सफर अभी बाकी है ,,,,
आनंद फोन पर मैम से बाते कर रहा था मैम आनंद से कुछ बोल रही थी जिसे आनंद ध्यान से सुन रहा था । बीच बीच में यस मैम कह रहा था । डिम्पल उससे कुछ दूरी पर आ कर खडी हो गई थी । जीत सोफे पर बैठा कभी अ को कभी डिम्पल को देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था । दो से चार मिनट के बीच मैम की बाते खत्म हो गई और मैम ने फोन कट कर दिया । फोन पर आनंद ने अंत में इतना ही कहा मैम गुड नाईट । अ का चेहरा खुशी से खिल गया था । वह जीत के तरफ पलट कर बोला मैम की जॉब हो गई है । वह कोलकाता छोड़ कर ,,,,इतना ही बोला था कि उसका ध्यान डिम्पल पर गया जो आनंद को एकटक देख रही थी । आनंद बोलते बोलते रूक गया । वह डिम्पल के तरफ देख कर बोला क्या बात है तुम इस तरह क्यो देख रही हो ? डिम्पल कुछ नही बोली चुपचाप वापस चली गई । उसका यह व्यवाहार अ की समझ में आ गया था पर उसे यह अच्छा नही लगा था । वह जीत को बोला चल छत पर तुझ से कुछ बाते करनी है। जीत और आनंद दोनो छत के तरफ जाने वाली सीढ़ी के तरफ चले गये । छत पर पहूंच कर अ जीत से बोला मैम सिलोन में है वहां के किसी स्कूल में प्रिंसिपल हो गई है । यह तो गुड न्यूज है जीत खुश होते हुए बोला । पर सुन यह बात प्रो सहाब को नही बताना है । मैम ने मना किया है । मैं एक बात तुझे कहना चाहता हूं कि मेरा दम घुटने लगा है । छोटी मां चाहती है की मैं उसकी तरह से सोचु , डिम्पल चाहती है की मैं उसके तरह से सोचु, पापा कहते है कि तु अपनी जिन्दगी को अपने तरीके से सोचो । तु है जो मुझ से लडता है झगड़ता है पर हमेशा मेरे साथ खडा रहता है । मैम कभी कहती नही कि मैं उनकी तरह सोचू पर लगातार वह मुझ से भाग रही है। एक मैं हूं कि उनकी तरफ शुरू से भाग रहा हूं । वह कभी मुझ से यह नही कहती कि आनंद तुम मेरी तरफ आ जाओ बस इस बार उसने कहा कि आज तुम्हे रोकने की इच्छा हो रही है । जीत मैं अपने विचार से खुद को डिवलेप करना चाहता हूं । मैं छोटी मां और डिम्पल से दूर जाना चाहता हूं । इतना बोल अ रूक गया । जीत मुस्कुरा रहा था । मुस्कुराते हुऐ बोला मैं जानता था कि यही होगा । कोई बात नही तु वही कर जो तु चाहता हैं । यह छोटी मां और डिम्पल तुझे रोक नही पायेंगे। पर तु जायेगा कहां ?मैं मैम के पास जाऊंगा उनके साथ रहूंगा । वाह जीयो मेरे शेर,,, तु जा समय आ गया है दोस्त,,,,, आ गले लग जा ,जीत ने अपनी बांहे फैला दी । आनंद जीत के गले लग गया । दो पल बाद जीत और अ एक दूसरे से अलग हुए तो अ बोला मैं यहा वापस लौटूगा यहां मेरा बहुत कुछ है जिसने मेरी जिन्दगी को शेप दिया है । तभी नीचे से छोटी मां कि आवाज आई आनंद नीचे आ जाओ डिनर रेडी है । यह सुन दोनो एक दूसरे के तरफ देखे और नीचे जाने वाले सीढ़ी के तरफ चल दिये । ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,डिनर के टेबल पर आनंद अपने विचार में खोया खाना खा रहा था । जीत सभी के चेहरे को बारी बारी से पढने की कोशिश कर रहा था । छोटी मां बार बार नज़र उठा कर अ के तरफ देखती कुछ पूछना चाहती पर ना जाने क्यो पूछ नही पा रही थी ।