सफर अभी बाकी है,,,

रात के दस बज कर चालिस मिनट हुए थे । जब आनंद अपने कमरे आया । उसके टेबल पर रखी घडी उसके वापस घर लौटने का समय बता रही थी । आनंद थक चूका था पर उसकी थकावट में भी उसके चेहरे पर ताजगी थी । वह अपना बैग टेबल के पास जैसे ही रखा उसके दिमाग को झटका सा लगा।  उसके टेबल पर चीजे जहां पहले थी वहा ना हो कर कही और थी । क्या किसी ने उसके समान के साथ छेड़ छाड की है? उसका दिमाग ठनका , एक झटका सा लगा उसे, वह तुरंत टेबल के बगल में र
खे अपने लौहे के बक्से के तरफ देखा तो वह अपनी जगह से थोड़ा खिसका हुआ था । अ ने तुरंत अपने बक्स को उठा कर टेबल पर रखा और उसे खोला तो उसकी रखी हुई चीजें अस्त व्यस्त थी । मैम को लिखे लैटरस ,उनके पानी का बोतल ,उनका दिया हुआ पेन , वो चॉक के छोटे छोटे टुकड़े जिसे कभी मैम की उंगलियों ने छुए थे । यह देख अ को गुस्सा आ गया।  वह अपने बक्से को बंद कर अपनी जगह रख दिया और तेजी से  कमरे से बाहर निकल गया । छोटी मॉ छोटी मॉ आप कहां है ? मै यहां हूं आनंद क्या बात है ? लिविंग रूम से आवाज आई ।आनंद लिविंग रूम में छोटी मां के पास खडा था छोटी मां सामने सोफे पर बैठी एक मैगजीन पढ रही थी । आनंद अपने को सहज करने की कोशिश करते हुए मध्यम स्वर में पूछने की कोशिश की पर स्वर थोडा उपर हो ही गया । क्या आपने मेरे समान को चेक किया था । छोटी मां अ के तेवर को देख समझ गई थी कि इसे बुरा लगा है, पर अब वो क्या करे उसे झूठ बोलना अच्छ नही लगा उसने कहा हा मैने चेक किया था । क्यो चेक किया आपने ? बिना मेरे परमिशन के आपने मेरे व्यक्तिगत चीजों को क्यो देखा? मैं तुम्हारी मां हूं अगर मैने देख ही लिया तो इसमे क्या हो गया ? छोटी मां आपको यह समझ क्यो नही आता कि मेरी एक जिन्दगी है जिसे मै आपके साथ साझा नही कर सकता । अपने पापा के साथ भी साझा नही कर सकता । आप रिश्ते में मेरी छोटी मां है पर आपको मां होने का एहसास दिल से नही हुआ है। नही तो आप अपने बेटे के पर्सनल लाईफ में इंटरफेयर नही करती । ठीक कहा तुमने , मुझे तेरी मां होने का एहसास नही होता है क्यो कि तु मेरी कोख से जन्म नही लिया है । मैं एक बांझ औरत हूं यही कहना चाहते हो ना तुम , अगर तुम मुझे अपना समझते तो , इस तरह मुझ से बात नही करते । मैने तुम्हे अपना समझा इसलिए तुम्हारी चीजों को छु लिया । सॉरी गलती हो गई हो गई मुझे माफ कर दो । इतना बोलकर छोटी मां चुप हो गई । अपना सिर झुका कर अपने हाथ को देखने लगी । छोटी मां के शब्दों ने अ को स्तब्ध कर दिया था । दो विचार उसके मन में बार बार हथौडा बन कर प्रहार कर रहे थे । मेरी कोख से तु जन्म नही लिया ,,,मैं बांझ औरत हूं इसलिए तु मुझे अपना नही समझता। अ की समझ में अभी अभी एक बात आई थी कि छोटी मां की मन कि गॉठ यही है । वह भी अपने जीवन के इस खालीपन को भरना चाहती है । अ छोटी मां के पास धीरे धीरे चलते हुए गया उसके पास जमीन पर बैठ गया और बोला सॉरी मुझे माफ कर दीजिये छोटी मां । छोटी मां कुछ नही बोली हाथ उठा कर अ के माथे पर रख दी । उसकी ऑखों मे जो पानी उतर आया था उसे अपने आंचल से पोछते हुए बोली । आई एम सॉरी मुझे तुम्हारे लैटरस नही पढना चाहिये था । पर तुम इतना अच्छा लिखते हो