सफर अभी बाकी है

जीत जैसे ही अपने घर के भीतर कदम रखा वैसे ही उसके पापा की भारी आवाज किसी हथौड़े की चोट की तरह उसके कान के परदे से टकराई। सहाब आ गये । कहां की सैर कर के लौटे है । पापा सामने वाले सोफे पर बैठे थे ।पापा वह मैं आनंद को लेने रेलवे स्टेशन गया था। वो क्या बात है नीम और करेला फिर आपस में मिल गये।  देख जीत ,वह लड़का पागल है । उसकी जिन्दगी का कोई लक्ष्य नही । मुझे मालुम हुआ है कि वह मैडम के बहुत करीब पहूंच गया था । उसके और मैडम के बीच कुछ ऐसा हुआ कि मैडम को शहर छोड कर जाना पडा। क्या झूठ है । पापा आप ऐसा कैसे कह सकते है ? आनंद बहुत ही नेक लड़का है। मैम और सर दोनो उसे बहुत मानते थे । फिर जब मैम यहां से गई तो आनंद असम गया हुआ था । देखो जीत मैं चाहता हूं की तुम आनंद से दूर रहो । इसी में तुम्हारी भलाई है । अपना सारा फोकस अपनी पढाई पर रखो ।भूल जाओ दोस्ती यारी सब और उस प्रोफेसर के पास भी जाना बंद करो । पापा यह नही हो सकता ,मैं घर छोड सकता हूं पर दोस्ती नही छोड सकता । मुझे मालुम था की तुम्हारा जवाब यही होगा । तुम एक बेवकुफ इंसान हो इमोशनल फुल हो । मै तुम्हारी कई गलतियों  को जानता हूं ,,सिगरेट तुम पीतो हो ,झूठ तुम बोलते हो ,मेरे जेब से रूपये निकालते हो । अपनी मां के पर्स से  रूपये निकालते हो । लडकियो के कॉलेज के चक्कर लगाते हो । बियर भी पीते हो। आवारा लड़को के साथ सिनेमा के टिकट भी तुम कभी कभी  बैल्क करते हो । यह सब मैं सहन करता हूं खून के घुट पी कर रह जाता हूं । कभी कभी मुझे लगता है कि तुम मेरे बेटे कम दुश्मन ज्यादा हो । 
पापा  मुझे माफ कर दे सब कुछ छोड दूंगा बस आनंद से मुझे अलग करने की बात मत सोचिये। नही जीत तु सब कुछ कर जो तु कर रहा है मुझे कोई दिक्कत नही बस उस आनंद का साथ छोड दे ,,,वह तेरे लायक नही है । वह बहुत पागल लड़का है । उसके उपर इश्क का बुखार छाया हुआ है ,,पुरे शहर में उसकी चर्चा हो रही है । सभी लोग कहते है कि वह चरित्र का ठीक नही है । मैडम के साथ लोगो ने उसे देखा है । मैडम का भी चरित्र ठीक नही है इसलिए वह अपने पति का घर छोड कर चली गई । पापा मैं किसी भी हाल में आनंद को नही छोड सकता । मां तभी बैठक में आ गई और बोली देखो जी जवान लड़का है इस पर अपनी पहलवानी मत आजमाओ । आनंद और इसकी दोस्ती पुरानी है। और रही बात आनंद की तो वह बहुत ही भोला और सच्चा लड़का है । मैने उसे कई बार देखा है । वह कभी गलत कर ही नही सकता । जाओ बेटा जीत अपने कमरे में जाओ । जीत अपने कमरे में चला गया । पापा जी बोले तुम इसे शह दे रही हो । एक दिन देखना हम दोनो भोगेगे इस सहाब जादे के कारण । तब की अब देखी जायेगी । चलो अभी रोटी खा लो ।इतना बोल मां जी कमरे से चली गई । पापा जी अपनी दांत किटकिटाते हुए रह गये ।

