सफर अभी बाकी है

घर पहुंचने के  कुछ समय बाद अ गहरी नींद में सो गया था । दादी डिनर के लिए बुलाने आई तो देखी की अ बेसुध सोया हुआ था । दादी की ममता अ को सोते देख छलक गई उनके मुहं से अनायास ही निकल गया,, कितना मासूम है ,जितना मासूम है यह दुनियां उतनी ही चलाक है । हे ईश्वर तुम इसकी रक्षा करना,,नही तो यह अपनी मासूमियत के कारण हमेशा धोखा ही खायेगा । दादी अ के उपर चादर डाल कर चली गई । करीब आधी रात के बाद अ की नींद खुल गई ।।वह अचानक विस्तर पर उठ बैठा।  कुछ देर बैठा रहा फिर उसे धीरे धीरे अपना देखा सपना याद आने लगा ।कि वो वही ताल के किनारे काले गोलाकार  पत्थर के पास मैम की तस्वीर बना रहा है । मैम उसके पास काले गोलाकार पत्थर पर बैठी है ।
 उसकी तरफ  देख रही है । अ तेजी से तस्वीर बना रहा , वह एक बार मैम के तरफ देखता है फिर तस्वीर बनाने में लग जाता है। तस्वीर  पुरी होती है । पुरी  होते ही तस्वीर हंसती है और उड़ती हुई ताल के तरफ चली जाती है जहां वो ताल के पानी के उपर तैरने लगती है । जोर जोर से हंसने लगती है ।कई बार अ तस्वीर बनाता है और उसके साथ ऐसा ही होता है । वह मैम को तरफ देखता है । मैम अ के तरफ देख हल्का सा मुस्कुरा देती है फिर अपनी जगह से उठ कर उसके पास आती है उसके सिर पर हल्का सा हाथ फेर कर हंसती है  और बोलती है मुझे जाना होगा।  इतना बोल कर मैम अ को अकेला छोड कर ताल के किनारे चलने लगती है ।तभी काला गोलाकार पत्थर बर्फ की तरह पिघलने लगता है । उससे धुऑ निकलने लगता हि और धीरे धीरे बहकर ताल के जल से मिलने लगता है ।अ आश्चर्य से यह सब देख रहा होता है  अचानक पत्थर वाष्प बन कर उड़ने लगता है ।हवा में उपर उड़ने लगता है । अ वाष्प के बीच अपने को खोता हुआ देखता है वह अपने आप को चारो तरफ सफेद धुऑ में घिरा हुआ पाता है । वह हडबडा कर धुऑ से बाहर निकलना चाहता है और  उसकी नींद खुल जाती है । इस सपने का क्या मतलब है ,,तभी जीत बोलता है कोई मतलब निकल ले पर कोई मतलब निकलने वाला नही । सपना है बस सपना समझ कर भूल जा । कैसे भूल जाऊं? सपने याद आ रहे है । तु तो वही बात कह रहा है कि जो अभी मुझ से नही हो सकता । दोस्त की तरह सोच ना ,,कुछ बता तो सही ,,जीत फिर बोला इस बार थोडा गुस्से में बोला ,,अरे यार मै अच्छा खासा सो रहा था ,,तु भी इतने दिनो बाद गहरी नींद में सो रहा था ,यह अचानक तुम सपना देखने लगे , अपनी और मेरी दोनो की नींद खराब कर दी। अबे सो जा सुबह उठ कर सपने के बारे में सोच लेंगे।  नही मुझे अभी सोचना है । तो भाई तु सोच मुझे माफ कर ,मुझे नींद आ रही मै सोते सोते सोच कर तुझे बताता हूं । नही तु मेरे बिना सो नही सकता । जब मैं जाग रहा हूं तो तु सो कैसे सकता है बे ? हा यह बात तो है चल फिर सोच क्या सोचता है तु, मेरा तो दिमाग काम नही कर रहा है । यार तेरी जिन्दगी में कुछ भी सीधी सीधी बात नही होती । सब स्पाइडर नेट की तरह उलझी हुई है । इसलिए मेरी मान जैसा चल रहा है चलने दे । तु चुप हो जा मैं कुछ लिखना चाहता हूं । यह आईडिया बहुत अच्छा है तु लिख मैं तूझे चुपचाप लिखते हुए देखुंगा। अ ने अपने लैटर पैड निकाल लिए वही पेन निकाल कल लैटर पैड पर रख दिये । सोचने लगा सामने लैटर पैड और पेन को देखने लगा । दिन भर की सारी घटनाओ को फिर से याद करने लगा ।