सफर अभी बाकी है ,,,,
सुचित्रा रिश्ते खूबियों से नही चलते रिश्तो तो एक दूसरे की कमियों को सहन करने से जिन्दा रहती है । एक दूसरे की कमियों पर परदा डालना ही पडता है । तुम दोनो इस बात को समझ नही पाये। मानस ने गलती की है पर तुमने भी सही नही किया। भावना से काम लिया और रिश्ता तोड कर चली आई । उसकी गलती की वजह खोजती तो शायद तुम दोनो एक दूसरे के करीब आ जाती ।पर तुम दोनो ही बुद्धिमान हो बुद्धि की तराजू में रिश्तो को तौलते हो । क्या पाया क्या खोया । तुम गलत हो ,,मैं सही हूं ,,,तुमने मुझे क्या दिया? तुम मुझे क्या दे सकते हो । रिश्तो का पोस्टमार्टम कर दिया। रिश्ते ठ
टुकडो में बंट कर रह गई । ठंडे दिमाग से सोचो अगर तुम आनंद के साथ संबध स्थापित कर लेती और मानस को पता चलता तो क्या होता ? वही तलाक , , तब तुम दोषी होती , बेटी रिश्तो को बनाने में रोज मेहनत करनी पडती है ।उसकी जड़ो में समझदारी की मिट्टी ,प्रेम की भावना का पानी देना पडता है ।कमजोरियो को माफ करने के लिए मन को तैयार रखना पडता है । खुद दर्द सह कर दूसरो को खुशी देनी पडती है । तब संबध चलता है ।
सुचित्रा खिडकी के पास बैठी सब सुन रही थी । उसका चेहरा भावहीन हो चुका था । मां अपनी बात कह कर सुचित्रा के तरफ देखने लगी । सुचित्रा धीरे से मां के तरफ अपना चेहरा घुमाई दो पल मां के तरफ देखती रही उसकी ऑखों में पानी तैरने लगे । दो बूंद ऑसू ऑखों से निकल कर सुचित्रा की गोद में गिरे । वह भीगे गले से बोली मां तुम्हारी बाते ठीक है सुनने में ठीक लगती है पर इस समय मेरे दिल तक तुम्हारी बात पहूंच नही रही । मेरा विश्वास टूट चुका है मां I have lost my faith , मुझे अब कुछ भी सुनाई नही दे रहा है । कुछ भी सुनाई नही पडता ,,बस मै चाहती हूं की मानस से जुडी हर एक बात में भूल जाऊं। आनंद भी मानस से जुडा है क्या तुम उसे भी भूल जाना चाहती हो ? यह सुन सुचित्रा धीरे से बोली ,,नही आनंद कही मेरे भीतर अब भी है जो मुझ में यह एहसास जगाने की कोशिश कर रहा है कि सफर अभी बाकी है ,,सफर अभी बाकी है । अगर जीने की चाह कहीं थोडी बची हुई है तो वह आनंद के कारण । मां मैं उसे अपने पास रखना चाहती हूं । मैं मरना नही चाहती पर अभी मुझे अपने को जिन्दा रखने के लिए खुद को समेटना पडेगा । यह सुन मां सुचित्रा के माथे को चुमते हुए बोली बेटी इंसान वही है जो गिरता है पर गिर कर फिर उठ जाता है । तु भी फिर उठ कर खडी हो जाएगी। यह सुन सुचित्रा मां के सीने से लिपट गई और सुबकने लगी मां ने सुचित्रा को अपनी बाहों में भर लिया । खिडकी से जो आकाश का टुकड़ा दिख रहा था उस पर चांद अपनी पुरी आभा के साथ निकल आया था ।
आधी रात बीत चुकी थी अ के कमरे की खिडकी पर धीरे धीरे दस्तक हुई । अ चुकी टेबल लैम्फ रौशनी में पढ रहा था । दस्तक सुन कर चौक गया । ध्यान से फिर दस्तक सुनने की कोशिश करने लगा । फिर धीरे से दस्तक हुई अ झटके से अपनी जगह से उठ कर खिडकी के पास गया और झटके से खिडकी खोल दिया,,सामने डिम्पल खिडकी पर दिखाई दी ।जो खिडकी पर सीढ़ी लगाये उस पर खडी थी । तुम,,इतनी रात गये ,,,यहां क्या करने आई हो ? अबे लडूचंद तेरी मदद करने आई हूं , साले हट समाने से डिम्पल खिडकी की शटर हटा कर भीतर धम्म से कुदी । इस आवाज पर दादी मां बोली आनद देख तो बिल्ली कुदी क्या ,,नही दादी डि,,,,मप,,डिम्पल बोलने से पहले ही डिम्पल अ का मुहं दबा दी ,,और फुसफुसा कर बोली अबे माखनचोर मै तेरी मदद करने आई हूं
