सफर अभी बाकी है
अ चुपचाप चेयर पर बैठा था । प्रो सहाब खिडकी के पास खडे थे और जीत नये फर्नीचर को सेट कर रहा था । थोडी देर बाद जब फर्नीचर सेट हो गया। तो जीत सर के तरफ देख कर बोला सर देख लिजिये सेटिंग सही हुई ना । प्रो सहाब धीरे से सर घुमा कर देखे ,वही सोफा सेट उसी रंग का उसी जगह सेट हो गया था । प्रो सहाब के मन ने कहा हर चीज की एक जगह होती और,जगह के लिए एक चीज होती है । इट्स ओ के जीत । सर अ के तरफ देखे और उसके करीब आ कर खडे हो गये अ पहले की तरह चुपचाप बेठा हुआ था । प्रो सहाब हल्का सा मुस्कुरा दिये और बोले । आनंद तुम सही हो अपनी जगह ,पर यह जो समाज है वह भी अपनी जगह सही होता है । तुम इसे बदल नही सकते ।बस इनके बीच से तुम्हे गुजरना है । पर आज तुम जिस तरह गुजरे हो उसे गुजरना नहो उलझना कहते है । मजबुत होना होगा तुम्हे ।किसी की सोच को सुनना यह नहो सुनना, तुम्हारे हाथ में होना चाहिये । कल कोई और मेरे बारे में तुम्हारे बारे में मैम के बारे में बहुत कुछ अनर्गल बोलेगा । तुम किस किस से लड़ते रहोगे । अ पहली बार सर के तरफ अपना झुका हुआ चेहरा उठा कर देखा । उसकी ऑखों में अब भी गुस्सा बाकी था । उसकी ऑखों को देख कर सर बोले नही आनंद नही तुम्हे इस तरह मैं नहो देख सकता । इस तरह तो तुम रहे, तो तुम एक अलग तरह के इंसान बन जाओगे । नफरत तुम्हे अपने कब्जे में लेगा । रूक जाओ और सोचो की तुम कितना मानविये हो संवेदनशील हो । यह तुम्हारी मन की सुन्दरता है । इसे नफरत करने वाले लोगो से तुम्हे बचाना होगा।।।नही तो वह लोग तुम्हे अपने जैसा बना देंगे इस दुनिया से नफरत करने वाला इंसान। जाओ उठो, जा कर मुहं धो लो और साथ में अपना गुस्सा भी धो लो । जीत यह सुन हल्का सा मुस्कुरा दिया। अ चुपचाप उठा और वाशरूम के भीतर चला गया।पहली बार वो मैम के वाशरूम में आया था । सामने बेसिन था और उसके उपर एक बडा हा आईना । अ आईना में अपना चेहरा देखा जो मुरझाये हुए फुल कि तरह लग रहा था ।नल से पानी खोल चेहरे पर पानी मारने लगा । उसे अच्छा लगने लगा धीर धीरे उसका गुस्सा भी चेहरे से पानी की बूंद बन बहने लगा । चेहरा उठा कर देखा तो आईने के एक कोने में उसे माथे की नीली पीली लाल बिन्दी दिखाई दी । मैम का चेहरा उसके मन के आईने में उभर गया । नीली बिन्दी लगाई मैम ,पीली बिन्दी लगाई मैम ,लाल बिन्दी लगाई मैम । अ ने अपनी ऑखे बंद कर ली । मैम का चेहरा एक एक कर धीरे धीरे उसकी ऑखों से दूर होता चला गया । अ का मन खाली है गया ।अ अपनी ऑखे खोल कर बिन्दी के तरफ देखा और उसके हाथ बिन्दी के तरफ बड गये । एक एक बिन्दी को स्पर्श करने लगा फिर एक एक बिन्दी को आईने से निकला कर अपनी हथेली पर चिपका लिया । तभी दरवाजे पर खट खट की आवाज हुई जीत बाहर से बोला आनंद सो गया क्या ? जीत आ रहा हूं ,,तेजी से बिन्दी अपने हथेली से निकाल कर उसे अपने कमीज के उपर वाले पैक्ट में डाल लिया जो उसके दिल के पास बना हुआ था। एक बार आईना में खुद को देखा और फिर तेजी से वाशरूम से बाहर निकल गया । सर और जीत दिवार पर मैम की फ्रेम की हुइ तस्वीर फिक्स कर रहे थे । जीत बोला आ जा देख तेरी भी तस्वीर है। मैम और उसकी वही कमल के फुलवाली तस्वीर थी जो सर ने ताल के किनारे किलिक की थी । । जीत उस तस्वीर को दिवार पर फिक्स करने लगा । सर बोले आनंद , जी सर ,,अ जल्द से बोला । good तुम्हारी आवाज में पहले वाली कनक आ गई । चलो अब हम लोग लंच के लिए मद्रासी चलेंगे । यह सुन जीत अ के तरफ और अ जीत के तरफ देख कर पुछा क्या विचार है दोनो ने इसारे में कह दिया कि हा यार चलते है ।❤❤
