Posts

Showing posts from June, 2020

श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

Image
उस रात जब मै वापस लौटा तो सभी स्टूडेंट ने मुझे चारो तरफ से घेर लिया । सभी शिकायत करने लगे कि आप कहां चले गये थे । सभी के चेहरे पर मेकअप अब भी लगा हुआ था । केक काटे गये थे । मेरे लिए केक बचा कर रखा हुआ था । मैने केक खाया और सभी के साथ फोटो खिंचवाई।  सभी स्टूडेंट का मन भारी होने लगा था कि अब हम पता नही कभी मिलेंगे या नही । मैने सभी को बेहतर शो करने की बधाई दी और कहा कि जिस तरह तुम लोगो ने नाटक में पुरी एकाग्रता और मेहनत से काम किया है उसी तरह आगे भी अपने काम को इस तरह पुरी एकाग्रता से करना । अभी मै बात चीत कर ही रहा था कि तभी किसी ने आ कर कहा कि चलिए आपको स्टेट प्रेसिडेंट बुला रहे है । मैं उस व्यक्ति के साथ चला गया। उनके निवास स्थान पर पहूंचा तो वहां गीता जी ,सरस्वती राव जी ,चौधरी जी और भी कोई एक दो लोग बैठे थे । मै भी बैठ गया मेरे पेमेट की बात हुई । एक व्यक्ति ने एक लिफाफ निकाल कर नोट निकाले और गिन कर चौधरी जी को दिया । चौधरी जी ने मेरी तरफ बढ़ाये मैने रूपये ले कर अपनी जेब में डाल लिया । किसी ने कहा की आप गिन लेते । मैने कहा आपने गिन लिए मेरे लिए काफी है । चौधरी जी ने थैंक्स कहा मैन...

श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

Image
बहुत बात विवाद के बाद यह तय हुआ कि नाटक हम लोग करेगे । हंवन कूड़ चुकी मंच के बीच में था तो नाटक को मंच के अग्रभाग और अंत भाग के बीच खेलना होगा । यह मेरे जीवन का पहला अनुभव था जब मंच के सेन्टर में हंवन कुंड जिसमे से धुऑ अब भी निकल रहा है । भले ही धुऑ हल्का हल्का सा निकल रहा है । पर भीतर आग तो प्रज्वोलित है और मुझे अपने नये एक्टरों के साथ रिकार्ड डेट नाटक को मंच पर खेलना है । मैने सोच लिया कि मुझे क्या करना है । मैने सबसे पहले पैतीस मिनट वाले प्ले के कैसेट को टेप से निकाल कर पैंतालीस मिनट वाला कैसट लगा दिया।  सभी लडकियो में और उनके माता पिता में उत्साह का संचार हो गया । सभी रिहर्सल  पर आ गये । मैने रिहर्सल वाले स्थान पर चौक से लकीर खीच कर एक हवन कुंड बनाया । नाटक शुरू करने से पहले एक गेम शुरू किया की मंच की सीमा के भीतर आप तेजी से भागेगे पर जैसे ही मैं स्टाप बोलूंगा आप अपने जगह रूक जायेगे । शर्त सिर्फ इतना है कि आप हंवन कुंड के बाहर ही सब कुछ करेगे अगर आप हंवन कूड़ के लकीर को भी छु लिए तो आप इस गेम से आउट हो जाओगे । गेम शुरू हुआ । सभी  लडकियो ने गेम को इंजॉय करना शुरू किया।...

