सफर अभी बाकी है
एक दुनियां वो है जिसे हम बनाते है और एक दुनियां वो है जिसे किसी ने बनाया नही बस वो है हमारे बीच ,, हम सभी उसी दुनियां से है । जिसे हमने बहुत हद तक मिटाने का प्रयास किया और हम मिटाने में बहुत हद तक सफल भी रहें । अब हमारी बेहोशी टूट रही है तो हम उसी दुनियां की तरफ भाग रहे अपना सुकून चैन खोजने ।
,जिससे कभी हमने उसका सकून चैन छीन लिया था ।आज हम भटक रहे उसी के आस पास । मैम, प्रो सहाब और अ तीनो नदी के किनारे रेत पर चल रहे थे । नदी की धारा के साथ साथ उस जंगल और पहाड की तरफ ।जो इंसानी दुनियां से कही दूर उस संसार में हमे ले जाता है जहां से इंसान अपनी पहचान जंगल के हिस्से के रूप में कर सकता है। सुबह की रौशनी में नदी का जल चमकते हुए तेजी से बह रहा था और इसके साथ बह रहे थे तीन लोग । रेत पर धीरे धीरे चलते छः पैर ,एक दूसरे के पीछे पीछे चलते हुए आगे बडते जा रहे थे ।प्रो सहाब अ से चलते चलते बोले आनंद वो पेड़ो का जो झुरमुट दिखाई दे रहा है क्या वहां लोग भी रहते है । सर दो चार घर आदिवासयो के है । क्या करते है वो लोग ,मेरा मतलब काम क्या करते है ? सर वो लोग आज भी शिकार और खेती पर डिपेंड करते है । आदमी का शिकार तो नही करते है ना ? प्रो सहाब मजाकिया मुड में पुछे । मैम तभी बोली मानस आदिवासियो ने किसी आदमी का शिकार नही किया पर तथाकथित सभ्य लोगों आदिवासियो का शिकार करते आ रहे । जो आज भी जारी है। आई एगरी विथ यु सुचित्रा। वाट ए थाड यु हैव हेभ गिवेन मी । हम लोग सभ्य होकर और असभ्य हो गये है । और जिसे हम लोग असभ्य समझते है , प्राचीन समझते है । उनसे हमे सभ्यता सीखनी होगी । आनंद तुम क्या सोचते हो ? सर मेरा जन्म यही हुआ है मैने देखा कि यह लोग बहुत शांति प्रिय लोग है । इनको मैं शांति दूत कहता हूं प्रकृतिपुत्र कहता हूं । तुम ठीक सोचते हो आनंद सुचित्रा मैम बोली । अ को यह सुन कर अच्छा लगा कि मैम कहती है कि मै ठीक सोचता हूं । थैंक्स मैम । माई प्लेयर आनंद ,तुमने हम दोनो का साथ दिया हमारे साथ चल दिये । इसके लिए हम दोनो तुम्हे थैंक्स कहते है । यस आनंद वी आर ग्रेटफुल टू यु ।थैंक्स मैम अ सोचने लगा कि यहां ना आने के लिए कितने बहाने मैने मन में बनाये एक बहाना भी काम ना आया । जैसे जैसे समय बीतता गया शरीर किसी अनजानी शक्ति से चलने लगा, मैने जूते ना चाहते हुए भी निकाल लिए, पिता के दिये फौजी कपडे पहन लिए, टोपी निकाल ली पहन लिए ,अपना बैग तैयार कर लिया दादी ने केक और बिस्किट के पैक्ट बैग में डाल दिये । पानी का बोतल भर लिया । एक तरफ तैयार होता चला गया दूसरी तरफ मन ना जाने के लिए विरोध करता रहा । जो इस समय भी कर रहा है । पर पैर किसी दिवाने की तरह आगे आगे भाग रहा है। क्या है यह सब कुछ ? भीतर दो धारा चली रही है । पर बाहर एक दिखाई दे रहा है दूसरा दिखाई नही देता बस बीच बीच में अपनी उपस्थति दर्ज कराता रहता है । छोडो जो अभी हो रहा है उसके साथ बहते जाओ । मैम के साथ साथ चलते हुए मन पहले से काफी हल्का हो चुका है । पर रह रह कर वह बात बीच बीच में याद आ ही जाती है । मन भारी हो जाता है । जी करता है कि मैम को अभी सब कुछ बता दूं पर बता नही सकता । तभी मैम बोली आनंद मै तुम्हारे लिए गाजर का हलुआ ले कर आई हूं । वो तो मुझे बहुत पंसद है मैम ,,पर आपको कैसे पता चला ? बस पता चल गया या यु कहो तो मैने पता लगा लिया । कैसे मैम ? मैने तो कभी यह बताया नही कि मुझे क्या पसंद है ? बहुत सी बाते बताई नही जाती है आनंद बस महसुस कर समझ ली जाती है । यह सुनते ही आनंद की धड़कने अचानक तेज हो गई । शरीर में एक बिजली दौड गई ।