डिम्पल अनमने तरीके से डिनर कर रही थी उसका ध्यान अपनी प्लेट पर था। जीत से रहा नही गया वह बोला मैम की जाॅब हो गई है । वह फिर से सेटल हो गई । यह बहुत खुशी की बात है । छोटी मां नज़र उठा कर अ के तरफ देखी और फिर बोली मैम को अपने पति का घर छोड़ना लकी रहा या आनंद का कोलकोत्ता जा कर मिलना लकी रहा । मुझे लगता है मैम के लिए आनंद लकी है । डिम्पल पहली बार नज़र उठा कर अ के तरफ देखी । अ चुप चाप डिनर किये जा रहा था । पर छोटी मां और डिम्पल के विचार तरंग उसे चुभने लगे थे । उसे ऐसा लग रहा था कि उसने मैम से बात कर कोई क्राईम कर दिया था। उससे रहा नही गया वह बोला छोटी मां इंसान अपना लक खुद बनाता है । मैम ने अपना रास्ता खुद चुना है उसमे किसी का कोई कन्ट्रीबूयशन नही है । यह सुन छोटी मां बोली मान लेती हूं तुम सही कह रहे हो ,पर मैम तुम्हे फोन कर अपनी खुशी तुम से क्यो शेयर करती है ? इस बात पर अ के हाथ अपनी थाली पर रूक गये वह छोटी मां के तरफ देखा और बोला बिकॉज शी ट्रस्ट मी , एंड लव मी , यह सुन डिम्पल अपनी नजरें उठा कर अ के तरफ देखी उसके चेहरे पर गुस्सा था । अ छोटी मां जीत के तरफ देखा और बोला मेरी समझ में यह क्यो नही आता की दो इंसान नफरत करते है तो किसी को कोई समस्या नही होती पर दो इंसान आपस में प्रेम करते है तो लोगो को बडी समस्या होने लगती है । क्यो ? दिस इज रेडिकुलस ,,,मैं ऐसे समाज का हिस्सा हूं जहां प्रेम को पाप और नफरत को, ,,, । छोटी मां आप ही बताये कि हम जिस समाज में रहते है क्या वो विमार हो चुका है ? आनंद तुम बडी बडी बाते कर क्या कहना चाहते हो कि हम सभी लोग मानसिक रूप से बिमार है और तुम सही हो ? नही यह सच नही है तुम एक मानसिक कॉमलेक्स से गुजर रहे हो । तुम सोचो कि तुम क्या कर रहे हो ? तुम मैम में अपनी खोई हुई मॉ को देख रहे हो ? जब कि यह सच है कि मैम कभी तुम्हारी मां नही हो सकती। जीत समझ गया कि आज तुफान को आने से कोई रोक नही सकता । अ यह सुन कर दो पल के लिए चुप हो गया । फिर धीरे से बोला मेरी मां के साथ मैं वही उसके अर्थी के पास आज भी बैठा हूं ।वहां से मैं उठ नही पाया दस साल हो गये । और ता जिन्दगी मैं उठ नही पाऊगा । मैम से रिश्ता मैने नही बनाया बस अपने आप बनता चला गया और हमारे रिश्ते का कोई नाम नही है । बस कुछ है हम दोनो के बीच ऐसा जिसे हम दोनो एक दूसरे के लिए महसुस करते है। उसे किसी नाम की जरूरूत नही है ।जो आप लोग नही समझ पा रहे है या आप समझना नही चाहते ,,,पर मैने अपने अकेलेपन से घबड़ा कर सुसाईट नही की तो, एक जीत दूसरा मैम के कारण । छोटी मां आठ नौ साल के बच्चे से जब उसकी मां छीन ली जाती है और पिता दूसरी शादी कर उसे दादी के हाथ छोड जाता है तो वह क्या करे ? अपनी मां की याद को किसके साथ जीये ? इतना बोलते बोलते अ का गला भर आया, वह चुप हो गया। डिम्पल अ के तरफ देखती रह गई । उसे अ का इमोशनल हो जाना अच्छा नही लगा । उसे आत्मग्लानी होने लगी कि वह क्यो अ और मैम के बीच में आ गई । अ सच कहता था कि कुछ बाते समझाई नही जाती सिर्फ उसे महसुस किया जा सकता है । अ को देख कर जो मुझे महसुस हुआ है उसे अ चाह कर भी समझा नही सकता था । आई एम सॉरी आनंद अन जाने में जो भी गलती हुई उसके लिए मुझे