और तु मुझे फंसा रहा है ।चुप रह। तभी दादी फिर बोली क्या हुआ तु बोलते बोलते चुप क्यो हो गया ? बिल्ली थी ना ,,अबे बोल हां ,,डिम्पल अ का मुहं पर से हाथ हटाता हुए बोली । अ मै झूठ नही बोल सकता । तो सच मै बोल देती हूं कि तुमने मुझे अपने कमरे में बुलाया है । मेरे साथ गंदी बात करने के लिए । बोल दूं क्या ? अरे नही मैं बोलता हूं तुम चुप रहो । तभी छोटी मां की आवाज कमरे के दरवाजे के पास से आई आनंद क्या बात है दरवाजा खोलो ,,दादी बिल्ली नही बड बिल्ला थी खिडकी खोल कर भीतर आ गई थी । अब भाग गई चलो खिडकी बंद कर लो आनंद यहां बिल्लियों का बहुत आतंक है । जी मैंने बंद कर लिया है । ठीक है अब अपनी स्टडी करो ,,,इतना बोल कर छोटी मां दरवाजे से अपने कमरे के तरफ चली गई। उनके जाने के बाद ही अ डिम्पल से बोला देखो तुम जैसे आई हो वैसे ही चले जाओ । डिम्पल आराम से सिगरेट निकाल कर सुलगाने लगी। यह देख अ बोलने लगा अरे यार यह क्या गजब कर रही हो दादी की नाक बहुत तेज है सिगरेट का गंध पा कर यहां पहूंच जायेगी । तेरे साथ मै भी लपेटे में आ जाऊंगा । तुम यहां से चले जाओ । मैं यहां तेरे लिए आई हूं देख तुझे मदद की जरूरूत थी इसलिए इतनी रात गये यहाँ आ गई। तु मैम से मिलने चल रहा है ना , डिम्पल सिगरेट को अपनी उंगली में फंसा कर उसे नचा नचा कर बोल रही थी । अ समझ गया कि इसे यह नही मालुम है कि मैम शहर छोड अपनी मां के पास गई है । डिम्पल मैम अपने मम्मी के पास कोलकाता गई है । इसलिए अब तुम मेरे साथ नही जा रही हो । सिर्फ मैं जा रहा हूं कल सुबह । देखो तुम समझ गई अब तुम यहां से चले जाओ । मुझे स्टडी करना है । डिम्पल सिगरेट का आखिरी कश ले कर बोली कल तुम जा रहे हो या भाग रहे हो ? जा रहा हूं सभी को सच बता कर । ओके तो तुम्हे रूपये की जरूरूत पड़गी । नही मेरे पास है और पापा मेरे एकाउंट में डाल देंगे। अब तुम प्लीज जाओ यहां से और दोबारा आने की कोशिश मत करना। डिम्पल ठीक है जा रही हूं पर एक बात सुन लो ,,डिम्पल दोस्ती के लिए और खास कर तेरी दोस्ती के लिए यहां रात में चोरी चुपके आ थी । थैंक्स डिम्पल तुम जाओ अभी मुझे बहुत डर लग रहा है । नही जाती तो तुम क्या करोगे ? मैं कुछ नही करूगा तुम बैठो पानी पीयो उस डिब्बे में बी बिस्किट है खाओ । मैं स्टडी करने जा रहा हूं । इतना बोल कर अ स्टडी टेबल के पास जा कर चेयर पर बैठ गया। यह देख डिम्पल बोली ओ कै जा रही हूं । अ पीछे पलट कर बोला थैंक्स डिम्पल यु आर सो नाइस, चल हट ईडियट कही का ,,साला तु है ही डिब्बा, बजाने पर भी समझ नही पाता है । ध्यान रखना अपना और मुझे फोन करना । ओ के कॉल करूगा । अ उठ कर खिडकी तक आया डिम्पल अ के कंधे का सहारा ले कर खिडकी पर चढ गई फिर नीचे सीढ़ी पर उतरती चली गई । जमीन पर पहूंच कर सीढ़ी नीचे उठा कर रख ली। एक बार खिडकी के तरफ देखी तो अ खडा उसे देख रहा था । उसे हाथ हिला कर बाॅय बोली और अधेरे में एक तरफ चल दी । अ यह देख गहरी सांस छोड़त बोला, पागल है ,,मुझे ऐसे ही दोस्त मिलते है । एक पागल जीत है दूसरी पगली डिम्पल । इतना बोल खिडकी बंद कर दी ।
