सफर अभी बाकी है
उस रात अ जैसा गया था वैसा वापस नही आ पाया । उसके भीतर एक द्वंद शुरू हो गया था। द्वंद के साथ _ साथ उसके मन में एक अपराध भाव का भी जन्म हो चुका था । उसने मैम की बहुत सारी चीजे चुराई थी पेन, बोतल ,तकिया । इसके बाद भी मैम उसे पेन गिफ्ट की । मैम और प्रो सहाब सब कुछ जान गये है । वह चाहते है कि मैं उनके सामने यह कबूल कर लूं कि मैने मैम के समान की चोरी की है । अगर मैने ऐसा कर दिया तो फिर सवाल यह उठेगा कि मैने ऐसा क्यो किया ? नही नही मैं यह कभी नही बताऊंगा कि मैने यह चोरी क्यो की ,,मर जाऊंगा पर नही बताऊंगा । यह बात सिर्फ मेरे और जीत के बीच में ही ठीक है ।यह हम दोनो का सीक्रेट है । मैम को कभी यह रहस्य मालुम नही होना चाहिये । मेरा भीतर जो यह भ्रम है या सच है ।जो भी है वो मेरे जीने की वजह है । इस वजह को मै कभी खोना नही चाहूगा ।यह जैसा है उसे वैसा ही रहना चाहिये। बस कुछ महिने की बात है फिर मैं कालेज में चला जाऊंगा । मैम मुझ से दूर हो जायेगी पर मै मैम के करीब रहूंगा । यह हमारा रहस्य ,रहस्य ही रहेगा । मुझे प्रो सहाब और मैम से बचने की जरूरूत है । मुझे उनका गाईड नही बनना है । मै उन दोनो के सामने बहुत देर तक अपनी भावना को छुपा नही पाऊगा । देखा नही मैम की सुदंर गोरी गोरी उंगलियां देख कर मैं खो गया था । लगता है उन दोनो ने इस बात को पकड लिया होगा । मुझे तो लगता है कि इनका मकसद ही मुझे चोर साबित करना है । इस लिए मुझ से नजदीकियां बढ़ाना चाहते है । मै नही जाऊंगा चाहे जितना भी मुझे बुलाये । हां हां नही जाऊंगा। अगर मैम बुलायेगी तो ,,,,,क्या अपने आप को रोक पाऊगा ? इस प्रश्न पर अ का दिमाग चुप होगया। एक सन्नाटा उसके भीतर छा गया। इस खामोशी के बीच वह अपने साईकिल के पैडल पर पैर मारता रहा । अचानक भीतर से एक आवाज आई ,,,,जाना पडेगा,,, मैम की बात को मै नही टाल सकता । अरे तु मरेगा ,उसकी बुद्धि ने चीख लगाई । अ भी चीखा चुप कर जीत की तरह बात मत कर। यार मैं कंफियूज होता जा रहा हूं । कुछ ऐसा है जो मुझे मैम की तरफ उसके करीब जाने के लिए खींचता है और कुछ ऐसा है जो उनसे दूर जाने के लिए कहता है । मेरे भीतर से मुझे आदेश देता है । मेरा खुद पर से नियत्रण खोता जा रहा है । यह सोचते सोचते अ अपने घर के बाहर दरवाजे पर पहूंच गया । दादी सो चुकी थी इसलिए अपनी चाभी से दरवाजा खोल कर अपने घर के भीतर पहूंचा । साईकिल पार्क की ,फिर बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में चला गया। एक बार खुद को आईने के सामने खडा पाया ,खुद को उपर से नीचे तक देखा ।जेब से पेन निकाली उसे ध्यान से देखा । फिर उस चोरी के पेन को अपने स्टडी टेबल से उठा कर अपने हाथ में लिया ।