सफर अभी बाकी है

26 नंबर एपिसोड 
 आधी रात बीत चुकी थी सुचित्रा मैम के बंद घर में टेलिफोन की घंटी लगातार बज बज कर चुप हो जाती है । अ अपने घर से टेलीफोन लगा लगा कर परेशान हो रहा था । छोटी मां अ के इस हरकत पर अपने कमरे से नज़र रखी हुई थी। अ परेशान हो कर चुप चाप बैठ गया ।उसकी समझ में नही आ रहा था कि मैम फोन क्यो नही उठा रही है । हजार तरह की नेगेटिव विचार उसके मन को डसने लगे। वह कुछ पल तक चुपचाप पडा रहा फिर उसे उसने जीत को फोन लगाया।  फोन जीत के पापा ने उठाया भारी आवाज में बोले हैलो कौन ,,आवाज सुन कर अ डरते हुए बोला अंकल जी मैं जीत का दोस्त आनंद बोल रहा हूं । इतनी रात गये तुमने क्यो फोन किया ,क्या इमरजेन्सी आ गई । वह अंकल जी मुझे जीत से बात करनी है । इतनी रात गये क्या बात करनी है ? मुझे बताओ मैं जीत को बोल दूंगा। अंकल मुझे उससे ही बात करनी है ।वह गधा सौ रहा है और सोते हुए गधो को मैं नही उठाता ,,अब बोलो तुम्हे क्या बोलने हैं ।अंकल गुड नाईट । गुड नाईट सौ जाओ । इतना बोल अंकल फोन काट दिये । अ और परेशान हो गया।
 वर्षा से अ कि परेशानी देखी नही गई । वह अपने रूम से निकल कर लिविंग रूम में आ गई।अ के सामने वाली सोफे पर बैठ गई । अ अपने सामने छोटी मां को देख कर थोडा चौक गया । और बोला आप ,,,अभी तक सोई नही । तुम क्यो जाग रहे हो और इतने परेशान क्यो हो ? छोटी मां ने उलटा प्रश्न कर दिया। देखिये मै आपको बता नही सकता । ठीक है मत बताओ पर तुम्हे परेशान होता हुआ देख कर मुझे अच्छा नही लगता है ,,मै क्या करू बहुत देर से तुम्हे परेशान होता हुआ देख रही थी । अपने आप को तुम्हारे पास आने से रोक नही पाई । अ यह सुन कर इतना ही बोला मै अपनी मैम को फोन लगा रहा हूं वह फोन रिसीव नही कर रही है । फिर मैं अपने दोस्त से फोन पर बात करना कहा, तो उसके पापा ने कहा वह सो गया है । समस्या क्या है यह बताओ छोटी मां पुछी । मैम से बात करनी थी । इतनी रात गये मैम से बात क्या बात करनी है ? यह सुन अ चुप हो गया । सिर झुका कर बैठा गया । छोटी मां फिर पुछी देखो तुम्हे अगर कोई समस्या है तो मुझे बताओ।चलो अपनी छोटी मां को नही बता सकते तो मुझे अपना गाईड समझ कर बताओ । पहली बार अ की नज़र छोटी मां  के तरफ उठी तो उठी रह गई । इस गाईड शब्द ने उसके मन में एक नये रिश्ते की दस्तक दे डाली थी । अ चुप ना रह सका।  उसने कहा मैम से बात नही हो पा रही है इसलिए तनाव हो रहा है । बात कर लूगा तो सब ठीक हो जायेगा। ओके चलो एक बार फिर फोन करो छोटी मां बोली । नही फोन खराब है या घर पर कोई नही है । घंटी जा रही है कोई उठा नही रहा है । ठीक है मैं ट्राई करती हूं नंबर बताओ । अ एक मिनट के लिए झिझका फिर उसे लगा शायद मैडम फोन लगाया तो फोन मैम उठा भी ले लक की  बात है । अ ने नंबर बता दिया । फोन की घंटी बजी और फोन उठा लिया गया । दूसरी तरफ से मैम की आवाज थी हैलो ,,छोटी मां फोन पर बोली प्लीज होल्ड करे आनंद बात करेगे । आनंद तेजी से फोन छोटी मां के हाथ से लिया तो छोटी मां अ के उतावले पन को देख हल्का सा मुस्कुरा दी । अ उतेजना में बोला मैम आप कहां चली गई थी मै कब से आपको फोन कर रहा था । अ की आवाज सुन मैम अच्छा लगा उदास चेहरे पर चमक लौट आई । ताले चाभी को टेबल पर रखते हुए बोली । आनंद मैं शहर से बाहर गई हुई थी । अभी अभी वापस घर आई हूं और तुम्हारा फोन आया है । तुम कैसे हो ? मैम मैं ठीक हूं आप इतनी रात गये वापस घर लौटी है सब ठीक तो है । यह सुन