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सफर अभी बाकी है

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 बहुत देर तक दोनो पत्थर पर सिर रख उसकी धडकनो को सुनते रहे । तभी पास के पुल पर से एक ट्रेन धडधडाती हुई पार होने लगी जिसके शोर में धडकनो का संगीत कही खो सा गया । दोनो एक साथ पीछे पलट कर देखे  तो कुछ दूर पर बने पुल पर ट्रेन तेजी से धड़ धड करती हुई पार हो रही थी । दोनो एक दूसरे के तरफ देखे और अपनी जगह से उठ गये । कुछ पल तक दोनो खामोश रहे ,ट्रेन उनके सामने से गुजरती रही । एक समय ऐसा भी आया की ट्रेन गुजर गई और उसकी धड धड की आवाज उन  दोनो से दूर होती चली गई । वो खामोशी फिर से एक बार छा गई । जो पहले वहां छाई हुई थी ।दोनो पास पास ही खडे थे । मैम अ के तरफ देखी वह ताल के तरफ देख रहा था । मैम भी ताल के तरफ देखने लगी । ताल की लहरे किनारे से आ कर टकराती जा रही थी । अ मैम के तरफ देखा और पुछा मैम  आपको कैसा लगा । यह सुन मैम पहले तो चुप रही कुछ समय बाद बोली अच्छा लगा ,बहुत ही अच्छा लगा । मैम के मन ने कहा यह क्यो नही कहती कि तुम एक बार वही से चलना शुरू की , जहां तुम रूक गई थी । सुचित्रा तुमने अपने उपर एक सुचित्रा को ओढ रखा है । वह सुचित्रा तुम नही हो ,वह सुचित्रा कोई और है । पहचानो अप...

सफर अभी बाकी

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सूरज अभी अभी उगा था। ताल का पानी सिंदूरी दिखाई दे रहा था । हवा में थोडी ढंडक थी  जो धीरे धीरे  बह रही थी । मैम के साथ उसके बगल में अ बैठा ताल के पानी से संदूरी रंग को खेलते देख रहा था । कुछ ऐसा ही उसके मानसरोवर में चल रहा था । उसका चांद उसके पास था और उसकी चांदनी उसके मन के झील में गहरे बैठ गई थी । अब झील के पानी से चांदनी को अलग करना संमभ नही था ।अ बारह जो देख रहा था वह उसके भीतर की तस्वीर थी । यह दोनो उसी   काला गोलाकार पत्थर पर पैर लटकाये बैठे थे ।  जिसके रूह में इन तीनो की यादे धड़क रही थी। ।मैम  आकाश में उडते पंछियो के झुंड देख रही थी जो  दूर तक आकाश में उडते चले जा रहे थे । तो कभी ताल के किनारे बगुले के झुंड को देखती जो सुबह सूबह टहल रहे थे । दोनो मौन थे ,बाहर से चुप पर दोनो के मन के किनारे विचार लहर बन कर टकरा रही थी । प्रतिक्रियाओ का  तुफान चल रहा था  । अ रात भर इस विचार को जीता रहा कि वह अपनी सच्ची भावना पर  यकिन करे या  मैम की कहानी पर ?इधर मैम के मन में यह विचार चलता रहा कि कहीं मैम की कहानी से अ की भावना को ठेस तो नही पहुंची ...