दोनो पेनो को ध्यान से बारी बारी देखा । कोई अंतर नही था दोनो पेनो में । अगर कोई अंतर था तो सिर्फ इतना की एक चुराई गई थी दूसरा गिफ्ट की गई थी । शायद चोरी की याद दिलाने के लिए ,पर मुझे चुराई गई पेन से अब एक गिल्ट का एहसास होने लगा था । जो मजा मुझे इस पेन से पहले हो रहा था अब वो मज़ा गिल्ट में बदल गया था । पर, पर इस गिल्ट में भी एक मजा है कि यह सिर्फ मै और जीत ही जानते है । यह काम मैने किया है चोरी मैने की है । चोरी करने में सफल होने का खुशी और उस चोरी को छुपा कर रखने में जो रोमांच है । वह रोमांच मैं कभी खोना नही चाहुगा । हमारा रहस्य हम दोनो के बीच छुपा रहेगा । बहुत हुआ तो आप अनुमान लगा सकती है पर जान कुछ भी नही सकती। यह साबित नही कर सकती की पेन मैने ही चुराया है। मैम अब आपकी दो पेन मेरे पास है । मै चोरी की गई पेन से आपको लैटर लिखूंगा पर गिफ्ट की गई पेन से एग्जाम लिखूंगा। आप अब मेरे साथ स्कूल और घर दोनो जगह होगी। उसने पेन को दो अलग अलग जगह रख दी । ताकि वह आपस में कभी मिल ना सके । पर अ के मन में दोनो पेन पास पास रखे हुए थे । एक ही जगह बिलकुल पास पास। दोनो अ से संवाद कर रहे थे । अ भी उनसे बाते करता रहा । इस तरह ना जाने कब उसे नींद आ गई । उसने एक सपना देखा कि स्कूल की घंटी बजी मैम स्कूल के कॉरीडोर में तेजी से आ रही है । वह दरवाजे के सामने खडा है मैम उसके करीब आती है। वह मैम के तरफ देखता है तभी अचानक मैम के सारे काले बाल एकदम से सफेद हो जाते है । चेहरे पर झुरियां उभर आती है ।मैम की ऑखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा चढ जाता है । वह अ से कहती है तुम कब बडे होगे। अ यह सुन चीख मार कर विस्तर पर उठ कर बैठ जाता है। गहरी गहरी सांसे लेने लगता है । फिर अपने आप से कहता है सपना था ,,यह सच नही हो सकता । मैम कभी ऐसा नही दिख सकती । यह मन का भ्रम था जो सपना बन कर आया था । इसे भूल जाना ही बेहतर है । चलो सोने की कोशिश करता हूं,,, उसने करवट बदल कर अपनी ऑखे बंद कर ली । पर उसके दिलो दिमाग में कभी सपना ,कभी डर ,कभी मैम से दूर भागने की चाह । कभी मैम के पास आने की चाह उसे बारी बारी से जगाते रहे । दूसरे दिन सुबह जब वह स्कूल गया तो उसका सिर भारी था । वह जीत से मिला और रात की सारी बाते बता दी । जीत इतना बोला अब तु इस खेल से भाग नही सकता । यह दो दिमाग वाले लोग सच का पता लगा कर ही रहेगे। अब तु अपने सच को कैसे बचायेगा यह सोच । तभी मैम क्लास में आ गई । वह पहले जैसा आती थी वैसा ही आई और पढ़ना शुरू कर दिया । अ खामोश सा बैठा रहा । उसे सिर्फ मैम की आवाज सुनाई दे रही थी पर उस आवाज के अर्थ से वह कोसो दूर था। बार बार उसके मन के स्क्रीन पर पेन बोतल और तकिया का चित्र उभर रहा था । आज इतना ही । आप सभी का बहुत बहुत आभार । आपकी प्रतिक्रिया मुझे मिल रही है । राजस्थान से लेखिका रेणु अस्थाना जी की सार्थक सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । आप सभी मित्रो का आभार जो फेस बुक पर लगातार प्रतिक्रिया मुझे दे रहे है ।
धन्यवाद 🙏🙏🙏

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