सफर अभी बाकी है ,,,

अभी तक जाग रहे हो :दूसरी तरफ से सुचित्रा मैम की आवाज थी । मानस यह सुन एक पल के लिए सिहर सा गया था उसे उम्मिद नही थी कि सुचित्रा का फोन वह भी उस वक्त आ जायेगा  जब वह अपने मन की सुचित्रा से बाते कर रहा हो 
। हैलो सुचित्रा मैं अभी तुम्हारे बारे में
 ही सोच रहा था । क्या मानस अब भी तुम्हारे पास सोचने को कुछ बचा है ? हा सुचि अब मेरे पास सोचने के लिए वक्त ही वक्त बचा है । तुम्हे कैसे पता चला कि मैं यहां अपने इस घर में हूं। मीठी मैम से अभी अभी बात हुई उसने मुझे बताया , खैर तुमने डिवोर्स पेपर तैयार करवा लिए होगे । यह सुन मानस को धक्का सा लगा दर्द की लहर दिल से उठ कर सारे शरीर में फैलती चली गई । वह दो पल के लिए स्तब्ध रह गया:  फिर वापस अपनी अवस्था में आते हुए बोला सूचि मुझे लगता है कि हमे अपने रिश्ते को एक बार और समझने का मौका देना चाहिये । मानस ऐसा तुम सोचते हो मैं ऐसा नही सोचती । मैने बहुत सोच समझ कर डिसीजन नही लिया था ।पर जो भी डिसीजन हुआ वह मेरी भावना ने लिया और मैं अपने उसी डिसीजन पर कायम हूं। इस लिए मैं अब कुछ सोचने नही चाहती। ठीक है सुचि ,,,मैं तुम्हे सूचि कह सकता हूं ना ? दूसरी तरफ से दो पल का सन्नाटा ,,,फिर जवाब आया मानस हम पति पत्नी तो नही रहे पर हम दो समझदार इंसान तो है । हम दोनो के बीच हमारी समझदारी तो रहेगी । तुम मुझे सूचि कह सकते हो । थैंक्स सूचि, ,,मुझे थोडा वक्त दो मैं पेपर तैयार करवा कर तुम्हे फोन करता हूं पर हां तुम्हारा नंबर नही लग रहा था । मैने और आनंद ने ट्राई किया था । नंबर वही है तार सडक पर गिर जाने से फोन डेड हो चुका था । आनंद कैसा है ? वह ठीक है तुम्हारे लिए उसने एक आवारा लडके से मार पीठ कर ली थाने पहूंच गया । क्या आनंद ने मारपीठ की ?आई कांट विलीव? वह ऐसा कैसे  कर सकता है ? इट्स अगेन्स्ट हिज नेचर । पर किस बात यह घटना हुई ? इस जगह यह अफवाह फैल गई की तुम और हम इसलिए अलग हो गये क्यो कि आनंद हम दोनो के बीच आ गया था । वो माई गॉड कैसे लोग है ? इतना इलुजन फैला रखा है । हा सूचि इस बात पर तुम्हे लेकर उस आवारा लडके ने आनंद के सामने कॉमेट कर दिया और आनंद अपने उपर कंट्रोल नही रख सका बात थाने तक पहूंच गई । फिर क्या हुआ आनंद अभी कहां है ?  मैं थाने जा कर मामला रफा दफा कर लिया है । आनंद अपने घर पर है । ओ के थैंक्स गॉड उसका भविष्य बच गया। मैं उससे बात करूंगी । तुम पेपर तैयार करवा कर मुझे फोन कर देना । हा सूचि मुझे थोडा वक्त दो,,कितना वक्त लगता है पेपर तैयार करने में एक दिन या एक साल ,,मानस अब अपने इस रिश्ते से कुछ उम्मिद मत करो दुख होगा। मैं अपना माईंड सेट कर चुकी हूं बेहतर है कि तुम भी अपना माईंड सेट कर लो । ओ के बाय । इतना बोल कर फोन कट हो गया।  मानस रिसीवर हाथ में पकडा रह गया । ❤❤❤❤