सुबह सुबह जब अ उठ कर तैयार होने लगा तो छोटी मां की नींद खुल गई । वह अपने कमरे से निकल कर लिविंग रूम में आ गई। वही सोफे पर बैठ कर अ का इंतजार करने लगी ।थोडी देर बाद अ अपना बडा सा बैग ले कर लिविंग रूम में आया ,तो सामने सोफे पर छोटी मां को बैठा देख कर थोडा सा ठिठक गया। पर फिर सोफे के पास बैग रख कर बोला ,,देखिये मैं वापस जा रहा हूं और आप मुझे रोकने की कोशिश नही करेगी । हो सकता है कि एगजाम दे कर वापस आऊंगा। यह सुन छोटी मां मुस्कुरा दी और बोली तो फिर क्या डिम्पल भी तुम्हारे साथ ही वापस लौटेगी ? डिम्पल ,,,,थोडा चौंका फिर बोला प्रोग्राम मे चेंज है पहले हम दोनो साथ जाने वाले थे अब सिर्फ मैं जा रहा हूं ।तभी दादी अपने कमरे से बाहर निकल कर लिविंग रूम में आ गई और आते ही बोली तु कैसा पगला है रे मुझे और अपनी मां को छोड कर जा रहा है । वह भी मेजर सहाब की बेटी को लेकर ,,थोडा शर्म लाज है कि नही तुझे ,,दादी मैं अकेला जा रहा हूं । और फिर मुझे यहां मन नही लगता । मेरा दोस्त जीत वहां है । वह सब मैं नही जानती तु हम दोनो को अकेला छोड कर नही जा सकता । अ की नज़र छोटी मां के तरफ उठ गई कि वह क्या बोलती है पर छोटी मां चुप रही । दादी माला फरते हुए सोफे पर बैठ गई और एकटक अ के तरफ देखने लगी । अ दादी के तरफ देख कर बोला मुझे दस दिनो बाद जाना ही है ,मैं दस दिन पहले जा रहा हूं । छोटी मां बोली ठीक है हम भी तुम्हारे साथ चलेंगे । और तुम्हारे एग्जाम खत्म होने के बाद ही वापस आयेगे । दादी बोली यही ठीक रहेगा ,मैं तो अजय से पहले ही बोली थी कि बहूं को यही बुला लो पर कहने लगा कि छावनी क्वाटर में रहना अधिक सुरक्षित रहेगा । लो अब वही हो रहा है । हमारा समान भी पैक है और टिकट भी बुक है । छोटी मां मुस्कुराते हुए बोली । यानी आप लोगो को पहले से ही सब पता था, अरे बेटा मैं उड़ती चिड़ियां के पंख गिन लेती हूं तुम्हारी दादी हूं और मैं तुम्हारी छोटी मां हूं । छोटी मां शब्द सुन कर अ चौक कर छोटी मां के तरफ देखा ,तो वह तुरंत बोली सॉरी आनंद मेरे मुहं से निकल गया ।अरे निकल गया तो सही निकला दादी तुरंत बोली पडी । अ कुछ नही बोला चुपचाप सोफे पर बैठ गया । तभी छोटी मां बोली लगता है तुम डिम्पल के साथ ही जाना चाहते हो । इस लिए हमारे साथ चलने की बात सुन कर सोफे पर बैठ गये । अ को गुस्सा आ गया और गुस्से मैं बोला छोटी मां डिम्पल मेरे साथ जाने वाली थी पर अब नही जायेगी । छोटी मां ,, तुम्हारे मुहं से मेरे लिए पहली बार छोटी मां निकला है बेटा एक बार और बोल,ना छोटी मां ,,आनंद खुद आवाक था कि यह छोटी मां उसके मन से कैसे निकल गया पर अब तो शब्द निकल चूका था । उसे यह मान लेना चाहिये की उसने अपनी छोटी मां को दिल से माफ कर दिया है । दादी की ऑखों में आंसू आ गये थे ।छोटी मां अ के करीब आ गई थी उसकी तरफ देख रही थी की एक बार और छोटी मां बोल दे । अ छोटी मां के तरफ देख रहा था । वह क्या कहे या नही कहे कुछ समझ में नही आ रहा था। वह अपने कमरे की तरफ तेजी से चला गया । दादी बोली देखा बहूं मैं कहता थी ना आनंद सोना सोना है । छोटी मां के लिए तो आज उत्सव का दिन था ।दस साल तक वह मैडम मैडम सुन कर घायल हो गई थी ।उनका दिल कितनी बार खून के आंसू रोया था। आज उस शब्द का अंत हो गया था । छोटी मां दादी के पास आ कर बैठ गई और अपना सिर उनके गोद में रख दिया ।दादी उसके सिर पर हाथ रख दी ।
आज इतना ही ।
सभी मित्रो का आभार
रवि कांत मिश्र
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