सफर अभी बाकी है ,,,,,
स्कूल की छुट्टी होते ही । अ जीत के साथ साईकिल ले कर घर के तरफ निकल गया । जीत उसका मुड ठीक करने के लिए बोला देख बे तेरे साथ कोई समस्या नही है समस्या तेरे सोचने के स्टाइल में है । तु सोचता दिल से है और दिल से सोचने वाले अक्सर दिमाग से सोचने वालो दुनियां में फ़ेल हो जाते है । यह वर्ल्ड है ना वर्ल्ड इसमे दो तरह के लोग रहते है । तु दूसरे तरह के लोगो में शामिल है । जिनकी संख्या बहुत कम है । देख तु तो लकी है कि तुझे दोस्त वो भी मेरे जैसे दोस्त मिल गया । नही तो तुम जैसे लोग बिना दोस्त के ही इस दुनियां जीते है और निकल जाते है । अ कुछ नही बोल रहा था बस अपनी साईकिल के पैडल पर पैर मारते हुए यह सोच रहा था कि उसे मैम के पास जाना है । यहां से नर्सरी जाने और आने में एक घंटे लग जायेगे । अभी बजे है चार ,यानी पांच बजे तक आ जाऊंगा अगर घर नही जा कर सीधा नर्सरी जाता हूं तब ,अगर घर जा कर फिर नर्सरी जाऊंगा तब बजेगा छः नही यह ठीक नही होगा। अ ने अपने साईकिल की रफ्तार तेज कर दी यह देख जीत बोला अबे मैम के घर जाने से पहले याद रखना वो देवदास वाला लुक बेटा ऐसे लुक नारी के मन में करूणा पैदा करती है और करूणा से प्रेम का जन्म होता है । जीत अपनी साईकिल अ के बार-बार तेज चलाते हुए बोला । देख अगर तु सोच रहा है कि मैं तेरे साथ जा रहा हूं तो तु सही सोच रहा है । बेटा मै तुझे इस हालत में अकेला नही छोड सकता आज चाय पकौड़े अन्ना के ताजपेलेस में करेगे । क्या बोलता है । अ फिर चुप रहा पर मन ही मन उसे फील हुआ की जीत को भगवान मेरे लिए ही पैदा किया है इस लिए मुझ से पहले दुनियां में आ गया। यह सोच उसका मन हल्का हो गया । उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। मुस्कान देख जीत बोला चल सुबह से ग्रहण लगी हुई थी अब जा कर छुटी ,,,,मां कसम यार तु जब चुप होजाता है ना तो बडा ही भयानक लगता है । ऐसा लगता है कि कभी भी एक धमाका होगा और सब चिथड़ा चिथडि हो जायेगा। साले बडी आग है तेरे भीतर तु सचमुच कोई धमाका करेगा ही । पर अच्छा धमाका करना । अ बोला जब तक तु मेरे साथ है तब तक मै कही भटक सकता हूं क्या । अबे भटकेगा तो बेटा मै तुझे खोज कर सही राह पर लगा दूंगा। आखिरी अपनी भी जोडी है यार जय और वीरू की तरह ,,जीत हवा मे हाथ लहरा कर बोला और फिर उसने गाना शुरू कर दिया यह दोस्ती हम नही तोड़ेगे तोड़ेगे दम मगर तेरा साथ नही छोड़ेंगे। तेरी जीत मेरी जीत तेरी हार मेरी हार ऐसा अपना प्यार ,,वो शाम सूरज डूब रहा था और दो दोस्त दोस्ती को जीते हुए हाईवे के सडक पर मस्ती में साईकिल चला रहे थे । अ सोच रहा था कहते है कि भगवान जिसे बहुत चाहता है उसको सच्चा दोस्त दे कर बेलेंस करता है । जिसके पास सच्चा दोस्त है वह इस दुनियां का सबसे धनी आदमी है । चाहे वह गरीबी में जी रहा हो पर वह बहुत दिनो तक गरीब नही रह सकता । दोनो की साईकिल हाईवे के पास बनी एक नर्सरी के गेट के पास आ कर रूकती दोनो के चेहरे पर एक चमक थी । चेहरा और शरीर पसीना से भीग चुका था । पर दोनो की ऑखों में उत्साह था एक दूसरे के लिए जीने की इच्छा थी । गेट पर साईकिल खडा कर दोनो नर्सरी के भीतर गेट खोल कर घुस गये । तभी एक कुत्ता इन दोनो को देख कर भौंकना शुरू कर दिया । दोनो का ध्यान बगल वाले