद अगर मैम के घर पर फोन करेगा तो मैम से बात नही हो पायेगी । मैम ने कहा है कि वह आनंद को फोन कर लेगी। ओ के जीत मैं यह मैसज आनंद को देदुगी । ओके आंटी । इतना बोल जीत फोन रख दिया ।गहरी सांस छोड़ते हुए बोला । यह भगवान किसी भी तरह मैम को वापस भेज दे एग्जाम से पहले नही तो यह आनंद क्या करेगा मुझे नही मालुम। एक बार खाली घर को जीत ने देखा और फिर घर से बाहर निकल कर दरवाजा लॉक किया। सामने नीम का पेड़ हवा में लहरा रहा था । जीत एक पल के लिए पेड को देखा और बोला बस यार मैम को वापस बुला दे । इतना बोल वह गेट के तरफ निकल गया।
तभी आनंद बाहर से घर के भीतर आया, तो सामने छोटी मां खडी थी दोनो एक दूसरे को देखे। अ अपने मुड में वहां से निकलने लगा इस समय उसे एकांत की जरूरूत थी ।ताकि वह जर्नी की तैयारी कर ले । तभी छोटी मां बोली अभी दो मिनट पहले तुम्हारे लिए फोन था । अ के चलते कदम को अचानक ब्रेक लग गया। वह पलट कर छोटी मां के तरफ देखा और बोला मैम का फोन था ना ?अ की यह बैचेनी देख वर्षा जी के मन में जबरदस्त जलन की एक लहर तेजी से उठी और उसके मन के किनारे से टकरा कर उसके शरीर के रोम रोम में फैल गई । दो पल चुप रहने के बाद वह बोली जीत का फोन था । उसने मैसज दिया कि मैम को अब तुम फोन ना करो । अरे क्यो ना करे,,मैं अभी फोन करूगा और अगर बात नही हुई तो मैं मैम से मिलने उसके पास जाऊगा । यह सुन वर्षा के तन मन में आग की लहर फैल गई । बडी मुश्किल से अपने जलन को अपने मन में ही रोका और बोली मैम अब घर पर नही है वह अपने मां के घर गई है । मां के घर ,,पर क्यो ,? कारण जीत ने नही बताया । ओ के मैं अभी जीत को फोन करता हूं । कुछ ना कुछ वहां हुआ है मेरा मन कहता है । मैम किसी परेशानी में है इसका इनटूयशन मुझे पीछले चार पांच दिनो से हो रहा है । मैं अभी जीत को फोन लगाता हूं । फोन पर नंबर डायल करने लगता है छोटी मां अ को ध्यान से देख रही होती है । तभी जलन से अपने आप से बोली लगता मैम ने इसके उपर बैल्क मैजिक कर दिया है उसका ही माला जपता रहता है । जरूरू कोई जादूगरनी हो गी जो इस मासूम को अपना शिकार बना ली है । उधर फोन लगते ही वही जीत के पापा की आवाज हैलो कौन ? नमस्ते अंकल जीत से बात करनी है । वह सहाब तो घर पर नही है। जब आयेंगे तो मैं सहाब को बता दूंगा। वह आपको फोन कर लेगे । ओ के , इतना बोल कर फोन कट हो गया । अ गुस्से से चीखा यह घर पर रहता क्यो नही ? छोटी मां अब भी अ को एकटक देख रही थी ।
आज इतना ही
आप सभी मित्रो का आभार
रवि कांत मिश्र ❤❤❤🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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