सफर अभी बाकी है ,,

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मैम किचन से बाहर निकल कर फोन रिसीव की हैलो ,,दूसरी तरफ से मानस की आवाज थी जिसने कुछ कहा जिसे सुन मैम थोडा नाराज होते हुए बोली यह क्या मैने सारी तैयारी कर ली थी , पहले बता देते । फिर कुछ कहा गया जिसे सुन कर मैम बोली ओके ध्यान रखना । इतना बोल कर फोन कट हो गया। मैम अ के तरफ देखी जो मैम के तरफ एकटक देख रहा था । मैम बोली प्रो सहाब आज नही आ रहे है । अब वह अगले सप्ताह आयेंगे । देखो मै कुछ भूल रही हूं वो याद आ गया । मैम इतना बोल कर किचन के तरफ चली गई ,अ चुपचाप बैठा था पर उसके मन मे छुपी उसकी अपनी मैम बार बार उससे कह रही थी तुम जो देखना चाहते हो दरअसल वह नही है । वह अलग है मै उससे अलग हूं । तुम मुझ में और मै तुम्मे कही रच बस गई हूं ,हम दो होते हुए भी कही एक है । हम एक दूसरे से है एक दूसरे के लिए । देखो उसे ,वह प्रो सहाब की पत्नी है ,तुम्हारी मैम है ,,हो सकता है तुम्हारी दोस्त हो जाये । पर रहेगी हमेशा तुम्हारी क्लास टीचर सुचित्रा मैम , अ अपने भीतर की मैम  की बाते सुन रहा था ,जब वह चुप हो गई तो अ  अपने आप में बुदबुदाया नारी  पहले  एक नारी होती है ,,,फिर बाद में सब कुछ और नारी क...

सफर अभी बाकी है

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शाम हो चुकी थी अ और जीत दोनो घर के छत पर खडे डूबते हुए सूरज को देख रहे थे । दोनो चुपचाप खडे थे पर दोनो के मन में अपनी चोरी पकडे जाने की फिल्म तेजी से आगे पीछे चल रही थी । मैम ने जब जीत के सामने एक सफेद पेपर रख दिया और कहा कि आज तुम अपने पापा को लैटर लिखो कि तुमने अपने दोस्त के पापा के नाम एक फाॅल्स लैटर लिखे थे । तुमने ऐसा क्यो किया ? जीत समझ गया था कि वह अपने ही फेके हुए जाल मे फंस चुका है । अब उसका कोई नया पैंतरे नही चलेगा । उसने सीधा सीधा रास्ता पकड लिया और बोला मैम मैं अपने दोस्त आनंद को बचाने के लिए यह लैटर लिखा था । इसमे उसकी कोई गलती नही है । वह तो सीधा सीधा एक लैटर अपने पापा को लिख चुका था और मै जानता था कि वह लैटर पढ कर कोई उसे माफ नही करता उल्टा उसकी सज़ा दोगुनी हो जाती। इसलिए मैने वो लैटर लिखा जो ऐसे समय में अक्सर लिखा जाता है । मैने गलती की है मुझे इसकी जो सज़ा देनी आप दे दीजिये। आप कहती है लैटर लिखने मै लैटर लिख दूंगा पर आपको पता नही है कि मेरे पापा बहुत दयालु नही है नियम के बहुत पक्के है । वह कम बोलते है और जब बोलते है तो उनका डंडा बोलता है मेरे पीठ पर ,,पर कोई बात नही मै...

सफर अभी बाकी है

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मैम के घर से वापस लौटने के बाद अ  दादी के पास गया और दादी के पास उनके सामने जमीन पर बैठ गया ।दादी रामायण पढ रही थी । अ चुपचाप बैठ कर रामायण सुनता रहा। पर उसका मन रामायण से जुड नही पा रहा था । उसके मन के स्क्रीन पर एक दृश्य,बार बार रह रह कर उभर रहा था कि मैम और मैम की खामोशी।  उसका मैम के पास खडा होना । यह खामोशी कही उसके मन में चुभ रहा था । इस चुभन से अ को दर्द हो रहा था पर वो इस दर्द को अपने लिए सही भी मान रहा था । दूसरी तरफ  इस दर्द से कही अधिक एक अपराध बोध उसके भीतर आकार ले रहा था कि मैम को उसके कारण जो दुख हुआ था । उससे अ कही ज्यादा आहत हुआ था । दादी रामायण पढते हुए एक बार अ के तरफ देखी फिर रामायण पढने लगी । कुछ देर बाद दादी का रामायण पढना समाप्त हुआ   दादी रामायण को सिर पर लगा कर उसे लाल कपडे से ढक दिया और बोली ,,मन से लड़ना बंद कर दे ,,मन के साथ जीना शुरू कर । दादी आपको कैसे पता चला कि मै मन से लड रहा हूं ? ,,चेहरा और खास कर तेरी ऑखे बता रही है कि तु लम्बे समय से मन से लड रहा है । देख बेटा मन तभी शक्तिशाली होगा जब बीच से दो भागो में टूटा नही होगा। मन जैसा है उस...