करीब दोपहर के एक बजे होगे । घर के भीतर कॉलबेल की घंटी बजने लगी । सुचित्रा अपने स्टडी टेबल पर बैठी कुछ लिख रही थी । उसके मन में सवाल उठा इतने दोपहर में कौन आ सकता है ? उठ कर दरवाजे के पास आई दरवाजा खोला तो सामने आनंद खडा था । आनंद को देख कर सुचित्रा स्तब्ध खडी रही गई। आनंद भी एकटक अपनो मैम को देखता रह गया था आखिर इतने दिनो बाद वह अपनी मैम को देख रहा था । सुचित्रा अपने को सहज करते हुए बोली आओ आनंद भीतर आओ ,,तुम यहां कैसे आ गये ? पता कैसे मिला ? मीठी मैम ने आपके स्कूल रिकार्ड से निकाल कर दिया । आनंद भीतर आ गया था सुचित्रा उसे ले कर बैठक में आ गई थी । बैठो आनंद तुम कैसे हो ?मैं ठीक हूं मैम , आप बिना बताये चली आई । आनंद कुछ ऐसी बाते हो गई थी कि मुझे आना पडा । क्या मैं जान सकता हूं मैम ? सॉरी आनंद यह बहुत ही पर्सनल है । तुम बताओ तुम्हारी परिक्षा कब से है  ? मैम और तीन दिन बचे है । तो तुम्हे अभी स्टडी पर फोकस करना चाहिये । मैम पहली बार ऐसा हो रहा है कि मैं जब भी स्टडी पर फोकस करना चाहता हूं मन में यह सवाल चुभने लगता है कि आप क्यो छोड कर चली आई । तभी सुचित्रा जी की मां जी आ गई सूची कौन आया है ? मां आनंद है मुझ से मिलने आया है । मां तब तक बैठक में आ जाती है । आनंद अपनी जगह पर खडा हो जाता है जब माता जी उसके करीब आती है तो आनंद झुक कर मां के पैर छुता है । मां आनंद का चेहरा अपने हाथ में ले कर गौर से देखती है और फिर सुचित्रा के तरफ देख कर बोलती है इसकी ऑखे कितनी खूबसूरत है साफ मन का मालिक है यह । आनंद का माथा चूमती हुई बोलती है । अच्छा हुआ तु आ गया सुचित्रा तुम्हारे बारे में बहुत बाते करती थी । सुचित्रा इस बात पर चुप रही । मां जी बोली तुम लोग बाते करो मैं थोडी देर में आती हूं । इतना बोल कर मां जी चली गई । आनंद वापस अपनी जगह पर बैठ गया। मैम के तरफ देखा तो मैंम खामोश बैठी थी । मैम आप वापस चले :::सर आपके लिए पुरा घर पहले  की तरह सजा कर रखे है । वह आज कल वही रह रहे । आनंद तुम खुद आये हो या सर ने तुम्हे यहां भेजा है । मैम थोडा रूखे स्वर में पूछी । मैम मैं खुद आया हूं आप से मिलने के लिए आया हूं। अभी मै यहां आपके पास हूं इसकी सूचना सिर्फ मुझे और जीत को है । आपको वापस चलने की बात कर रहा हूं तो वह भी अपने मन से । आप दोनो के साथ मेरी जिन्दगी जुडी हुई है । मैं आप दोनो को एक दूसरे से अलग कैसे देख सकता हूं। मैम मैं नही जानता कि प्रोब्लेम क्या है । पर मेरी प्रोब्लेम वही है जो पहले थी मैं वही खडा हूं जहां पहले खडा था । पहले अपनी कल्पना और आपकी चीजों के साथ जी रहा था अब उसमे आपके साथ बिताये लम्हे भी शामिल है । हा एक चीज आपके लिए लाया हूं । जिस आप उस घर में छोड कर वापस आ गई थी । आनंद