की मैं अपने आपको रोक नही पाई । बट आई एम सारी मुझे तुम इसके लिए माफ कर दो । कोई बात नही अब मुझे लग रहा है कि आपने जो किया वह सही था । गलती मेरी कि मै यह बात समझ नही सका कि आप भी मेरी तरह उसे खोज रही है जो हम दोनो के पास नही है । मुझे माफ कर दे । इतना बोल आनंद अपनी जगह से उठने लगा तभी छोटी मां उसके हाथ पकड कर बिठाती हुई बोली आनंद ऐसा क्या है तुम्हारी मैम में कि तु उसके लिए पागल रहता है । यह सुन अ हल्का सा मुस्कुरा दिया फिर बोला पता नही बस वह मुझे अच्छी लगती है । वह इतनी सुन्दर है छोटी मां पुछी,,,,पता नही पर कुछ तो है जो मुझे खीच लेता है । वह क्या जादूगरनी है । नही छोटी मां वह तो बस मेरी मैम है । मुझे पनिश करने वाली मैम  मुझे यह सीखने वाली मैम कि हमेशा अपने दिल की सुनो । मैम मैम है छोटी मां। वह मुझे अपने जीवन का हिस्सा समझती है । और मैं क्या हूं तुम्हारे लिए ? तुम्हारी सौतेली मां ।यह सुन अ अपनी जगह से उठ गया और बोला यह सच है पर यह भी सच है कि आपको मैं अपनी मां की जगह नही दे सकता । मैं आपकी इज्जत करता हूं पर मैम से आपकी तुलना नही हो सकती । आप आप है और मैम मैम है ।इतना बोल कर अ अपने कमरे के तरफ निकल गया। छोटी मां चुपचाप सोफे पर बैठी रह गई। तभी टेली फोन की घंटी बजने लगी टिरिगं ,,,टिरिगं ,,टिरिगं छोटी मां फोन रिसीव करती है हैलो दूसरी तरफ से सुचित्रा मैम बोलती है हैलो क्या मै आनंद से बात कर सकती हूं ? छोटी मां ना चाहते हुए भी पुछ लेती है आप कौन है ? सुचित्रा मैम तुरंत बोलती है मै आनंद की क्लास टीचर बोल रही हूं । वो प्लीज एक मिनट होल्ड करे ,,,,,आनंद सुचित्रा मैम का फोन है । आनंद तेजी से लिविंग रूम में आता है फोन तुरंत रिसीव करता है । हैलो मैम दूसरी तरफ से मैम पूछती है तुमने काल नही किया तो मैने कॉल कर लिया । सारी मैम अभी तुरंत ही पहूंचा हूं । चलो जर्नी अच्छी रही ,,,जी मैम ,,,,ओ के आनंद रेस्ट करो बाॅय ,,,,बाॅय मैम  फोन कट जाता है । आनंद फोन रख कर छोटी मां के तरफ देखता है और बोलता है थैक्स छोटी मां ,,,छोटी मां सर्फ मुस्कूरा देती है , अ अपने कमरे में चला जाता हैं उसके जाते ही छोटी मां यह देख मन ही मन प्रतिक्रिया करती है । मैजिक है कुछ तो मैजिक है वर्ना यह रिलेशन यहां तक पहुंचता ही कैसे ? एक कवि हो गया और दूसरी कविता हो गई।❤❤❤
ट्रेन एक छोटी सी प्लेट फ्राम पर आ कर रूकी थी । सुचित्रा प्लेटफ्राम पर ट्रेन से नीचे उतरी ब्राउन रंग कि ओवर कोर्ट पर  सफेद रंग की मफलर डाले कन्धे पर एक छोटा सा बैग लिए उसने चारो तरफ नज़र डाली तो उसकी ऑखों के सामने लकडी से बना एक छोटी सी रेलवे स्टेशन थी जहां पांच छा लोग ठंड में खडे ट्रेन का इंतजार कर रहे थे । सुचित्रा ने उपर देखी तो आसमान को छूते पहाड और पहाड पर तैरते बादल सुचित्रा का मन दो पल के लिए खो गया । वह एक टक बादल पहाड और पंछियों के झुंड को उडते हुए देखने लगी । सफेद पंछियों को देख कर उसे ताल के किनारे टहलते पंछियो की याद आ गई फिर उसके मन के भीतर से आनंद की आवाज आई मैम यहां कही ताल तो होगा  ही । हां ताल हो गया मैं जरूरू वहां जाऊंगी ।