श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

Image
मन भारी था रात भर ठीक से मैं सौ नही पाया था । बार _बार उन बच्चियों का चेहरा मेरी ऑखों के सामने घूमता रहा।  उनकी उदास और ऑसू से भरी ऑखे मुझ से अनेकों सवाल करती रही । मै एक बेबस इंसान की तरह उनके सवाल सुनता रहा।  सर हमारी क्या गलती है ? आप बाताये ? हमे शो करना है हमे नाटक से ना हटाये ,,मन एक बार फिर भर गया । निशब्द हो कर में खडा रह गया था पर भीतर मन चीख मार कर रो रहा था ।जी चाह रहा था जा कर उससे पुछ कि जिसे लोग भगवान कहते है कि तुमने इन बच्चो के मन को क्यो दुखाया ? कहते है बच्चो के मन में भगवान रहता है तो फिर इसके मन को क्यो दुखाया?? बहुत देर तक खुद को सहज करने की कोशिश करता रहा पर सब बेकार था ।  उनसे यह भी नही कह सकता था कि सब कुछ ठीक हो जायेगा  या चलो अगले नाटक में तुम काम कर लेना । पता नही इन लोगो से जीवन में फिर मुलाकात होगी या नही ? सब कुछ ऐसा ही चल रहा है । मै उठा और विस्तर पर बैठ गया मेरे बगल वाले विस्तर पर गुरूजी तकिया को बांहों में लिए बच्चों की तरह सौ रहे थे । सुबह हो चुकी थी  सूरज देव आकाश में निकलने की तैयारी कर रहे थे । पंछियो की चहचहाट से पुरा वातावर...

सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

Image
दूसरे दिन सुबह मुझे एक बिल्डिंग में ले जाया गया जहां मेरी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई अधेड़ उम्र के हंसमुख व्यक्ति नाम उनका याद नही आ रहा है शायद बसीर था । उनके पास डबल कैसेट वाला टेप रिक्रडर था जिसमे नाटक के कैसेटलगे हुए थे । मुझ से कहा गया कि आप इसमे से एडिट कर ले । मैने फिर अपना माथा पीट लिया कि यह क्या समझ रहे है । इनको कुछ मालुम नही है । एडिटिंग बिना स्टूडियो के संभव नही हो सकता  मुझे स्टूडियो दे ,तभी एडिटिंग हो पायेगी  मेरी बात को समझने मे उनको समय नही लगा पर उनके पास यही एक एडिटिंग टेप रिकार्डर था ।  मैने भी सोच लिया कि चलो काटना ही तो है। मैने अपनी सारी कविता और वाइस ओवर को काट दिया । तब भी नाटक चालिस मिनट का हुआ । फिर मैने सिद्धार्थ के जन्म और हिमालय से साधु का आना काट लिया । अब नाटक शुरू ही हो रहा था सारथी के साथ रथ में बैठ कर जाने से । तब जा कर नाटक पैतीस मिनट का हुआ । मैने कहा कि अब कुछ भी नही काटा जा सकता । इस कैसेट को रिकार्ड करवा ले किसी स्टूडियो मे जो डिलिट पार्ट है उसे मैने इरेज कर दिया है । वह लोग कैसेट लेकर चले गये दोपहर लंच से पहले कैसेट ले कर आये । पैती...

श्री सत्य सांई की मायावी दुनियां और मैं

Image
किसी रचना कार से उसकी रचना को अलग कर उसे तटस्थ खडा कर देना । यह अनुभव मुझे श्री सत्य साईं के डिवोटी ने दिया । मै अपनी पीडा से गुजरा ,यह पीडा कुछ इस तरह कि पीडा थी जैसे मां को बच्चे से अलग कर देना और संसार को बच्चा तो दिखाना पर बच्चे की मां को कही नेपथ्य में छिपा देना । गीता जी, चौधरी जी और सरस्वति राव जी अपनी बातो पर कायम थे । मेरा नाम निर्देशक लेखक  के रूप में नहीं जायेगा । मैं थियेटर का बंदा बीच रास्ते में अपने स्टूडेंट का हाथ छुड़ा कर कैसे अलग हो सकता था । मैने सोचा चलो जीवन ने जब यह दिया है तो इसे भी गले लगा कर आगे बड़ते है । शो करूगा । शो के बाद जो कहना होगा तो कहूँगा या चुपचाप निकल जाऊंगा।  यह जीवन का अनुभव बहुत कड़वा है इसे पी लेता हूं । बात मैने अपने तरफ से खत्म कर दी । रिहर्सल करने लगा । दो दिन हो गये । शो का कोई डेट नही मालुम हो रहा था । मै रिहर्सल के बाद बाजार के तरफ घुमने निकल जाता। साथ मेरे सहयोगी संजय पंडित होते । जो थियेटर में मेरे अनुज थे । हम जी भर अपना गुस्सा निकालते।  इनकी बातो  पर । इनकी योजना का कुछ ठीक ठाक रूप रेखा समझ में नही आ रहा था । संगीत स...