सफर अभी बाकी है ,,,,,

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स्कूल की छुट्टी होते ही । अ जीत के साथ साईकिल ले कर घर के तरफ निकल गया । जीत उसका मुड ठीक करने के लिए बोला देख बे तेरे साथ कोई समस्या नही है समस्या तेरे सोचने के स्टाइल में है । तु सोचता दिल से है और दिल से सोचने वाले अक्सर दिमाग से सोचने वालो दुनियां में फ़ेल हो जाते है । यह वर्ल्ड है ना वर्ल्ड इसमे दो तरह के लोग रहते है । तु दूसरे तरह के लोगो में शामिल है । जिनकी संख्या बहुत कम है । देख तु तो लकी है कि तुझे दोस्त वो भी मेरे जैसे दोस्त मिल गया । नही तो तुम जैसे लोग बिना दोस्त के ही इस दुनियां जीते है और निकल जाते है । अ कुछ नही बोल रहा था बस अपनी साईकिल के पैडल पर पैर मारते हुए यह सोच रहा था कि उसे मैम के पास जाना है । यहां से नर्सरी जाने और आने में एक घंटे लग जायेगे । अभी बजे है चार ,यानी  पांच बजे तक आ जाऊंगा अगर घर नही जा कर सीधा नर्सरी जाता हूं तब ,अगर घर जा कर फिर नर्सरी जाऊंगा तब बजेगा छः नही यह ठीक नही होगा।  अ ने अपने साईकिल की रफ्तार तेज कर दी यह देख जीत बोला अबे मैम के घर जाने से पहले याद रखना वो देवदास वाला लुक बेटा ऐसे लुक नारी के मन में करूणा पैदा करती है और करूण...

सफर अभी बाकी है

अ ने पापा को लैटर लिखना शुरू किया ।  डियर पापा , आज मै स्कूल नही जा कर बाजार चला गया था पिक्चर देखने की इच्छा थी पर पिक्चर देखने से पहले ही मैथ के टीचर दास सर ने मुझे पकड़ लिया और फिर मुझे स्कूल लाया गया । इसके बाद मुझे आपको लैटर लिखने की कहा गया । जो मै लिख रहा हूं । मै मानता हूं कि मैने गलती की है पर यह गलती मैने क्यो कि ? इसलिए की मै स्कूल जा कर बोर हो जाता हूं । मुझे स्कूल जाने की इच्छा नही होती है पर मुझे स्कूल जाना पडता है । पापा स्कूल इतना बोरिंग क्यो होते है इतना पेन फुल और डरावना क्यो है ? क्या दुनियां के सारे स्कूल इतने ही डरावने है । मुझे लगता है कि स्कूल एक जेल के समान है । टीचर जेलर है और हम सभी स्टूडेंट कैदी है । मेरा दम घुटता है पर फिर भी मै स्कूल आता हूं । पापा क्या दुनियां में ऐसा भी कोई स्कूल है जहां जाते वक्त स्टूडेंट हंसता हुआ जाये और लौटते वक्त भी हंसता हुआ आये। आप किसी भी स्कूल की छुट्टी होने पर उसके गेट के पास खडे हो जाये । स्टूडेंट ऐसे खुशीयां मानते हुए बाहर निकलते है जैसे उन्हे अभी जेल से रिहाई मिली है । पापा कुछ तो गडबडी हो रही है और लंबे समय से हो रही है ...