मैम दो पल के लिए चुप हो गई । तभी उसके भीतर की मैम ने कहा उसे कुछ मत बता उसकी परीक्षा है वह डिस्टर्ब हो जायेगा । हैलो मैम आप , सुन रही है ना हैलो मैम ,,छोटी मां अ के चेहरे पर आये बैचैनी को साफ साफ महसुस कर रही थी । उसके मन में जलन होने लगी । इसके साथ ही यह इच्छा मचलने लगी की आनंद कब मेरे लिए इतना बैचैन हो कर फोन करेगा । हाऊ मच शी लकी , यह आनंद की मैम कैसे आनंद के लिए इतना important हो गई । मैं इतना lmportant कैसे हो सकती हूं । हैलो मैम तभी फोन कट हो गया । छोटी मां बोली क्या हुआ ? आनंद बोलो लाईन कट गई । बोर्डर एरिया है यहां ऐसा अक्सर हो जाता है । आनंद फिर फोन करने कि कोशिश की पर फोन नही लगा । छोटी मां बोली अब तो खुश हो जाओ कि तुम्हारी मैम से तुम्हारी बात हो गई । आनंद थैंक्स आपने फोन लगाया और मेरी बात हो गई । छोटी मां कुछ नही बोली सिर्फ अ के तरफ देखती रही। अ अपने तरफ छोटी मां को देखता पा कर थोडा असहज होते हुए बोला क्या मुझ से कोई गलती हो गई । छोटी मां कुछ नही बोली सिर हिला कर ना बोली और उठ कर अपने कमरे के तरफ चली गई । आनंद छोटी मां को जाते हुए देखता रह गया। उसकी समझ में नही आया की आखिर उनको क्या हो गया?
मानस अपने घर के छत पर रेलिंग के पास खडा था । छत पर एक टेबल पर शराब की आधी खाली बोतल और आधी भरी हुइ गिलास रखी थी एक प्लेट में चिप्स के बिखरे पडे हुए थे उन मे से कुछ प्लेट के नीचे टेबल पर  गिरे उपर आसमान के तरफ देख रहे थे । मानस भी आसमान के तरफ देख रहा था । रहस्मय तारो कि दुनियां में अपने जीवन को समझने की कोशिश कर रहा था । उसके भीतर से सुचित्रा बोली जिस सुचित्रा को तुमने पाया था उसे तुमने खो दिया और जिस सुचित्रा को तुम पा ना सके वह तुमसे दूर हो गई । हा सूचि मानस बोल पडा आज तुम्हारे जाने के बाद तुम्हे खोने का एहसास मुझे बैचैन कर दे रहा है । कभी सोचा ना था कि तुम इस तरह मुझे छोड कर एक दिन चली जाओगी । मै तो यह सोचता था ,,,इस बात पर विश्वास करता था कि चाहे कुछ भी हो जाये तुम मुझे छोड कर नही जाओगी । अपने से कही अधिक मै तुम पर भरोसा करता था । आज वह भरोसा टूट गया लगता है ।पर यकिन नही होता कि भरोसा टूट गया है । लगता है अभी तुम वापस आ जाओगी और मुझे माफ कर दोगी । इतना बोल मानस छत के नीचे देखते है । नीचे सुनसान सडक है । जिस पर आवारा कुते भटक रहे है । स्ट्रीट लाईट की रौशनी में सब कुछ किसी जादू सा लग रहा है । मानस वापस टेबल के पास आया और अपना आधा भरा गिलास उठा कर उसे देखा और एक झटके में उसे खाली  के गले के  नीचे उतार लिया। गिलास वापस टेबल पर रख पास रखी कुर्सी पर बैठ गया । तभी उसके भीतर सुचित्रा फिर बोली मानस सब खत्म हो गया है । फिर भी कुछ है ऐसा जो हम चाह कर भी खत्म नही कर सकते । जैसे लाश जब जल कर राख में बदल जाती है तो उस राख को उसी पानी में प्रवाहित करना पडता है जिसे हमे रोज पीना पडता है । हम रोज अपने दिल में अटके  हुए  अतीत के पलों को जीते है , हमे जीना पडता है।तुम अपने पलों को जीओ मैं अपने पलों को जीऊगी । हमारे भीतर जो खाली जगह है । उसमे हम दोनो को भटकना है।  तुम ठीक कहती हो सुचि ,,मानस बुदबुदाया । फिर जोर से बोला।सुचि मैने वही किया जो मुझे लगा कि मुझे करना चाहिये पर आज वह मुझ में वो अपराध भाव बन कर बार बार उभर रहा है । क्यो ? क्या मैने गलत किया और किया तो पहले यह एहसास क्यो नही हुआ।  