अपने जेब से एक छोटा सी डिब्बी निकाली और उसे मैम के तरफ बडा दिया। मैम के चेहरे पर उत्सुकता के भाव आ गये डिब्बी हाथ में लेकर बोली आनंद क्या है ? आप खोल कर देख ले मैम। मैम ग्रीन रंग की डिब्बी का ढक्कन खोली तो मखमली सफेद कपडे में चार रंग की बिन्दी रखी हुई थी । मैम बिन्दी देख कर आश्चर्य से अ के तरफ देखी तो आनंद चुपचाप बैठा मैम को एकटक देख रहा था । मैम डिब्बी वापस बंद करती हुई बोली थैंक्स आनंद यह वही बिन्दी है जो मेरे वाशरूम के आईने पर चिपक कर रह गई थी । तभी माता जी आ गई और बोली सूचि आनंद को खाबार कोरते दो (यानी खाना खाने दो )  मैम बोली हां ,,,,चलो आनंद कुछ खा लो।मैम मे लंच करके आया हूं । तो क्या हुआ क्या तुम मेरे साथ दो निवाला नही खा सकते । देखो मैने आज ही तुम्हारे पंसद का चाकलेट केक बनाया है । चलो पहले लंच करो फिर हम केक जायेगे फिर तुम्हे लेकर कोलकाता घुमने जायेगे । पर मैम मैं तो सोच रहा था कि आज शाम की ट्रेन से वापस लौट जाऊँग। चलो सोचते है पर पहले लंच करो मैम बोली और आनंद का बैग उठा कर सोफे पर रख दी । आनंद मैम के साथ घर के भीतर चला गया ।
लंच के बाद मैम आनंद को अपना छोटा सा गार्डन दिखाने ले आई । सर्दी की धूप शाम के तरफ तेजी से उतरने लगी थी । मैम ने बहुत सारे फुल दिखाये और साथ में दिखाये एक छोटा सा नीम का पेड़ जिसे कुछ दिनो पहले मैम ने लगाया था । नीम का पेड़ दिखाते हुए मैम पूछी थी आनंद तुम उस नीम के पेड़ की देख भाल कर रहे हो ना । जी मैम कर रहा हूं। इस बात के बाद मैम दो पल के लिए चुप हो गई । अ मैम को देखता रहा उसके दिमाग में यह प्रश्न फिर सिर उठाने लगा कि आखिर सर से ऐसी कौन सी गलती हो गई जिसके कारण मैम उनको छोड कर यहां आ गई । कहीं मै तो वो कारण नही हूं।मैम ,,,हा आनंद ,,मैम आनंद के तरफ देख कर पुछी। आनंद थोडा संकोच करते हुए पुछा मैम आपके और सर के बीच जो डिफरेंस हुए है उसका कारण मैं तो नही हूं ना । मैम यह सुन दो पल तक आनंद के तरफ देखती रह गई । फिर आनंद का हाथ पकडते हुए बोली चलो मेरे साथ हम अपने स्टडी में बाते करेगे।  आनंद के सारे शरीर में वही बिजली दौड गई जो वह अक्सर मैम के स्पर्श से महसुस करता था । इधर मैम को भी आनंद का हाथ पकड़ना अच्छा लगा था । दो पल के लिए वह भूल गई थी अपने पुराने इतिहास को । वह वही हो गई थी जो काले गोलाकार पत्थर के पास उसकी धड़कन सुनते वक्त हो गई थी । दोनो साथ साथ चलते स्टडी रूम में आ गये  थे । मैम ने धीरे से अ का हाथ छोड दिया था । अ अब भी मैम के हाथो का स्पर्श अपने कलाई पर अनुभव कर रहा था । मैम आनंद को कुर्सी पर बैठने को कह कर खुद उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई । दो पल चुप रही फिर बोली । आनंद तुम्हारे और मेरे बीच में कुछ है पर उसका कोई नाम नही है । एक विश्वास है कि तुम मुझे और मैं तुम्हे कभी चिट नही करेंगे। ठीक है ना , am I right ? यस मैम आनंद धीरे से बोला । अगर कल यह विश्वास खत्म हो जाये तो जो हमारे बीच एक रिश्ता है वह जिन्दा रह सकता है । नो मैम आनंद फिर धीरे से बोला । बस यही विश्वास सर और मेरे बीच टूट गया है उसने मेरे दस साल के भरोसे को तोड़ा दिया, और ना जाने कब से तोड रहे थे ।