श्री सत्य साई की मायावी दुनियां और मैं

Image
गणेश गेट के बाहर और गणेश गेट के भीतर दो दुनियां है एक साईं बाजार की दुनियां जिसमे वो हर चीज उपलब्ध है जो एक बाजार में उपलब्ध होना चाहिये पर हर दुकान चाहे वह मुस्लमान का हो या ईसाई का सत्यसाईं के नाम और तस्वीर से शुरू होता है ।दुनियां भर के लोग इस बाजार में घूमते दिखाई दे जायेगे । बाजार का कोई धर्म नही होता बाजार का एक ही धर्म होता है अपना विस्तार करना और सत्य साई  को केन्द्र में रख कर जिस बाजार का विस्तार गणेश गेट के बाहर हुआ था उसका सत्यसाईं के विचार और दर्शन से कोई लेना देना नही था । सब भरपूर लाभ कमाने के लिए बैठे थे । बहरहाल हम सभी गणेश गेट के भीतर सत्यसाई की मायावी दुनियां में प्रवेश कर गये । जहां सफेद वस्त्र पहने लोगो की भीड थी । करीब करीब दो सौ बीस देशो के लोग यहां एक साथ हंसते बोलते खाते पीते बात करते दिखाई दे रहे थे । सिक्योरिटी चैकिंग के बाद हमलोग को एक बडे से हाल में रहने की जगह दी गई । मुझे भीड में रहने की आदत नही थी ।मैने अपने लिए अलग कमरे की मांग की पर मेरी मांग पर ध्यान नही दिया गया । मुझे परेशानी हो रही थी । गीता सरदाना से मैने बात की गीता जी ने मुझे समझाया कि हम सभी...

ष्री सत्य साई की मायावी दुनियां और मै

Image
स्वामी के पास से मंच पर अर्थी गुजरेगी या नही इस बात को लेकर विवाद होने लगा । कुछ लोगो का मानना था कि इस सीन को काट दिया जाये।कुछ लोग इस सीन को काटने के हंक में नही थे। मैने अपना विचार स्पष्ट कर दिया कि यह सीन कटने का अर्थ है नाटक के चार सत्य से एक सत्य को अलग कर देना । इस बारे में स्टेट प्रेसिडेंट ने कह दिया कि अब जो होगा पूट्टापर्ति जा कर होगा । अभी हम कोई सीन नही काटेगे। उनकी बात को सुन लोग पीठ पीछे कहने लगे कि देखना नाटक का क्या हाल होता है । समिति में जाति की फिलिग॔ थी । साऊथ इडियन सोचते थे कि स्वामी साऊथ के है इसलिए उनका पहला हक है । इस पर नोर्थ इंडियन वाले यह कहते थे कि स्वामी सभी के है । मैं शुरू शुरू में समझ नही पाया कि चक्कर क्या ? पर धीरे धीरे सब समझ में आने लगा । मैने सोचा यह भारत की पुरानी समस्या है इसका कोई समाधान नही है । बस अपना काम करते रहो । हम सभी अक्टूबर के माह में पूट्टापर्ति के लिए निकल गये करीब एक सौ पचास लोग से कही ज्यादा की टीम बनी जिसमे स्कूल के टीचर प्रिंसिपल बच्चे भी शामिल थे । बाकि साई समिति के युवा वर्ग थे जो सेट को मंच पर लगाने और ले जाने के लिए काम कर रहे...