माफ कर दो । आज तुम्हे देख कर मुझे एहसास हुआ कि रिश्ते बनाया नही जाते रिश्ते अपने आप बनते है । जीत जो बहुत देर से चुप था अ से बोला तु अलग है तेरे रास्ते अलग है , हम लोगो को आदत है लकिर पर चलने की । इसलिए हमें परेशानी होगी। पर तू अपने बनाये रास्ते पर चल । छोटी मां अ के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए बोली बेटा मैने जो कुछ भी कहा वह इस समाज के नियम है तुम नियम तोड़ कर अपना एक नियम बना रहे हो । हमे उस नियम के टूटने का डर है , इसके साथ समाज में अपमानित होने का भी डर है । छोटी मां आप चिंता ना करे मेरे कारण किसी को इंसल्ट फिल नही करना पडेगा ।इसके बाद आनंद धीरे से अपने चेयर से उठा और बोला एसक्युज मी ,,,अपने कमरे के तरफ चला गया । सभी खामोश बैठे रहे । सिर्फ जीत मुस्कुरा रहा था ।❤❤❤दूसरी सुबह करीब तीन बजे जीत और अ एक साथ उठे फ्रेश हुऐ तैयार हुए अ अपना बैग रात मे ही तैयार कर चुका था उसे उठाया और अपने कमरे से निकल कर बैठक मेें आया तो डिम्पल सोफे पर बैठी थी अ और जीत को देखकर सोफे पर से उठ गई और अ के तरफ देख कर बोली आनंद मुझे माफ कर देना मैने अनजाने में ही तुम्हे बहुत कुछ कह दिया जो मुझे नही कहना चाहिये था तुम सही थे कि रिश्ते बनाया नही जाते बन जाते है । सॉरी यार माफ कर दो ।डिम्पल की ऑखे भर गई ।अ डिम्पल को अपने गले से लगाते हुए बोला तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो हम तीनो ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त है । हम तीनो हमेशा दोस्त रहेंगे ?अ जीत और डिम्पल तीनो एक दूसरे के गले लग जाते है । तीनो की ऑखे भीग जाती है । दो पल बाद तीनो एक दूसरे से अलग होते है डिम्पल अपना बैग सोफे के पास निकाल कर बोलती है कोलकात्ता तक हम साथ चल सकते है । आनंद कहता है चलो चलते है । तीन दोस्त चुपके से निकल जाते है जाने से पहले एक लैटर छोटी मां के नाम अ डायनिग टेबल पर रख देता है । सुबह होने वाली है तीनो दोस्त स्टेशन के तरफ जाने वाली सडक पर पैदल चल रहे थे । जीत डिम्पल की साईकिल चला रहा है और मन ही मन सोच रहा है आज फिर उसके और अ के रास्ते अलग अलग हो रहे है पता नही फिर कब यह रास्ते एक दूसरे से मिलेंगे,,,,,,,,,,,,,,,पर कभी ना कभी मिलेंगे जरूरू क्यों कि सफर अभी बाकी है ,,,,,,,,,,,,,,,दोस्तो आप सभी का बहुत आभार आपने इस कहानी को अपना समय समर्थन और सार्थक प्रतिक्रिया दिया आपका हृदय से धन्यवाद । सफर अभी बाकी है कहानी अभी बाकी है । अ क्या मैम के साथ रह पायेगा ? क्या मैम मानस से तलाक ले पायेगी ? क्या छोटी मां अ को वापस घर ला पायेगी । जीत अ और डिम्पल क्या आपस में मिल पायेंगे? मानस क्या अपने अपराध बोध से निकल पायेगा ? क्या उस ताल के पास उस गोला कार काले पत्थर के पास नीम।के पेड के पास अ जीत मैम फिर मिलेेंगे,,,,सफर अभी बाकी है ।
वापस आ पायेंगे ? ऐसे बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर सफर अभी बाकी है इसके दूसरे भाग में प्रकाशित किया जायेगा । इसलिए कुछ समय का विराम ले रहा हूं।❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
Comments
Post a Comment