इतना बोलते बोलते मैम की आवाज भीग गई ऑखों में ऑसू आ गये।  मैम ने खुद को कंट्रोल करने के लिए अपनी ऑखे बंद कर ली। पर आंसू मैम कि ऑखों से निकलकर उनके गालो पर बहने लगे। अ से नही रहा गया उसकी ऑखों में भी आंसू निकल गये । उसने अपनी जेब से रूमाल निकाल कर मैम के तरफ बडा दिया और भीगे गले से बोला मैम आंसू पोछ लिजिये मै आपकी ऑखों में आंसू नही देख सकता ।मैम ने अपनी ऑखे खोल कर अ के तरफ देखी तो आनंद की ऑखे भीग चुकी थी ।मैम अपनी आंसू पोछने भूल कर आनंद की ऑखों मे आये ऑसू को पोछते हुए बोली अरे पगले तु क्यो रोता है तेरे तो हंसने के दिन है। आनंद चुप रहा पर उसके हाथ मैम के ऑसू पोछने के लिए आगे बड गये उसकी कोमल पतली उंगलियां मैम के गाल से ऑसू पोछने लगे।  मैम की ऑखे बंद हो गई।  उसने आनंद को पकड कर अपने सीने से लगा लिया आनंद किसी बच्चे की तरह मैम के सीने से लग गया। मैम आनंद से बोली तु इतना प्यार मुझ से करता है मै तेरा प्यार कहां रख पाऊँगी मेरी झोली खो गई है । आनंद मैम से अलग हो कर बोला मै आपको कभी दुखी नही देख सकता । हा जानती हूं तुझे । पर मार पीठ करना अच्छी बात नही है । आज से तुझे मेरी कसम है किसी से मार पीठ तुम नही करोगे । 
आप कहती है तो मान लेता हूं कि शुरू वात मेरे तरफ से नही होगी । ओ के दैट्स गुड। पर एक बात आपको भी माननी होगी कि आप कभी उदास दुखी नही रहेगी ।चलो कोशिश करूगी । अब मुझे चलना होगा शाम सात बजे कि ट्रेन है ।तुझे अपने से दूर करने का मन नही हो रहा आनंद काश तुम यही मेरे पास ही रूक जाते ।आ जाऊंगा मैम । एग्जाम फिनश करके।  तब बहुत सारी बाते करूगा और हां आपको अपनी कविता भी सुनाऊंगा । अच्छा तुम कविता कब से लिखने लगे। असम गया था वही एक रात कुछ लिखा था। क्या लिखे थे सुनाओ ? आनंद थोडा शरमा गया फिर बोला मैम अभी नही ।फिर आऊंगा तब सुनाऊंगा । नही मुझे अभी सुनना है । ओ के सुनाता हूं। 
रात अभी गई नही
सुबह अभी हुई नही । 
ना मैं सो पाया 
ना पुरी तरह मै जागता ही रहा । 
ना तुमसे अलग हो सका 
ना पुरी तरह मैं तुम्मे समा सका ।
खडा रहा तेरी परछाई के साथ 
चलता रहा तेरी परछाई के साथ ।
कि अभी सफर बाकी है ।
अभी और मुलाकात बाकी है। ।
वाह क्या बात है यह तुमने लिखा है ? आनंद तुम इतनी अच्छी कविता लिख सकते हो । सचमुच तुम समय से आगे चल रहे हो 