नही हुआ था पहली बार उस लडकी को जब छुआ था तो अपराध भाव जगा था । पर भूख ने ,मेरी उस भोग की लालसा ने उसकी आवाज को सुना ही कब था । दबा दिया था उसका मुहं उस अंधेरे अवचेतन के तलघर में , ,,जहां से फिर उसकी आवाज जब भी आई मैने हर बार अन सुना कर दिया था । इतना बोल मानस रूका और बोतल के तरफ देखा फिर बोला सच तो यह है कि मैं प्यार को समझता हूं बहुत अच्छे तरह से समझा भी सकता हूं पर तुम सुचि प्यार को जीती हो । इस लिए मेरे पास आ गई थी और फिर चली गई । तुम सही हो सुचि तुम बिलकुल सही हो । इतना बोलते हुए उठा शराब की बोतल उठाई पुरा का पुरा बोतल खाली कर दिया। बोतल टेबल पर रख छत से नीचे जाने वाली जीने के तरफ चल पडा । 
सुबह करीब सात बजे दरवाजे पर खट खट की ध्वनी हुई मैम ने दरवाजा खोला तो सामने जीत खडा था । मैम को देखते ही बोला good morning mam . Good morning जीत आओ भीतर आओ । भीतर कदम रखते ही जीत को पुरा घर कबाड़ खाने जैसा लगा । दिवारों पर जो तस्वीर थी वो गायब हो गई थी । डाईनिग टेबल एकदम खाली हो गया था। सोफे पर फर्श पर समान कार्टून में पैक किये हुए रखे थे। खिडकी और दरवाजे से  परदे उतार लिए गये थे । जीत अनायास ही पुछा मैम आप कही जा रहे है । हां जीत मैं अपने मां के घर जा रही हूं । तुम्हे इसलिए बुलाया कि समान ट्रक पर लोड करने में मेरी मदद कर दो । श्योर मैम,,,,पर क्या मैं पूछ सकता हूं कि अचानक यहां से जाना किस लिए मैम।। यह सुन मैम बोली बस मेरा यहां जॉब खत्म हो गया । मुझे इससे भी अच्छी जॉब का आफर हुआ है । तब मैम आप फिर कभी नही आयेगी । हां ऐसा ही समझ लो । तुम आनंद को बता देना कि मैम चली गई । आप जा कहॉं रही है यह तो बता दे । मैं कोलकाता जा रही हूं । तभी ट्रक की आवाज आई जो बाहर गेट पर रूकी ।तीन चार लेबर ट्रक से नीचे उतरे घर के भीतर गये समान उठा कर ट्रक पर लोड करने लगे जीत ने थोडी सी मदद की । मैम चुपचाप नीम के पेड के पास आ कर खडी हो गई । जो अभी तीन फीट का हो गया था ।मैम ने नीम के पेड़ को बडे प्यार से स्पर्श किया उनकी ऑखे छलक गई। अपनी चुनरी से ऑसू पोछ कर वापस घर के तरफ देखी तो आखिरी समान घर से बाहर निकल रहा था । मैम ताला और चाभी लेबर को दी लेबर दरवाजा लॉक कर चाभी मैम को वापस दे दिया।  चाभी जीत को देते हुए बोली जीत यह चाभी मीठी मैम को दे देना। जी मैम , और जीत इस नीम के पेड़ का ध्यान रखना । जरूरू मैम। मैम ने दो कार्ड अपने हैड बैग से निकाल कर जीत को देते हुए बोली यह तुम्हारे लिए और यह आनंद के लिए जब वह आये तो उससे दे देना। जी मैम ,,तभी आनंद जीत के भीतर चीखा अबे नंबर तो ले फोन कैसे करूगा । मैम पलट कल बोलो घर पहूंच कर फोन करूंगी और अपना नंबर तुम दोनो को दे दुगी । जी मैम ,,तभी ट्रक के पास एक टैक्सी रूकी , मैम टैक्सी के तरफ चली गई । जीत तेजी से जा कर टैक्सी का दरवाजा खोला मैम एक बार जीत के तरफ देखी और बोली गुडबाय जीत अपना ध्यान रखना । जीत की ऑखे भीग गई । वह कुछ बोल नही पाया बस सिर हिला कर हामी भर दी । मैम टैक्सी में बैठ गई । अंतिम बार जीत के तरफ देखी हाथ हिला कर टाटा की टैक्सी आगे बड गई पीछे पीछे ट्रक भी चलने लगी । जीत अकेला खडा रह गया। धूल सडक से उड़ने  लगी।  जीत धूल के बीच कही छुप गया । 
आज इतना ही 
सभी मित्रो का आभार 
विशेष कर मेरे मित्र मनोहर जोशी जी आभार आज आपने  अपने हाथ से स्केच बना कर भेजा है ।आज के एपिसोड में उनका स्केच प्रकाशित हो रहा है ।
रवि कांत मिश्र ❤❤❤🙏🏻🙏🏻🙏🏻
 

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