एक एक घटना शुरू से एक के बाद एक उसके मन के स्क्रीन पर आता चले गये । अचानक वह उस पेड़ के पास जा कर ठहर गया । जहां छुप कर उसने मैम और सर की बाते सुनी थी । उसके कहे शब्द एक बार फिर उसके कानो में गूंजने लगे।  सुचित्रा उसे एक भावनात्मक छांव की जरूरूत है और तुम्हे वह छांव उसे देने होगा । यह सुन वह थोडा परेशान सा होगया ,,उसके मन ने सवाल किया क्या मैम मेरे लिए जो कुछ भी कर रही हैं वह सर के कहने पर कर रही है ?मैम अपनी इच्छा से कुछ नही कर रही है ? अगर ऐसा है तो यह मुझे पसंद नही ,मैने कभी नही चाहा की मैम किसी के कहने पर मेरे लिए एक भावनात्मक छांव बन जाये ,,नही बिलकुल नही , मैं अपनी दुनियां में खुश था ,,मैने कभी मैम से कुछ नही चाहा ,,फिर यह मेरे उपर दया क्यो ? मुझे नही चाहिये ऐसी दया ,,मै अकेले जी रहा था आगे भी अकेला जी सकता हूं । लगता है कि सपने में यही बात मेरे सामने आई है, मेरी मैम और सर की मैम में अंतर है । मेरी मैम और सर की मैम इसलिए सपने में एक दूसरे से दूर हो गये। हां यही मतलब है मेरे सपने का ,,क्या बक रहा है बे ,जीत चीखा,,दिमाग खराब होगया है तेरा ,,,,देवता जैसे इंसान के लिए तु ऐसा सोच रहा है । देख जीत मुझे सच्ची गाली दे दे पर झूठी दुआ नही चाहिये। सर और मैम दोनो योजना बना कर मुझे यह समझना चाहते है कि मै कमजोर हूं भावनात्मक रूप से वीक हूं ,,नही ऐसा नही है ।मैं वीक नही हूं ,, ऐसा ही है जीत फिर जोर से बोला ,तु देख नही पा रहा है पर मै साफ साफ देख रहा हूं कि पीछले पांच सालो से तु लैटर लिख रहा है कभी मां को, कभी मुझे ,कभी खुद को ,कभी भगवान को ,,बता क्यो लिख रहा है? तेरे भीतर एक खाली कोना है जिसमें तेरे मन की चाहत रहती है अकेली तन्हा,,कोई उसकी तरफ देखता नही , कोई उसकी तरफ ध्यान नही देता है । बस तु उस खाली कोना को अपनी पुरी जिन्दगी मान कर उसे जी रहा है । भाई साफ साफ देखने की कोशिश कर ,मैम और सर समझदार इंसान है जो तेरे मन के उस खाली कोना में दस्तक दी है । एक उम्मीद का दीया जलाने की कोशिश की है।  ,तुझे और तेरी मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास किया है। अगर मैम चाहती  तो तुझे स्कूल से निकलवा सकती थी,,सर वह तो देवता है देवता,  कोई दूसरा राक्षस इंसान उनकी जगह होता तो तेरी वो हालत करता कि तु सोच भी नही सकता । जब तु उसके बैडरूम से तकिया चुरा कर निकल रहा था।  वह तभी समझ गये थे कि तु क्या चाहता हैं,, बेटा तु लकी है,,जो सर ने तुझे और तेरी भावना  को इतना मान सम्मान दिया ।तुझे अपने जीवन के साथ जोड़ लिया । अपनी पत्नी का ध्यान तुम्हारी तरफ खीचा ।  मैम को मालुम ही नही होता कि तु उनके बारे में क्या सोचता है। पर अब जो तु उनके बारे में सोच रहा हैं ना ,वो ठीक नही है । जीत मुझे नही पता ,ठीक क्या है गलत क्या है मैं  जिन विचारो से गुजर रहा हूं इस समय उससे अलग नही हो सकता ,,,हां सोचता हूं क्यो कि मुझे यह सब कुछ नही चाहिये था । जीत पता नही क्यो मुझे यह सब कुछ बनावटी लगने लगा है ।जैसे कोई डाक्टर अपने पेशेंट के साथ एक मनोवैज्ञानिक ट्रीटमेंट करता है ताकि उसका पेशेंट उस भावना से निकल जाये । उसी तरह मुझे यह सब कुछ लग रहा है ।