सत्य साई की मायावी दुनियां और मैं

Image
नाटक गौतम बुद्ध पर हो रहा था। मै अपने विचार में स्पष्ट था । मैने सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध होने की घटना को मंच पर स्थापित किया था । सारी तैयारी हो चुकी थी । संवाद सगीत की रीकांडिग जमशेदपुर के चीन्टू स्टूडियो में कर लिया गया था।  अब एक्टर मंच पर वाइस के साथ लिप्स मैच कर अभिनय करने का प्रयास कर रहे थे । इस क्रम में पहली समस्या आई की एक्टर असहज हो गये । एक तो वाइस किसी की उपर से मैच करते हुए चेहरे पर एक्सप्रेशन लाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था । मैने कहा तुम लोग अपने संवाद को उसी लय मे जोर जोर से बोलो जिस लय में रिकार्डिंग हुई है और तुम्हे याद रखने होगा कि यह मशीन से मानव की लडाई है । इसलिए तुम चाल सेकेंड पहले से शुरू हो जाओ संवाद जब शुरू होगा तो वह तुम्हे फोलो करेगा ।तुम रिकाडेड वाइस को फोलो मत करो ।बस याद रखना संवाद का लय और गति । जहां विराम है उसे महसुस करना । मेरा यह आईडिया काम कर गया । लडकियो ने पकड़ना शुरू कर दिया और एक सप्ताह में नाटक मंच पर दौडने लगा । यह मेरे लिए एक अलग तरह का अनुभव था । अब नाटक का सेट बना।  स्लाईड बना, एक बरगद के विशाल पेड कि तस्वीर लेने हम तीन लोग बलराज सर...

युद्ध में गांधी और गौतम ।

Image
युद्ध अब जब भी होगा तो बाजार उसका नायक होगा । दुनियां भर के जो हथियार के व्यापारी है उनके जीवित रहने के लिए ,बाजार में बने रहने के लिए युद्ध को आयोजित करना अनिवार्य होता है। महाभारत के युद्ध को कृष्ण नही रोक पाये तो उस युद्ध में हथियार के व्यापारी रहे होगे । उसने दुर्योधन को इतना उकसाया होगा कि तुम किसी भी शर्त पर शांति के लिए सहमत मत होना । इधर चीन को उस हथियार के व्यापारी ने वही समझाया होगा कि तुम भारत से सहमत मत होना । युद्ध हमे चाहिये ,हमारे सर्वाइवल के लिए जरूरी है । आज गौतम और गांधी अपने अपने आहिंसा के विचार को भस्म होते हुए देख रहे है । एक टूकड़े बंजर भूमि जहां मानव तो क्या पशु भी रहना पसंद नही करता ,उस भूमि के लिए दो देशो के सैनिक शहीद हो रहे है । दोनो देशो में यह होड़ लगी है कि कौन किसके कितने सैनिक मारता है । मिडिया जोर जोर से चिल्ला रही है । दोनो देशो के सैनिक परिवार के लोग अपने अपने ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है कि यह ईश्वर युद्ध को रोक दो परंतु ईश्वर सदा से युद्ध रोकने में असफल रहा है । क्यो कि धरती पर ईश्वर से अधिक मानव मन की चलती है । अंहकार लोभ और हिंसा करने की इच्छा मनु...