आनंद थोडा शर्माते हुए मुस्कुराते हुए बोला मैम थैकस । अगर समय स्टेशन नही पहूंचा तो ट्रेन मुझ छोड कर चली जायेगी । यह सुन मैम बोली ओ के चलो मैं तुम्हे स्टेशन ती छोडने जाऊंगी ।चलिये चलते है । अ अपनी जगह से उठा और मैम अपनी जगह से उठी दोनो के एक दूसरे को देखा अ मैम के पास आ गया मैम उसे अपने सीने से लगाते हुए बोली ध्यान से जाना और पहूअं कर फोन मुझे कर देना । ओके मैम अ मैम से अलग होते हुए बोला । तभी माता जी आ गई जिसे देख सूचि बोली मां आनंद फिर आयेगा । माता जी जरूरू आना आनंद । तुम को  देख कर मन को बहुत भालो लगा । माता जी ने सौ रूपये का नोट आनंद के उसी पैक्ट में डाल दी जिसमे आनंद मैम की बिन्दी लाया था । एक बार मैम की बिन्दी का ख्याल मन में आ गया । आनंद माता जी के पैर छुए । माता जी आनंद का गाल हाथ से छु कर अपने हाथ को चूम  ली । आनंद और मैम घर से बाहर निकल कर टैक्सी ली दोनो पिछली सीट पर चुपचाप बैठे अपने आप में खोया हुए थे । अभी जो एहसास की बारिष उन दोनो पर हुइ थी उसने दोनो को मौन कर दिया था ।आखिर स्टेशन दोनो पहूंच गये ट्रेन प्लेट फ्राम पर लगी हुई थी अ ने रिटन टिकट करा रखा था ट्रेन पर पैर रखते ही ट्रेन चलने लगी । अ मैम के तरफ देखा तो मैम की ऑखों में उसे वही खाली पन दिखाई दिया जो मैम के खाली घर में उसने महसुस किया था । दरवाज़े पर खडा हाथ हिलाता रहा मैम प्लेट फ्रम
 पर खडी हाथ हिलाती रही । ट्रेन चली गई।  मैम  वापस जाने को पलटी तो उसे ऐसा लगा का एक तुफान आया और आ कर चला गया।उस तुफान के साथ वह बहती चली गई । अब एक किनारे वह खडी है । उसके भीतर वही  सुचित्रा बोली क्या कर रही हो तुम ,भावना की लहरों तुम्हे खीच कर बीच सागर में ले गई और फिर तुझे किनारे पर छोड गई। जानती हूं मैं । पर इस बीच कुछ घटा मेरे भीतर ,कुछ  हुआ जिसे एहसास कहते है ,जिन्दगी का एहसास ।  मै जानती हूं कि :::::::
मै अभी मानस से पुरी तरह अलग नही हुई हूं और तुम से पुरी तरह जुडी भी नही हूं । तुम्हारे पास तुम्हारी पुरी जिन्दगी है मेरे पास मेरी बची हुई जिन्दगी है । आनंद हम दोनो समय के अलग अलग नाव पर बैठे है पर तुम मेरे नाव पर आ जाते हो और मैं भी तुम्हारे नाव पर चली जाती हः पर फिर मेरा विवेक मुझे अपनी नावपर वापस ले आता है । उलझनें है पर फिर भी इसके बीच यह एहसास है कि तुम हो मेरे पास । पलटी तो सामने एक लडकी से टकराई जो ट्रैकसुट पहनी थी साईकिल लिए स्टेशन पर आ गई थी। लडकी झट से बोली सारी मैम , मैम उसकी तरफ देखी इट्स आल राईट । इतना बोल मैम आगे निकल गई । 
आज इतना ही 
आप सभी मित्रो का आभार 🙏 आज का स्केच मेरे मुम्बई के मित्र मनोहर जोशी जी का है आप लगातार स्केच बना कर इस कहानी कि श्रंखला को बेहतर बनाने में अपना योग्य दान दे रहे है 
आपका सादर धन्यवाद 🙏

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