सफर अभी बाकी है

अ तेजी से भागता हुए मैम और सर के पास पहूंच गया था । मैम बोली बैठो आनंद हम लोग कुछ खा लेते है । अ चुपचाप मैम और सर के बीच में बैठ जाता है फिर उसे एहसास होता है कि उसे बीच में नही बैठना चाहिये वो अपनी जगह बदलने के लिए उठने लगता है तो सर बोलते है क्यो उठ रहे हो ? वो सर मैं ,,वहां बैठ जाता हूं । तुम यही बैठै आनंद मैम गाजर का हलुआ कागज के प्लेट में निकालते हुए बोली । मैम कि बात सुन अ वही बैठ गया । सर अपने बैग से चाय की थरमस निकाल कर उस काले से चिकने से शिलाखंड पर रख दिये । अ ने अपने बैग से दादी की दी हुई केक और बिस्किट निकाल कर पत्थर पर रखते हुए बोला सर मैम यह केक मेरी दादी ने बनाया है । सर मैम दोनो एक साथ बोले वाह हम तो जरूरू टेस्ट करेगे । तुम यह लो गाजर का हलुआ । मैम प्लेट अ के तरफ बढा दी । अ प्लेट हाथ में लेकर कर मैम और सर के तरफ बारी बारी से देखा तो दोनो उसकी तरफ देख रहे थे । मैम बोली हमे बहुत खुशी हो रही है कि हम दोनो तुम्हारे साथ अपना समय शेयर कर रहे है तुम सचमुच बहुत अच्छे हो । आज का दिन हम दोनो कभी नही भूलेगे।तुमने आज हम दोनो को एक ऐसा दिन गिफ्ट किया है जिससे हम लोग हमेशा संभाल कर रखना चाहेंगे। खास कर कमल के यह तीन फुल। इसकी तस्वीर हम तुम्हे भी देना चाहते है । क्या तुम्हे तस्वीरों को रखने पसंद है । सर अ से पुछे । हां सर मुझे तस्वीर रखने का शौक है । मेरे पास बहुत सारी तस्वीर है जिसमें मै अपनी मम्मी के साथ हूं अपने पाप के साथ खेल रहा हूं। दादी के साथ बैठा हूं । मम्मी हमेशा कहती थी की तस्वीरें हमारी दोस्त के तरफ होती है । जब कभी अकेलापन सताने लगे तो तस्वीर देख लेना ,,तुम अपना अकेलापन भूल जाओगे । जानते है मैम मम्मी को लैटर लिखने का शौक था । वह मुझे पापा और खुद को भी लैटर लिखती थी । उनके लैटर आज भी मैं पढता हूं । क्या तुम भी लैटर लिखता हो आनंद , मैम बीच में अ को रोकते हुए पुछ ली ? अ इसके लिए तैयार नही था,,अचानक उसके मुहं से निकल गया यस मैम ,,,,तभी जीत भीतर से चीखा अबे रोक अपने को तु अपना सीक्रेट बता दिया,,अब चुप रहना । सर अ पुछे  क्या तुम अपने पापा को लैटर लिखता हो ? बहुत कम लिखता हूं क्यो कि पापा से फोन पर बात हो जाती है। तो फिर किसे लिखते हो ? मैम बडी उत्सुकता से पुछी ,,जीत फिर मन के भीतर चीखा अबे चुप हो जा, झूठ बोल दे अपना सीक्रेट मत बता । अ दो पल के लिए चुप होगया,,उसे चुप देख कर सर और मैम एक दूसरे के तरफ देखे दौनों के बीच मौन संवाद हुआ । फिर सर बोले सुचित्रा अ का पर्सनल मैटर है उसे पर्सनल ही रहना चाहिये । सॉरी आनंद हम लोग कुछ ज्यादा ही पर्सनल सवाल कर  गये । नही मैम सॉरी की कोई बात नही है, दरअसल मुझे भी अपनी मम्मी की तरह लैटर लिखने की आदत है । बहुत अच्छी आदत है ,,,सर बीच में तपाक से बोले दरअसल सुचित्रा को लैटर लिखने की आदत नही है । वो तो बस फोन पर बात करती है । अब मानस तुम सात दिनो बाद रांची से यहां आ ही जाते हो तो क्या लैटर लिखु । यह भी ठीक बात है ,,ऐसा करता हूं कि मै अपनी पोस्टिंग यहां से दूर करवा लेता हूं सिलोन कैसा रहेगा ? हां तब मैं तुम्हे लैटर लिखुगी । दरअसल इससे यह साबित होता है कि व्यक्ति उसे लैटर लिखता है जो उससे दूर हो ,,और उस के दिल तक अपनी दिल की पहुंचना चाहता हो ।दूर हो कर भी  उसके एहसास को अपने भीतर समा लेना चाहता है । क्यो आनंद सही कह रहा हूं ना,,, जी सर जी यही होता है । अबे चुप चौपटानंद मुर्खभंडारी यह लोग बात निकलवा रहे समझ इनकी चाल को ,,जीत मन के भीतर एकदम से चीखा । अ चुप होगया । मैम उसे चुप देख कर बोली हमे टापिक चेंज करना चाहिये । नही मैम इसकी कोई जरूरूत नही ,,हम लोग बात कर सकते है । आप सभी की बात सुन कर मैं भी कुछ कहना चाहता हूं  । हा बोलो आनंद सर बोले,,अ एक बार सर की तरफ एक बार मैम कि तरफ देखा फिर  मैम की तरफ देखते हुए बोला ,,मै उस डाकिया का इंतजार  करता हूं कि एक दिन वह आयेगा और मेरी सारी चिठियां ले कर चला जायेगा । फिर कुछ दिनो बाद जब वह जवाब ले कर वापस आयेगा तो उस जवाब में मेरी मां की भी चिठी होगी । क्या मैम ऐसा कोई डाकिया है जो अपने से दूर गये लोगो तक खत पहूंचा दे और जवाब ले आये। यह सुन सर और मैम दोनो स्तब्ध रह गये।