चलो पहले यहां से बाहर निकलते है । मैम आगे बड गई तभी एक स्थानिये आदमी जो थोडा बुजुर्ग था सिर पर हैट लगाये सफेद सूट ड्राईवर वाली पहने मैम के सामने आ गया और बोला good morning mam, मैं स्कूल से आया हूं । मेरा नाम कबीर है । आपके कार का ड्राईवर हूं। good morning mr kabir आप यही के रहने वाले है । यस मैम हम सात पुश्त से यही रह रहे हे । बहुत खूबसूरत गांव है आपका । इस पर कबीर खुश होते हुए बोला यस मैम कुदरत के बीच बसा हमारा यह क्लाउड विलेज । दुनियां के नक्शे में उतना फेस नही है फिर टूरिस्ट आते है ।चलिये आईये इस तरफ से ।कबीर मैम को ले कर आगे बढ़ने लगा । दोनो रेलवे स्टेशन से बाहर निकल गये । सामने सडक पर कार सफेद रंग की कार खडी थी । मैम अपना छोटा सा बैग लिए कार में बैठ गई । कबीर ने कार आगे बडा दी । सुचित्रा कार की खिडकी से बाहर देखने लगी। 
 पहाडों के बीच एक छोटा सा गांव था । उस गांव की सडके पहाडों के टुकडे पत्थर को जोड़ कर बनी हुई थी । खेत के बीच गांव के छोटे बडे घर थे जो लकडी के बने हुए थे । उस गांव में नारंगी के पेड जगह जगह लगे हुए थे जिस पर हरे पीले नारंगी लटके हुए दिखाई दे रहे थे । कार गांव के बीच से गुजरती हुई एक डबल स्टोरी कॉटेज के पास आ कर रूकी थी । कॉटेज फुलो के गमलो से सजा हुआ था । मनी प्लांट की लताओ ने काॅटेज के पिलर को अपनी बाॅहो में ले रखा था । गुलाब के फूलों  बरामदा के किनारे कतार से लगे हुए थे । सुचित्रा का मन खुशी से नाचने लगा । वह कार से नीचे उतरी और बरामदे के तरफ बड गई । कबीर जल्दी से कॉटेज का मुख्य दरवाजा खोल दिया । मैम भीतर आ गई । कमरा खाली था । कबीर बोला मैम आपके आराम करने के लिए उपर का कमरा है।  जहां आप आराम कर सकती है । यह चाभी रखे कल सुबह मैं आपको स्कूल लेजाने आ जाऊंगा। सुचित्रा को यह घर देख अपने वो घर की याद आ गई । कबीर चला गया था । सुचित्रा अकेली खडी हो कर सोचने लगी कि एक बार फिर से जिन्दगी शुरू करनी है इस कमरे को अपनी उन यादो से सजाना  है । जिसमें दर्द कम हो और सुकून अधिक हो । सुचित्रा उपर कमरे में जाने वाली सीढ़ी पर अपना पैर रख दी थी । एक बार सीढ़ी के अंतिम भाग को देखा और फिर एक एक कदम सीढ़ी पर पैर रखते हुए आगे बढ़ने।❤ लगी। ❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
जीत और अ दोनो एग्जाम हाल से बाहर निकले ही थे कि सामने डिम्पल को देख अ के तो होश ठिकाने लग गये। डिम्पल अपनी साईकिल के सीट पर बैठी बिंदास तरीके से दोनो आते हुए देख रही थी । जीत का ध्यान डिम्पल पर गया तो उसके मूंह से निकल गया यार यह मॉडल तो इस शहर का नही लग रहा । अरे पागल यह डिम्पल है । क्या बात कर बे ,,,साईकिल चला कर असम से यहां आ गई क्या । कुछ भी कर सकती है । यह खतरनाक लडकी है ।मेरे पीछे भूत कि तरह पडी हुई है । बेचारी रॉंग नंबर डायल कर रही है । बेटा तु मेरा इंट्रो करा देख मैं कैसे इसे बाटली में लेता हूं । तेरा नाम भूल कर मेरा नाम जपने लगे गी । दोनो डिम्पल के तरफ बडने लगे। डिम्पल के पास आते ही बोली क्यो बे चिकने  मुझे देख कर पीसने छूटने लगे।  और यह है तुम्हारा दोस्त जीत । यस आई  एम जीत हाय ::हाय 
आज इतना ही 
आप सभी मित्रो का आभार 
रवि कांत मिश्र 

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