श्री सत्य सांई की मायावी दूनियां और मैं

Image
दूसरे दिन जब मै थियेटर वर्कशाप के लिए पहूंच   सारे लोग पहुंच चुके थे । सभी एक हॉल  के भीतर शोर मचा रहे थे हॉल के बाहर दरवाजे पर जूतों का ढेर लगा हुआ था। जूते के उपर जूते रखे हुए थे । ऐसा लगता है था कि किसी ने  बोरे से जूतों को एक जगह फेक दिया हो । मैं जूतों की स्तिथि देख कर समझ गया कि मेरा काम कितना सरल होने वाला है । मैं क्लास के भीतर पहूंचा गया पर उनको कोई फर्क नही पडा वो लगातार बाते कर रहे थे । हॉल में ऐसा लगा कि मछली बाजार अपने पुरे जोर  पर है । देखना है कि कौन सबसे अधिक जोर से आवाज लगा सकता है । मै कुछ नही बोला चुप चाप खडा हो गया और एकटक उन सभी को देखना शुरू कर दिया । कुछ पलों बाद कुछ लोग की नजंर जैसे ही मुझ पर पडी वो चुप हो गये । बाकि लोग लगे रहे । अब जो लोग चुप थे वह बोलने वालो को देख कर शर्माने लगे कुछ ने इसारे कर चुप कराने की कोशिश की तो उन सब की नजंर मुझ पर पडी फिर एक एक कर सभी चुप हो गये । मै अब भी चुप चाप पहले की तरह खडा था । जो क्लास रूम थोडी देर पहले शोर कर रहा था । अब आज्ञाकारी विद्यार्थी की तरह मेरे सामने चुपचाप खडा था । मै भी चुपचाप खडा रहा ।कुछ पल ब...

युद्ध दुनियां का सबसे बडा व्यापार है ।

Image
जरा सोचने वाली बात है जब पुरा विश्व कोरोना से युद्ध लड रहा है तब चीन को अपनी सीमा पर युद्ध लड़ने की जरूरूत क्यो आन पडी ? भारत युद्ध नही चाहता पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है । भारत  के लिए युद्ध क्या है एक थोपी हुइ वस्तु जिसे भारत लड़ रहा है । एक टूकड़े जमीन के लिए चीन भारत के और भारत चीन के सैनिकों की हत्या   कर रहे है । क्या एक दूसरो की हत्या कर चीन और भारत उस एक टूकड़े जमीन की समस्या को सुलझा लेंगे।  दो विश्व युद्ध हमने देख लिया है लाखो सैनिक मारे गये । फिर शांति वार्ता हुई । अगर लाखो सैनिक के मरने से पहले शांति वार्ता हो जाती तो लाखो परिवार को अपने बेटे खोने का दर्द नही सहना पडता पर हम इतिहास से सबक नही लेगे इसलिए इतिहास अपने आप को दोहराता है। भारत और चीन के इस झड़प वाली युद्ध का अंत भी इसी तरह होगा।  अभी भारत और चीन के माताओ का कोख सुना करना है । इसके साथ दोनो देश अपने युद्ध सामग्री का खपत करेगे।ताकि और युद्ध सामग्री बनाई जाये या खरिदी जाये । युद्ध का व्यापार शांति के दिनो में मंदी में पडा रहता है । बाजार में तेजी युद्ध के समय आता है । जब दोनो देशो को गोला बारूद ...

श्री सत्य सांई की मायावयी दुनियां और मैं

Image
बेगम अख्तर की आवाज आती रही और हम जमीन पर गहरी नींद में सोये रहे करीब तीन बजे गुरू जी उठ गये और बेगम अख्तर की आवाज पर विराम लगा दिया । टेप बंद हो गया । क्षमा करे वो टेप नही था अभी मुझे याद आया वो वर्ल्ड स्पेस रेडियो था । मै भी उठ गया और मुहं हाथ धो कर वापस रिस्पशन पर आ गया । गुरू जी करीब चार बजे वाशरूम से निकले । ड्रेसिंग रूम मे गये । बेहतर तरीके से तैयार हुऐ फरफियूम लगाये सिल्क का कुर्ता पाजामा पहने हाथ में छडी लिए रिस्पशन में आ कर अपने चेयर पर बैठ गये।  तभी उनका सेवक चिरंजीव एक अधेड़ आदमी उनके लिए दूध और हारलिक्स और मेरे लिए दूध वाली काफी ले आया । हम दोनो साथ साथ काफी और हार्लिक्स   पीने लगे।  तभी संगीत सीखने वाले विधार्थी का आना शुरू होगया। मैने अपनी काफी समाप्त की और गुरू जी फिर मिलने का वादा कर वापस घर के तरफ चल दिया । इस बात के बाद करीब तीन दिन बाद सरस्वती  जी का फोन आया और मैं दूसरे दिन मिटिंग के लिए जमशेदपुर में विष्टुपुर जनरल ऑफिर के पास बने एक बंगले पर पहूंचा तो देखा की सरस्वती राव जी ,एस बी चौधरी जी खडे है । चौधरी जी की उम्र लगभग साठ पैसठ के करीब होगा।संवाल...