अ इतना बोल कर सर के तरफ देखा फिर मैम की तरफ देखा तो दोनो उसकी तरफ देख रहे थे । दोनो की ऑखों में हल्का सा खारा पानी तैरने लगा था । जिसे मैम और सर दोनो ने छुपाते हुए बोले आनंद तुम असदाहरण हो । दोनो के मन से एक ही वाक्य निकला । आनंद यह सुन हल्का सा मुस्कुरा दिया ।बातो ही बातो में समय का पता ही नही चला सूरज अस्त होने की दिशा के तरफ चलने लगा था । यह देख मैम बोली अब हमे वापस लौटना चाहिये । जी मैम सूरज डूबने से पहले हमे शहर पहूंच जाना चाहिये । तीनो अपनी जगह से उठे और ताल के पानी मे हाथ धोये,,पानी बहुत ही ठंढा था।  जिसे छु कर मैम का यह एहसास हुआ कि आनंद ने कमल फुल लाने के लिए कितना ठंढं को झेला  होगा । एक बार आनंद के तरफ देखी जो अपना टिफ़िन पानी में धो रहा था । उसका पुरा ध्यान उसके काम पर था। मैम के मन से आवाज आई कितना मासूम है और उससे कहीं अधिक मासूम इसके सवाल है । जी करता है इसका सिर अपने दामन में छुपा लूं । क्या सोच रही हो सुचित्रा , सर की आवाज पर सुचित्रा चौकी ,,वो मै भी अपने विचार में खो गई थी । चलो वापस चलो शाम उतरने वाली है । मैम ने देखा तो आनंद और सर दोनो चलने को तैयार थे । मैम ने अपना छोटा सा बैग कन्धे पर रख सर के पीछे पीछे चलने लगी ,,तीन पंछी शाम होने से पहले अपने घोसले के तरफ निकल पडे थे । अ एक बार पीछे पलट कर देखा तो वो बडा सा ,काला सा चिकना सा गोलाकार पत्थर ,उसे हाथ हिला कर विदा करता हुआ दिखाई दिया , जैसे कह रहा हो की आभार तुम सभी का,,, तुम्हारी बातो का ,,तुमने मुझे अपने रंग में रंग दिया ,,तीन आत्माओं के तरंग मुझ में समाहित हो गये । मेरे भीतर तुम्हारी यादे धड़कती रहेगी । कभी इस याद को फिर से जीने जरूरू आना ।मुझे तुम तीनो की प्रतिक्षा रहेगी।अ उस पत्थर की बात सुन कर हल्का सा मुस्कुरा दिया । मन ही मन बोला जरूर आऊंगा तुमसे मिलने।  इतना बोल कर वह आगे को तरफ मुड़ा और मैम के साथ साथ चलने लगा। शाम धीरे धीरे दबे पांव धरती पर उतर रही थी ।रात ग्रीन रूम में अपना श्रृंगार करने लगी । जिन्दगी के तीन पंछी अपने अपने हिस्से में आये एहसास के फुलो को समेटे अपने अपने  राह पर आगे बढते जा रहे थे । तीनो साथ थे और तीनो अपने आप में अकेले भी थे । कितना रहस्य छुपा होता है हमारे मन के तलों में,, जो जीवन के तार बाहर से भीतर और भीतर से बाहर जुडे होते है उन्हे हम समझने की कोशिश करते है और किसी हद तक समझ भी जाते है । पर जो तार हमारे अवचेतन से बाहर नही आते वो किसी अमर बेल की लता की तरह हमारे अवचेतन मन से लिपटे होते है जिसका कोई आरंभ और अंत दिखाई नही देता। जिन्दगी इस लिए जीने के लिए प्रेरित करती है कि वह सदा अधूरी प्यासी और अन बूझ है जैसे अ मैम और सर तीनो के अवचेतन में एक दूसरे के तार जुडे हुए है पर वो अनबुझ से उसे समझा नही जा सकता सिर्फ महसुस किया जा सकता है। आज इतना ही ,,वो तीनो घर जा रहे है जहां रात उनकी प्रतीक्षा में है आप भी थोडी प्रतिक्षा करे ,हम मिलते एक विराम के बाद ।
आप सभी मित्रो का आभार धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए महत्वपूर्ण है । कृपा कर blog  पर प्रतिक्रिया करे । हमारे इस कहानी की यात्रा में एक सदस्य का आगमन हुआ है । छवि दास जी ,,उनका स्वागत है ।
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤🙏🙏रवि कांत मिश्र
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