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जीत और अ दोनो सुबह सुबह अपने घर के छत पर खडे थे । ठंढ पड़नी शुरू हो गई थी । चाय की  प्याली दिनो के हाथ में थी । दोनो खामोशी से चाय पीते हुए उगते सूरज को देख रहे थे । कुछ पल दोनो खामोश रहे फिर जीत बोला शहर में तुझे और मैम को ले कर अफवाहों का बाजार गरम है । मीठी मैम को तुम जानते ही हो उनके पेट में कोई बात पचती नही । मुझे अपनी बदनामी की कोई चिंता नही है पर मैम के बारे में कुछ नही सुन सकता ।  मैम अगर इस अफवाह के कारण शहर छोड कर चली गई है तो यह बहुत ही बुरा हुआ । प्रो सर बोल रहे थे कि उनसे कोई गलती हो गई जिसके कारण मैम उनको छोड कर चली गई । आखिर वह गलती क्या थी आनंद थोडा गुस्से में पुछा । मैं नही जानता यार पर कुछ तो हुआ है नही तो मैम इतना बडा कदम नही उठाती । यह सुन आनंद चुप हो गया।कुछ पल बाद धीरे से बोला जीत कही ऐसा तो नही कि मैं मैम और सर के बीच में आ गया था जिसे ले कर सर को गलतफहमी हो गई हो और उसने गुस्से में ऐसा कुछ कह दिया हो जो उनको नही कहना चाहिये था । यार हो यह भी सकता है। अगर ऐसा है तो मुझे क्या करना चाहिये?अरे यार वाइफ हसबैंड का मामला है। तु बीच में क्या कर सकता है ? देख आनंद जब तक मैम नही आ जाती या मैम से बातचीत नही हो जाती तब तक हम सिर्फ अनुमान ही लगा सकते है । यह सुन अ तुरंत बोला मैम का टेलिफोन नंबर सर के पास होगा ही ,,नंबर जुगाड कर सीधा मैम से बात करते है । यार नंबर मैं कैसे मांग सकता हूं । अबे आनंद मागने कौन बोल रहा है । मैं तो कापी करने बोल रहा हूं । मुझ से नही होगा यार आनंद बोला ,अबे भूल गया मैम का पेन ,वाटर बोतल  तकिया ,,,सब तु तुने ही तो ,,हा किया था दिल ने कहा मैने किया पर कमीने तुने भी मेरा साथ दिया तभी कर पाया था । तो यार अब कौन सा साथ नही दे रहा हूं । तु आगे आगे चल मैं पीछे पीछे तेरे साथ हूं जहां तेरे पैर गडमगायेगा मैं संभाल लूगां । तो चल फिर प्रो सहाब के पास । चल पार्टनर,,,जीत अ के कन्धे पर हाथ मारते हुऐ बोला । दोनो एक दूसरे को देखे फिर जोर से हाथ मिलाई फिर  छत से नीचे उतरने लगे ।❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
अ और जीत जब मैम के घर के पास पहूंच के तो ,अ को दिल जोर से धड़कने लगा था जैसे  दोनो गेट खोल कर भीतर गये अ का ध्यान नीम के पेड़ पर चला गया वह थोडा पहले से बडा हो गया था । अ घर को देखते हुए आगे बड़ता जा रहा था , ,तभी उसके मन ने कहा सब कुछ वही है बाहर से कुछ भी नही बदला पर मन के भीतर,का दृश्य बदल चुका है । कल तक मैम इस घर में रहती थी अब सिर्फ मैम की याद इस घर से जुडी रह गई है । दोनो दरवाजे पर पहूंच गया । जीत ने दस्तक दी खट खट खट ,भीतर,से आवाज प्रो सहाब की आई  कौन ? सर मैं जीत हूं  और साथ में  आनंद है । दरवाजा खुला सामने प्रो सहाब खडे थे । शेव उनकी बडी हुई थी बाल थोडे आपस उलझे हुए थे । समाने आनंद और जीत को देख कर बोले अच्छा हुआ तुम दोनो आ गये ।आओ भीतर आओ । सर के पीछे दोनो भीतर आ गये।  आनंद को भयंकर झटका सा लगा। कमरा खाली था । जमीन पर एक दरी बिछी हुइ थी जिस सर तकिया ले कर सोये थे । पानी की बोतल उनके सिराहने रखी हुई थी । अ के मन में एक दर्द का भंवर तेजी से घुमने लगा । उसके मानस पटल पर इस घर की पुरानी तस्वीर एक के बाद एक आने लगी,,पहली बार उसने तकिया चोरी किया था । दूसरी बार सर और मैम के बुलाने पर आया था । मैम की तस्वीर से दिवार कवर था आज ऐसा लग रहा है कि दिवार उदास निराश हो कर मेरी तरफ देख रही है । जीत कुछ ही देर में फर्नीचर आ जायेगा।