❤ रात हो चुकी थी । आनंद के लिविंग रूम मे
टेली फोन की घंटी लगातार बज रही थी । आनंद अपने कमरे में बैठा पढ रहा था कोई फोन नही उठा पा रहा था । अ अपनी जगह से यह सोचते हुए उठा कि छोटी मां किचन में होगी और दादी अपने कमरे में ,चलो मैं ही देखता हूं जा कर फोन उठाया बोला हैलो ,,,,दूसरी तरफ से आवाज आई ,,क्यो बे चिकने पढ रहा था क्या ? वो डिम्पल तुम हो ,,हां मेरी जान मै डिम्पल ही हूं ,,सॉरी तुम्हे डिस्टर्ब कर रही हूं ,,पर करना पडता है आंटी से बात हुई थी कि तु किसी लौडे को पंच मार कर उसका दांत तोड दिया था । पुलिस तुझे पकड कर थाने ले गई थी ,,अरे बेटा लल्लू लाल तु किसी को पंच भी मार सकता है । मुझे तो अभी तक विलीव नही हो रहा है यार । बता क्यो मारा उसे ? देखो डिम्पल वो मैम के बारे बहुत गंदा कमेंट किया था । तो क्या तु पंच मारेगा गुंडो कि तरह लडाई झगडा करेगा । यही करने तु वहां गया है । यह सुन अ चुप होगया । डिम्पल भी चुप होगई दोनो चुपचाप रहे दो तीन पल तक । तभी बोली आंटी को दादी जी को बहुत हर्ट किया है तुमने। सारी डिम्पल मुझ से गलती हो गई मै अब केयर फुल रहूंगा । good boy चिकने, बता मुझे मिस किया की नही माखनचोर झुठ मत बोलना , नही नही किया आते ही मैम और सर के मैटर में बिजी हो गया। अबे यार फिर वही पुरानी रिकार्ड बजाने लगा । स्टूपिड हो यार मैं डिम्पल लेट्स माडल बात कर रही हूं और तु अभी भी एम्बेसडर की बात कर रहा है । यह सुन अ बोला देख अगर बात हो गई हो तो मैं फोन रखु मुझे पढना है ।अ थोडा नाराजगी से
बोला । टच कर गया ना मैम की बात,,, दिल पर टच कर गया ना । चल एक सवाल पूछती हूं अगर मैम मिल जायेगी तो क्या तु उसके साथ सारी जिन्दगी रह सकता है । अ दो पल कुछ बोल नही पाया । तभी डिम्पल फिर बोली जवाब यस या नो में देना । अ चुपचाप रहा उसकी समझ में नही आ रहा था कि वह क्या बोले उसने कभी ऐसा सोचा ही नही था। तभी जीत उसके भीतर से बोला देख आनंद तु मेरे बैगर भी रह सकता है पर मैम के बिना नही रह सकता । मैम तेरे रूह में उतर चुकी है । पहली बार जीत की बात उसे सच्ची लगी । वह डिम्पल से बोला हां मैं रह सकता हूं यस। अबे माखनचोर तुझे मैं रहने देगी तब तु रहेगा ना । बेटा उस मैम के साथ रहने की बात कर रहा है जो तेरा केयर ही नही करती इतने दिन हो गये कभी उसने फोन किया? आनंद अपने दिल के साथ अपने दिमाग की भी मदद ले ले । देखो डिम्पल वह व्यस्त होगी इसलिए फोन नही कर पा रही होगी । फिर सर के साथ उनका झगड़ा भी हुआ है इसलिए भी फोन नही कर पा रही होगी ।