श्री सत्य सांई की मायावयी दुनियां और मैं

Image
संगीत समाज की पहली सुबह जब मै सौ कर उठा तो पंडित आनंद चंद्र चौधरी जी उठ चुके थे । किचन से कुछ आवाज आ रही थी । मै उठा कर किचन के तरफ चला गया । मैने देखा कि वह अपने लिए एक बडी सी केतली में चाय बना रहे थे जिसके मुहं से धुआं निकल रहा था । मैने उनके चरर्ण स्पर्श किये । वह बोले साईं राम इसके साथ ही बोले काली चाय पीयेगे । मैने कहा हां जरूरू । पर पहले वाशरूम से आता हूं । इतना बोल कर मै वाशरूम के तरफ चला गया ।वापस आया तो वह रिस्पशन में बैठे एक बडी वाली गिलास मैं भर कर चाय पी रहे थे । मेरे लिए भी एक गिलास चाय प्लेट से ढक कर रखी हुई थी । प्लेट उठा कर मैने देखा तो चाय गिलास के कंठ तक भरी हुई मेरी तरफ देख रही थी । मैने मन ही मन कहा इतनी चाय । फिर पीने का मन बना कर गुरू जी के पास वाली कुर्सी पर बैठ गया।  चाय की पहली चुस्की ली चाय नही कढाह था । सोचने लगा इतनी चाय कैसे पाऊगा? पर गुरू जी को देखा तो वह आराम से चाय पी रहे थे । काली चाय से ,वह भी इतनी स्ट्रांग चाय से मेरी यह पहली मुलाकात थी । शिष्टाचारवश मैं कुछ कह नही पा रहा था पर गुरू जी ने मेरे मन की बात को पढ लिया । वह बोले आपको चाय अच्छी नही लग र...

श्री सत्य सांई और मेरे नाटक ।

Image
बात दो हाजार एक है मुम्बई से वापस घर आया था । बहुत दिन हो गये थे एक सोलो नाटक करने की इच्छा थी। एक नाटक मैने लिखा हे मां तुझे सलाम नाटक 1971 के युद्ध पर था । भारतीये सैनिक जो युद्ध में पाकिस्तान द्वारा बन्दी बना लिये गये थे करीब उनकी संख्या 54 थी । युद्ध समाप्ती के बाद भी वो लोग पाकिस्तान की जेल में कैदी बने कर रख लिए गये थे । नाटक का रिहर्सल तुलसी भवन जमशेदपुर में शुरू हुआ तुलसी भवन इस नाटक को प्रस्तुत कर रहे थे । नाटक का निर्देशन मेरे रंगमित्र शिवलाल सागर कर रहे थे और विजय भूषण नाट्य संयोजक की भूमिका में थे । करीब एक माह के रिहर्सल के बाद शो हुआ और शो में जमशेदपुर के सभी रंगकर्मी आये । शो अच्छा हुआ पर और भी अच्छा हो सकता था अगर तुलसी भवन में जो ध्वनी की समस्या थी उससे प्रेक्षा गृह में पीछे  बैठे दर्शको को आवाज सुनाई नी दी । इको सिस्टम नाट्य प्रेक्षागृह के प्रतिकूल था । बहरहाल आगे के चार रो में बैठे दर्शको को नाटक अच्छा लगा । सभी ने अभिनेता के संवाद पर खूब तालियां बजाई । उस नाटक में मेरे पिता भी दर्शक के तौर पर मौजूद थे । उनका आर्शिवाद मुझे मिला । मेरे विचार से मेरे अप्पा जी ( पाप...