सर और मैम एक मनो वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे है ताकि मैं अपनी भावना से निकल जाऊं,,नही नही ,  मै अपनी भावना से निकलना नही चाहता मैं अपनी भावना के साथ जीना चाहता हूं। जीत मैं अपनी भावना के साथ जीने चाहता हूं । इससे अच्छा तो यह होता कि मुझे मैम स्कूल से निकलवा देती । इतना बोल कुर्सी से उठकर खिडकी के पास खडा हो गया।  बाहर सुनसान सडक के तरफ  देखने लगा। जो बिलकूल तन्हा था । कोई हलचल वहां नही हो रही थी ।अ काफी समय तक चुपचाप खडा रहा । लगातार सडक पर देखता रहा तभी उसके मन ने कहा , यह रात ,यह सडक  यह हवा, सडक पर जलते लाईट कितना अपने आप में तन्हा है । बिलकुल मेरे मन के उस कोने की तरह । मन का वो कोना जहां मेरी चाहत रहती है। मेरी सच्ची चाहत ,जिससे किसी मनोवैज्ञानिक उपचार की जरूरूत नही है । वो जैसी है वैसी ही होतो है ,, वह एक बार फिर तन्हा हो गया,, कोई बात नही  पर इस तन्हाई में भी मुझे एक सुकून मिलता है कि मेरी तन्हाई सच्ची है । देख आनंद सर और मैडम जो कुछ भी कर रहे है वह तेरे भले के लिए कर रहे है । तु सीधा सीधा सोच ना,,आखिर कोई तुम्हारे बारे में, एक चोर के बारे में ,जो अपनी मैडम के समान चुराता था ,,उसे पनिश ना करके उसे समझने का प्रयास दोनो ने किया ,क्यो ? क्या जरूरूत पडी उन दोनो को ? आखिर तुम उसके लिए इतना महत्वपूर्ण तो कभी नही थे । सर कभी तुम्हारी अवस्था में रहे होगे ,,और यह समाज उनको टार्चर किया होगा । उस टार्चर से सर और मैडम तुम्हे बचाने की कोशिश कर रहे है । तुम्हे उनको थैंक्स कहना चाहिये । अ चुप रहा और चुपचाप सुनसान सडक के तरफ देखता रहा। उसके मन के स्क्रीन पर दो तस्वीर एक बाद एक लगातार आ रही थी एक पेटिंग वाली मैम और दूसरी गोलाकार काले पत्थर पर बैठी मैम । वह किसके साथ जायेगा ? दोनो से उसके मन के डोर बंधे हुए है । एक डोर के दोनो सिरे पर दो मैम की तस्वीर  दोनो एक दूसरे सी, पर दोनो कही एक दूसरे से अलग ,,अ की समझ में यह बात आ गई कि उसकी भीतर की मैम और उसके बाहर की मैम के बीच वह खडा है । एक उससे कुछ नही चाहती और दूसरी चाहती है कि वो इस भावना से उपर उठ जाये । अ खिडकी के पास खडा रहा बाहर सुनसान  सडक के तरफ देखता रहा । तभी जीत की आवाज उसे सुनाई दी ,,देख सब ठीक है जैसा चल रहा है चलने दे। नही जीत ,,सब कुछ उलझ गया है । मै अपनी उलझन सुलझाना चाहता हूं पर देखता हूं कि कितना सुलझा पाता हूं । 
आज इतना ही ,,
आप सभी का धन्यवाद,,आप सभी मित्रो की प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद । आज मै कोलकात्ता से हमारे वारिष्ट रंगमित्र ध्रुव ज्योति सेन गुप्ता का आभार व्यक्त करता हूं।  आपने बडे मनोयोग से कहानी को पढा और सार्थक सकारात्मक पहलू को सामने रखा । इसके साथ प्रसिद्ध साहित्यकार पदमा मिश्र जी आभार प्रकट करता हूं । आप का आगमन मेरे blog पर हुआ । कुंदन कुमार जी। गौतम गोप जी । मनोहर जोशी जी सशांक शेखर महतो जी ,आप सभी का धन्यवाद ।  🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
रवि कांत मिश्र 

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