बीते हुए अनगिनत लम्हो की तस्वीरे उसके मानस स्क्रीन पर एक के बाद एक आई और चली गई । वह रेत पर चलता जा रहा था अब उसके पांव रेत पर अधिक धसते हुए महसुस होने लगे थे । दो पल वह चुप रहा फिर बोला यस मैम आप ने सही कहा। फिर अपने को सहज करने की कोशिश करने लगा पर हर बार वह असहज होता जा रहा था । मैम सब कुछ जानती है । क्या वह भी वही महसुस करती है जो मैं महसुस करता हूं ,,नही नही यह नही हो सकता ,,आखिर वह ऐसा क्यो महसुस करेगी । ऐसा मुझ में क्या है ? एक चोर के लिए मैम के मन में क्या हो सकता है ? जिस दिन भेद खुल गया उस दिन मैम मेरा नाम भी अपनी जुबान से नही लेगी । बस चुपचाप इनके साथ साथ चलता रह । तुझे अपने सीक्रेट को बचाना है । कभी यह नही मानना है कि तुमने चोरी की है । यह लोग तुमसे बात निकलवाने की कोशिश करेगे। बेटा अपनी बात पर जमे रहना । प्रो सहाब बोले आनंद सामने दो रास्ते है किस पर जाना होगा। अ को झटका लगता है वह अपनी दुनियां से वापस एक झटके में आ जाता है। सर यह ,,यह ,,,,यही रास्ता ,, यही रास्ता जायेगी । आनंद तुम ठीक तो हो ना । हां सर मैं ठीक हूं ,,,,वो चलते चलते मै अपने विचारो में खो कर बहुत दूर निकल गया था । आपने जब आवाज दी तो एकदम से आना पडा ,,। सॉरी आनंद मुझे नही पता था कि तुम भी मैम की तरह विचार की दुनियां मे दूर तक निकल जाते हो । सुचित्रा तुम अकेली नही हो आनंद भी तुम्हारी तरह विचारो में खो कर दूर निकल जाता है । तुम दोनो की बहुत अच्छी बनेगी ,,,पर तुमदोनो बात चीत आपस में नही कर पाओगे । यह सुन मैम हल्का सा मुस्कुरा दी पर अ को फिर एक बार बिजली का झटका सा लगा । उसके मानस स्क्रीन पर एक तस्वीर तेजी से आ कर निकल गई कि वह और मैम एक पेड के नीचे पास पास चुप चाप बैठे है । तभी मैम बोली मानस तुम क्या कभी विचारो में नही खोते ? सुचित्रा खोता हूं पर वर्तमान से बहुत दूर तक नही जाता । जल्द वापसी हो जाती है मेरी । आनंद यह विचारो की दुनियां में तुम्हारा आना जाना कब से शुरू हुआ ,क्या तुम हम दोनो को बताना चाहोगे ? यह सुन अ के भीतर जीत ने चीख मारी बेटा सम्भल जा यह लोग तेरे मन में घुसने की कोशिश कर रहे है । अ अपने को संभालते हुए बोला सर यह मेरे साथ हाई स्कूल में आने के बाद शुरू हुआ है । सुचित्रा तुम्हारे साथ कब से शुरू हुआ था । जब होस्टल पढने गई तब से ,,क्यो होस्टल से क्यो? प्रो सहाब पुछे। मानस मैं ज्यादा तो नही जानती पर इसकी एक वजह है जिसे मैने महसुस किया है वो है जीवन में अकेलापन ,,किसी चीज की चाहत का होना और चाहत का अपने जीवन में नही होना ,यह भी एक कारण हो सकता है या इंसान किसी से कुछ कहना चाहता है पर उस व्यक्ति पर विश्वास नही कर पाता है ,तब अपनी कल्पना की दुनियां में उसके साथ दूर तक निकल जाता है। उसके विचार को लेकर एक संसार बना लेता है और उस संसार में जीने लगता है । आनंद क्या तुम्हारे साथ भी ऐसा होता है ? जैसा तुम्हारी सुचित्रा मैम के साथ होता है । अ चुकी इस प्रश्न के लिए तैयार नही था वह थोडा घबड़ा गया और घबडाते हुए उसके मुख से निकल गया यस सर बिलकुल ऐसा ही होता है । इतना बोलते ही जीत उसके भीतर से निकल कर उसके गाल पर एक चांटा जोर से मारा उसके कान में चांटे की आवाज गूंज गई उसका हाथ अपने गाल पर चला गया । तभी जीत की आवाज उसके कानो के परदे से टकराई अबे साले चुतिया कही के