2025 अवसाद युग विस्फोट

Image
भारत वो खाली घडा है जिसमे सभी तरफ से अवसाद भरे जा रहे है । 2025 के आते _ आते यह अवसाद का घड़ा भर जायेगा और उससे जो विस्फोट होगा वह भारत के टूकड़े कर सकता है। अगर हम आज नही चेते तो कल हमारे पास संपूर्ण भारत नही होगा । जिस तरह से सत्ता की राजनीति धन के लिए और धन की राजनीति सत्ता के लिए हो रहा है वह भारत की एकता अखंडता के लिए भयंकर है । समाज में बनता वर्ग और वर्ग में बटता समाज अपने स्वार्थ की राजनीति के लिए भारत के टूकड़े करने पर आमद है । उसे आज नही रोका गया तो परिणाम उसके भयंकर होगे । आर्थिक स्तर पर समाज में वर्ग संघर्ष एक तरफ नक्सलवाद को जन्म दे रहा है तो दूसरी तरफ नक्सलवाद का राजनीतिकरण हो रहा है । पूंजीवाद का वर्चस्व आज शिक्षा स्वास्थ ,व्यवसाय ,मनोरंजन उधोग पर हावी है । बाजारवाद आज का नायक है, वह हमारे जीवन की शैली और दिशा को तय करता है । हमारे घर में क्या होना चाहिये या नही होना चाहिये यह विज्ञापन हमारे भीतर उतर कर तय करता है । इन सभी के बीच वह जीवन शैली जो महात्मा गांधी ने हमे बताया था सदाहरण जीवन और उच्च विचार वह दम तोड चुका है उसके स्थान पर मंहगा जीवन और दूसरे को लूटने का विचार अप...

सम्मान मिलने की खुशी और दर्द

Image
सम्मान जब आपको मिलता है तो आपको खुशी तो होती है पर उस खुशी के साथ दर्द भी चला आता है । यह दर्द कोई और आपको नही देता है आपके आस पास रोज मिलने वाले जिसे आप अपना मित्र समझते है ,वही आपको यह दर्द देंगे।  मै भुक्त भोगी हूं बीस साल  के रंगमंच जीवन में पहली बार झारखंड से जमशेदपुर से मेरे नाटक "अंत से आरम्भ" को साहित्यकला परिषद नई दिल्ली द्वारा मोहन राकेश सम्मान देनी की घोषणा हुई । बहुत खुशी हुई मै अपने सबसे नजदीक मित्र को फोन लगा कर सूचना दी ,,खुशी इतनी थी कि तुरंत मिलना हुआ । मित्र ने गले लगाया उनके साथ भी एक मित्र थे उनको कोई खास खुशी नही हुई बस औपचारिकता वश बधाई दे कर ऐसे मौन हुए कि फिर कोई प्रश्न ही नही किया वह अपने मोबाईल में व्यस्त हो गये । मै उम्मिद कर रहा था कि कुछ प्रश्न वह मुझ से पुछेगे पर नही । यह पहला दर्द का अनुभव हुआ कि इतने वर्षो तक साथ उठने बैठने सुख दुख बांटने के बाद आज सम्मान मिलने के बाद इतनी उदासीनता ,,,,,पर चलो कोई बात नही । मै अपने पहले मित्र के साथ बाते करने लगा और उसे धन्यवाद देने लगा कि तुम्हारे सहयोग के कारण मुझे यह एवाड मिला है । अगर तुम सही समय पर साहित्य...