यह जो तुम्हारा बच्चा दिल है ना यह तुम्हे धोखा दे रहा है । बेटा चिकने लाल वह एक शादी शुदा औरत है और तु रंगरूट इमोशनल फूल लड़का। तेरी वेवलेथ और उनकी वेवलेथ में जमीन आसमान की दूरी है । इस लिए वह चली गई और तुझे काल तक नही किया । असम का नंबर तो था ना तुने ही बता था । अ यह सुन फिर चुप रह गया । दिमाग से सोच तब दिल से महसूस कर,, तु दिल से सोचता है और दिमाग से महसुस करता है । तुम्हारा बकवास खत्म हो गया तो मैं फोन रख दूं । रख दे पर रखने से पहले गुड नाईट तो बोल दे मेरे लल्लू लाल । good night इतना बोल कर अ फोन नीचे रख दिया उसके दिमाग में डिम्पल की आवाज अब भी गूंज रही थी। दिमाग से सोच और दिल से महसूस कर तु दिल से सोचता है और दिमाग से महसूस करता । अ फोन के पास ही खडा था तभी छोटी मां भीतर आई और पुछी किसका फोन था आनंद । आनंद चौक गया और अ हा ,,,,वो वो डिम्पल का फोन था छोटी मां ।ओ हो उससे मेरी भी बात हुई थी बहुत ही इंटेलिजेंट लडकी है । वैरी शार्प माईंड। तुम्हे कैसी लगती है आनंद? छोटी मां आप भी ना उसकी तारिफ कर रही है बहुत पकाती है मुझे। छोटी मां मन ही मन बोली पकायेगी तभी तो तु बडा होगा । नही तो बच्चा का बच्चा रह जायेगा। आपने कुछ कहा छोटी मां ? हा डिनर के लिए आ जाओ । इतना बोल छोटी मां भीतर किचन में चली गई आनंद अब भी डिम्पल की बातो में उलझा हुआ था । अपने कमरे के तरफ चला गया। ❤❤
प्रो सहाब के लिविंग रूम में अंधेरा था सिर्फ एक छोटी सी टैबल लैम्फ दिवार के पास जल रही थी जिसकी रौशनी में दिवार के उपर सुचित्रा की फ्रेम की हुई तस्वीर टगी हुई दिखाई दे रही थी । प्रो सहाब पास के सोफे पर निढ़ाल हो कर बैठे थे । टेबल पर वाईन की बोतल गिलास रखी हुई थी । सर एकटक तस्वीर के तरफ देख रहे थे । सुचित्रा की तस्वीर जिसमे वह नजरें उठा कर खिडकी से बाहर देख रही थी । सुचित्रा की ऑखों में गजब की कशिश है । एक शाट में तस्वीर ली । उसे पता भी नही चलने दिया था जब कैमरा किलिक खट की आवाज हुई थी तब उसका ध्यान मेरे तरफ गया था वह हंसती हुई मेरे तरफ आई और मैने उसे अपनी बाहों में भर लिया था । कितने खुशनुमा दिन थे । सर अपने आप से बोल पडे और अपनी ऑखे बंद कर ली । तभी उसे लगा जैसे उसके भीतर से उसकी सुचित्रा निकल कर उसके सामने वाले सोफे पर बैठ गई । एकटक देख रही हो अपने मानस को । मानस ऑखे बंद किये सोफे पर निढ़ाल पडे हुए थे । सुचित्रा मानस के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोली । मानस हम कितना ही खुद को एक दूसरे से अलग करने की कोशिश करे पर दिल का एक हिस्सा चाह कर भी अलग नही होता। रिश्ते हमारे वश में नही होते, हम रिश्तो के वश में होते है । हम लाख अपने को समझा ले पर हम खुद को समझा नही पाते है सिर्फ समझने का दिखावा जिन्दगी भर करते रहते है । मानस तुम वही हो जाओ ना जो मुझ से सेमिनार में मिले थे । चोरी चोरी मुझे देखा करते थे और मैं भी तुम्हे चोरी चोरी देखा करती थी। बिना संवाद के संवाद करना और एक दूसरे से दूर रह कर भी एक दूसरे के करीब हो जाना। मानस तुम वही हो जाओ, मैं वही खडी हूं आज भी । तभी टेली फोन की घंटी बजी टिरिगं, टिरिगं ,टिरिग; मानस अपने भावलोक से एकदम से बाहर आये उठ कर फोन के पास गये फोन का रिसीवर उठा कर हैलो बोले थे कि दूसरी तरफ से आवाज आई अभी तक जाग रहे हो ।
आज इतना ही ।
आप सभी मित्रो का आभार ।
रवि कांत मिश्र🙏

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