फोटो ग्राफ भी आ जायेगे ,,इसके साथ बाकी समान भी आ जायेगा । तुम दोनो उसे लगाने में मेरी थोडी मदद कर देना । तुम दोनो बैठो यह तीन चेयर अभी से हमारे पास जो मीठी मैम के है । और बोलो कैसे आना हुआ ? सर आनंद बोला अगल आप परमिट करे तो मैं मैम से बात करना चाहता हूं । इसमे परमिट की क्या बात है तुम।मैम से बात कर सकते हो । यह लो नंबर सर तुरंत नोट बुक अपने जेब से निकाल लिये और एक नोट बुक के एक पन्ने पर नंबर लिख कर आनंद को दे दिया । जीत मन ही मन खुश हुआ कि चलो नंबर आसानी से मिल गया। नंबर देने के बाद प्रो सहाब बोले चाहो तो यहां से फोन कर सकते हो । आनंद तुरंत अपनी जगह से उठा और नंबर डायल करने लगा । आनंद की धड़कन एक बार फिर तेज हो गई । दूसरी तरफ से घंटी बजती रही पर कोई रिस्पांस नहीं मिला । प्रो सहाब बोले रात मैने भी ट्राई किया था पर बात नही हो पाई  ,लगता है कोई प्रोब्लम हो । तुम लोग बैठो मैं फ्रेश हो कर आता हूं । प्रो सहाब भीतर वाशरूम के तरफ चले गये । अ और जीत दोनो एक दूसरे को देखे और चुप चाप बैठ गये तभी दोनो एक साथ बोले यार सर के लिए ब्रेकफास्ट ले कर आता हूं । यह बोल दोनो एक साथ हंस पडे । जीत बोला तु बैठ मैं अपने घर से आता हूं ,,नही यार मै अपने घर से आता हूं । चल दोनो ले कर आता है । अबे एक ही जा सकते है इस बीच सर आ गये तो क्या सोचेगे दोनो गायब हो गये ,वो भी बिना बताये । ठीक से आनंद तु जा मैं बैठता हूं । ओके मैं यु गया और यु आया । अ तेजी से बाहर निकल गया । जीत इस बीच अपने लिए कोई काम देखने लगा कि वह सर की मदद कैसे कर सकता है । तभी उसकी नज़र बरामदे के बाहर गार्डन पर पडी जीत तुरंत बाहर आ गया । पाईप नल से जोड़ कर पौधो को पानी देने लगा । कुछ समय बाद सर आपने सर तौलिये से पोछते  हुए बाहर निकले सामने देखा तो दोनो गायब हो चुके थे बाहर गार्डन में देखे तो जीत पौधो को पानी दे रहा था।  अ कही नही दिखाई दिया तो खिडकी पर आ कर पुछे आनंद कहां है ? सर वह आपके लिए नाश्ते लेने गया है बस आता ही होगा । अरे तुमने उसे रोका क्यो नही ? मैं सोच रहा था कि हम तीनो मद्रासी होटल जा कर दोसा खायेंगे। 
सर पहले घर का नाश्ता कर ले फिर मद्रासी का दोसा भी खा लेगे । यह सुन सर बोले ओके यह आईडिया भी ठीक है । समय बीतता जा रहा था  आनंद वापस नही लौटा तो जीत को परेशानी होने लगी । उसका दिल बैचैन होने लगा। आनंद इतनी देर तो लगा नही सकता । दस मिनट का रास्ता  है । तीस मिनट से उपर हो गये।  जीत अ के घर पर फोन लगाया तो दादी फोन उठाई जीत आनंद के बारे में पुछा तो दादी बोली अरे करमजले तु उसे साथ ले कर गया था अब फोन कर क्यो पूछ रहा है । वह घर वापस नही आया।यह सुन जीत को और बैचैनी हो गई । उसने फोन वापस रखा ही था कि फोन की घंटी बज गई सर और जीत दोनो चौके तेजी सर ने फोन उठाया हैलो ,,दूसरी तरफ से आवाज आई सीटी पुलिस स्टेशन क्या आप आनंद नाम के युवक को जानते है । यस सर जानता हूं वह मेरे लिए नाश्ता लेने गया था । क्या हुआ वह पुलिस स्टेशन कैसे पहूंच गया ?आप जल्दी से पुलिस स्टेशन आ जाये ।इतना बोल फोन कट हो गया ।जीत पुछा सर क्या हुआ आनंद को वह पुलिस स्टेशन कैसे पहूच गया ।चलो हमे जल्दी पुलिस स्टेशन पहुंचना है ।दोनो तेजी से घर से बाहर निकल गये ।घर को लाॅक भी नही किया ।
आज इतना ही 
आप सभी का आभार 
रवि कांत मिश्र 
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