शेड में बंधे कुत्ते पर गया काला रंग का भारी जबड़े वाला कुत्ता बाहर इंच का जीभ बाहर निकाल कर भौकते जा रहा था । गनीमत था कि कुत्ता मोटी जंजीर से बंधा हुआ था । जीत यह देख कुता को डांटते हुए बोला शटअप ,,कुता और जोर से भौंकना लगा। अ ने कहा अबे यह कुता अंग्रेजी नही समझता है । हिंदी बोल ,,तभी कुता और नर्सरी का मालिक एक काला भुजंग तरबूज जैसे गोल सिर वाला लंबा चौडा आदमी जो अपनी उल्लू जैसी ऑखों से घुरते हुए सामने के शेड से बाहर निकला और जोर से चीखा क्यो बे कुता चोरी करने आये हो । यह सुन जीत बोला नीम का पौधा खरीदने आये ,कहा से आये हो भुजंग एकदम सामने आते हुए बोला । सामने भुजंग को देख दोनो को लगा कि वो दोनो गुलिवर के सामने खडे है ,दोनो गरदन उठा कर उसकी तरफ देख रहे थे । भुजंग ने फिर प्रश्न किया ,बताया नही कि कहां से आये हो । जीत ने अकड कर कहा थाने से आये है इनके पिता अ की तरफ इसारा करते हुए यहां के थानेदार है उनको नीम का पौधा लगाना है । यह सुन भुजंग तुरंत डरपोक कुते की तरह रूप में पूंछ हिलाते हुए बोला अरे भाई पहले बोला होता । आओ आओ भीतर चलो मैं नीम का पेड देता हूं । पेड नही पौधा चाहिये हमे ,जीत अकड कर बोला । हा हा पौधा ही दूंगा। कुता अपने मालिक को देख चुप चाप हो गया था अब वह फर्श पर लोट पोट हो रहा था ।अ समझ गया कि यह सब कुछ थानेदार के नाम पर होरहा था । जीत चलते चलते पुछा यह कुत्ता कहां से लाये ?अरे सर कुत्ता खरीदे है पांच हजार में । किससे खरीदे है ? एक आदमी आया था बेचने के लिए । पर आप क्यो पुछ रहे है । वो थोडे दिन पहले थाना में एक कुत्ता चोरी होने की रिपोर्ट एक अमीर आदमी ने लिखाई थी ।अ तुझे याद है ना थानेदार अंकल उस दिन कितना परेशान थे ,कुत्ते की तस्वीर भी दिखाई थी उस कुते का रंग भी काला था । शक्ल कुछ इस कुत्ते की तरह था । क्यो बे आनंद तु बता उस फोटो से इस कुत्ते की शक्ल मिलती है कि नही अ चुप रहा उसे चुप देख जीत पैतरा बदला यह बहुत जल्द भूल जाता है पर मुझे पुरा याद है ,,यह कुत्ता वही कुत्ता है ।यह सुन भुजंग का तेल निकल गया वह डरते हुए हाथ जोड़ कर बोला बाबू लोग यह बात किसी को नही कहना कि मेरे पास काला रंग का कुत्ता है । तभी अ बोला आपको डरने कोई जरूरूत नही है । आप हमे नीम का पौधा दे दे । हा हा यह लिजिये नीम का पौधा एक नीम का पौधा भुजंग हाथ में लिए खडा हो गया । अ ने उसे बैग खोल कर डाल लिया । नीम का पौधा लेते ही उसे मैम के कहे शब्द उसके कानो से टकराये , कोई जरूरूत नही है नीम का पौधा लेने की,, और हा घर पर आने की जरूरूत नही है । अ नीम के पौधे को देख ठिठक गया था। अब तक जीत की बातो में वह भूल गया था ।तभी जीत बोला अबे सोच मत चला जा ,जो होगा झेल लेना , हा साबू अंकल कितने रूपये हुए । भुजंग हाथ जोड़ कर बोला क्या बात कर रहे बाबू आपसे मै नीम के पौधे का दाम लूंगा । दाम नही लोगे तो हम कुत्ता वाली बात बता देंगे जीत फिर अकड़ते हुए बोला । यह सुन भुजंग बोला दस रूपये दे दो बाबू । अ ने दस रूपये निकाल कर भुजंग के हथेली पर रख दिये । जीत उसकी तरफ देखते हुए बोला अगली बार हम लोग आये तो कुत्ते को समझना देना हमे देख कर ना भौके। जी बाबू आप लोग इसी तरह आते रहेंगे तो आपको पहचान जायेगा। और हां अब चोरी का कुत्ता खरीदने की कोशिश