तेरी ली जा रही है और तु खोल के दिये जा रहा है । तेरे भेद का यह दोनो मिल कर भेदन कर रहे है । हावडा ब्रिज बना कर तुझे हवा में लटका देंगे । साले हवा में झुलते रहियो, इडिट अब भी संभल जा, इनको अपनी बात में लपेट जंगल पहाड की कहानी में भटका इनको । आनंद कहां खो गये तुम प्रो सहाब उसका हाथ पकड कर झकझोरते हुए बोले । अ,,आ,,हा,,हा सर सारी सर मैं खो गया था । मैम थोडा परेशान हो कर बोली तुम ठीक तो हो आनंद । जी मैम मैं ठीक हूं । देखो हम आदिवासियो के बस्ती में आ गये । अ ने सामने देखा तो आदिवासियो के उजडे हुए घर थे । आधे जले हुए घर थे । जिसे देख अ ने कहा मैम अब यहां कोई नही रहता। क्यो क्या हुआ ? मैम उत्सुकता से पुछी । प्रो सहाब कैमरा से तस्वीर लेने में व्यस्त हो गये दना-दन चार पांच तस्वीरें टूटे जले घरो की ले डाली । फिर अ के तरफ देखा जैसे वह भी यह जानना चाहते है कि आदीवासी यहां से कहां चले गये ? अ ने कहा मैम आदिवासियो में एक जनजाति है विहरोह जब उसके घर मैं कोई मर जाता है तो वो लोग उस घर को, जगह को छोड कर चले जाते है ।यहां भी वही हुआ है । वो ऊंचा टीला देख रही है जिस पर एक बडा सा पत्थर रखा हुआ है ,वहां जमीन के भीतर कोई इनका अपना सो रहा है। इसलिए अब वो लोग कही रहने के लिए चले गये । ऐसा क्यो करते है यह लोग ? सर बस यह मानते है कि जहां कोई लोग किसी घर में मर जाते है वहां उसका भूत रहने लगता है ।इसलिए उस घर को छोड कर चले जाते है । तुमने अच्छी जानकारी दी आनंद ,थैंक्स, मैम ने कहा ,तभी सर बोले क्या हम लोग उस ताल के पास जा सकते है । हा सर आईये ,अ बोला और ताल के तरफ चलने लगा थोडी दूर में एक बडा सा ताल था जिसके किनारे बगुले धीरे धीरे चहलकदमी कर रहे थे ।कदमों की आहट सुन उनके पंख हवा में फड़फड़ाये और दूसरे ही पल उनका झुंड झील के पानी के उपर उड़ता उनकी ऑखों के सामने से दूर जाता दिखाई दिया । यह देख सुचित्रा बोली मानस जल्द फोटो खीचो । मानस ने दो चार तस्वीर पानी पर उडते हुए बगुले की ले ली । तभी मैम का ध्यान उन कमलों के फुलो पर चला गया जो ताल के पानी के उपर हवा में डांस कर रहे थे । मैम तपाक से बोली मानस मुझे वो कमल के फुल चाहिये । प्रो सहाब ने तुरंत कैमरा फुल पर फोकस किया और दो चार तस्वीर कमल के फुलो की खीच ली । फोटो लेने के बाद बोले सुचित्रा घर चलो प्रिंट करवा कर फुल तुम्हे दे दूंगा । नही मानस मुझे तुम वह फुल ला कर दो । ओह गाॅड तुम जानती हो की मैं बहुत देर तक पानी में तैर नही सकता मेरा दम फूलने लगता है,,साॅरी सुचित्रा। यह सुन अ मन ही मन सोचा यह काम मेरे लिए तो सबसे असान है ,तभी जीत उसके भीतर से बोला । अबे ज्यादा हिरो हीरा लाल बनने की जरूरत नही है। चुप चाप खडा रह । नही मै पानी में जा रहा हूं । अबे कमीने कपडे कहां है ? क्या भीगे कपडे पहन कर वापस घर जायेगा ? कपडे उतार कर पानी मे जाऊंगा ,,,तु चुप कर जब देखो बिना बुलाये चला आता है और अपनी चोंच खोल पटर_ पटर करने लगता है । अब चुप कर भूतनी के । मै पानी में जा रहा हूं । अ ने अपनी शर्ट उतारी और पानी में जाने जाने लगा तभी मैम और सर दोनो किनारे हे चीखने चिल्लाने लगे आनंद वापस आ जाओ गहरे पानी में मत जाओ ।सर कुछ नही होगा मै मैम के लिए फुल ले कर आता हूं ,,और आनंद पानी में तैरते हुए फुल के तरफ बढ़ने लगा । आज इतना ही
आप सभी का बहुत बहुत आभार ।❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
रवि कांत मिश्र
🙏🙏🙏🙏🙏

Comments
Post a Comment