मत करना । जी बाबू कभी नही ,,यह गलती कभी नही होगी । भुजग हाथ जोड़ कर बोला ,जीत और अ ने हाथ जोड़ कर भुजंग को नमस्ते की और गेट से बाहर निकल गये सूरज डूब चुका था पर अभी थोडी रौशनी बाकि थी ,,दोनो शहर के तरफ तेजी से निकल पडे । रात हो चुकी थी शहर की लाईट जल चुकी थी अ और जीत दोनो मैम के गेट के सामने स्ट्रीट लाईट के नीचे खडे थे । जान बुझ कर खड़े थे कि मैम का ध्यान बाहर के तरफ जाये तो उनको वो दिखाई दे जाये । काफी देर तक दोनो खडे रहे पर मैम का ना दरवाजा खुला ना बाहर बरामदे की लाईट जली ।तो जीत बोला देख बे अब तु भीतर जा और मैम से मिल ।मै यहां खडा हूं । अगर मैम ने तुझे बुला लिया तो मैं घर चल जाऊंगा अगर नही बुलाये तो मै तो यही खडा हूं,,,, जा अब देर मत कर । जीत मै आता हूं इतना बोल कर अ गेट खोल कर भीतर चला गया। धीरे धीरे चलते हुआ बरामदे के पास पहूंच गया तभी खिडकी के पास देखा तो मैम घर के भीतर खिडकी के पास लाईट बंदकर खडी थी । सब कुछ बहुत देर से देख रही थी । अब भी चुपचाप खडी हो कर देख रही थी । अ ने कुछ नही कहा बैग खोल कर नीम का पौधा बाहर निकाल लाया और पौधे को जमीन पर रख दिया और इधर उधर देखने लगा तभी गार्डन में फावड़ा रखा हुआ दिखाई दिया। अ ने फावड़ा उठा लिया जीवन में पहली बार फावड़ा उठाया था । भारी था अ ने मैम के तरफ देखा तो अब भी खिडकी के पास खडी थी । अ समझ गया कि मैम अपने फैसले पर कायम है । कोई बात नही पर आज मैं यह पौधा यहां लगा कर ही जाऊंगा । जीत बाहर खडा सब देख रहा था अब उसे भी एक साया खिडकी के पीछे खडा दिखाई देने लगा था । अ ने जैसे ही फावड़ा उठा कर धरती पर मारना चाहा तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और इसी के साथ बरामदे की लाईट जल गई । मैम नीली सूट सफेद दुपट्टा डाले में सामने खडी थी । अ मैम के तरफ देखा फिर अपनी नज़र नीचे कर ली । फवाडा जमीन पर रख दिया । यह देख जीत अपने आप से बोला चल बेटा अपना काम यहां खत्म हुआ । दोनो आमने सामने आ चुके है । मुझे यहां से निकल जाना चाहिये । जीत धीरे से निकल गया । मैम अब भी चुपचाप खडी थी अ से यह खामोशी अब और सहन नही हुई । वह पौधा उठा कर मैम के पास चला गया मैम के पैर के पास पौधे को रख दिया जेब से रूपये निकाले उसे भी पौधे के पास रख दिया । उठ कर सीधा खड़ा हुआ और मैम के तरफ हाथ जोड़ कर बोला मुझे माफ मत कीजियेगा ,,नही तो मैं फिर वही गलती करूगा। इतना बोल तेजी से पल्टा और गेट के तरफ तेजी से चलाने लगा । मैम चुप चाप खडी उसे जाते हुए देख रही थी ,,उसके कानो में अ के शब्द बार बार गूंज रहे थे मुझे माफ मत करना ,नही तो मै फिर वही गलती करूगा। अ गेट के बाहर निकल गया । पलट कर गेट जब बंद कर रहा था तब मैम के तरफ अ देखा तो मैम उसी तरह अपनी जगह खडी थी । अ ने अपनी साईकिल ली और वहां से तेजी से निकल गया । थोडी दूर जा कर देखा तो मैम बरामदे की लाईट में वैसे ही खडी थी । अ धीरे से बोला गुड बाॅय मैम। इतना बोलते बोलते उसकी ऑखों में खारा पानी तैरने लगा । अ ने जोर से साई किल के पैडल पर पैर मारा और तेजी से घर के तरफ निकल गया।आज इतना ही
सभी मित्रो का आभार
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏रवि कांत मिश्र 🙏🙏🙏🙏

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